100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज और 10 करोड़ किसानों तक ICAR टेक्नोलॉजी पहुँचाने का केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने दिया लक्ष्य
ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का स्पष्ट विज़न
समारोह में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, एस.पी. सिंह बघेल भी हुए शामिल
नई दिल्ली ; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का 98वां स्थापना दिवस आज नई दिल्ली के भारत रत्न सी. सुब्रमणियम ऑडिटोरियम, NASC कॉम्प्लेक्स में मनाया गया, जहाँ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत 2047 के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान का रोडमैप सामने रखा। उन्होंने एक तरफ 150 से ज़्यादा कर्मचारियों को पहली बार नियमित नियुक्ति देकर खुशी साझा की, तो दूसरी तरफ 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज, हर संस्थान से परिवर्तनकारी इनोवेशन, 10 करोड़ किसानों तक ICAR टेक्नोलॉजी पहुँचाने, नकली बीज–कीटनाशक पर सख्त कानून और डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म जैसे ठोस लक्ष्य और संकल्प रखे।
“किसान आत्मा हैं, वैज्ञानिक मस्तिष्क”
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का दिन सिर्फ स्थापना दिवस नहीं, उन पीढ़ियों को प्रणाम करने का दिन है जिनकी तपस्या ने अभाव को आत्मनिर्भरता में और संघर्ष को समाधान में बदला। उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा कि किसान अगर किसी की आत्मा हैं तो वैज्ञानिक मस्तिष्क, और जब सरकारी नीति, किसानों का पसीना और वैज्ञानिकों का टैलेंट मिलकर काम करते हैं, तभी खेतों में चमत्कार होते हैं। उन्होंने भारत के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और ICAR के पूर्व नेतृत्व को नाम लेकर याद किया और कहा कि इन्हीं की मेहनत ने आज की मजबूत कृषि नींव तैयार की है।
150 से अधिक कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति
शिवराज सिंह चौहान ने विशेष रूप से बताया कि ICAR के 150 से अधिक कर्मचारियों को पहली बार स्थायी नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह वर्षों से चल रही अन्याय की पराकाष्ठा थी, और जब इन कर्मचारियों को उनका हक मिला तो पूरे ICAR परिवार ने उनके साथ खुशी और भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने सभी नए नियमित कर्मचारियों को शुभकामनाएँ देते हुए इसे ICAR परिवार की बड़ी उपलब्धि बताया।
उत्पादन से आगे बढ़कर क्वालिटी पर ज़ोर
शिवराज सिंह ने खाद्यान्न, बागवानी, दूध और मछली उत्पादन में हुई तेज़ बढ़ोतरी पर खुशी जताई, लेकिन साफ़ कहा कि हम फूल के आत्म-संतोष में बैठ नहीं सकते। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब समय सिर्फ मात्रा बढ़ाने का नहीं, बल्कि “क्वालिटी ओवर क्वांटिटी” का है, ताकि देश के नागरिकों की सेहत सुरक्षित रहे और हमारे उत्पाद वैश्विक बाज़ार में मज़बूती से खड़े हों। उन्होंने एल नीनो और जलवायु परिवर्तन के खतरे का उल्लेख करते हुए क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर, जिलेवार योजना और कृषि जोखिम प्रबंधन पर तेज़ काम करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नए–नए बाज़ार और व्यापारिक समझौते कृषि उत्पादों के लिए अवसर खोल रहे हैं; इसलिए उत्पादन को एक्सपोर्ट–ओरिएंटेड, उच्च गुणवत्ता वाला और सेहत के लिए हितकारी बनाना ज़रूरी है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख लक्ष्य–संकल्प
1. 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज का संकल्प
शिवराज सिंह चौहान ने साफ़ संकल्प रखा कि 100वें स्थापना वर्ष से पहले ICAR और उसके संस्थान मिलकर कम से कम 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित करें। इन गाँवों में जलवायु–स्मार्ट खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, पानी और मृदा संरक्षण तथा जोखिम कम करने के व्यावहारिक तरीके अपनाए जाएँ, ताकि किसान बदलते मौसम में भी सुरक्षित और लाभकारी खेती कर सकें।
2. “वन इंस्टिट्यूट–वन ग्रांट इनोवेशन”– हर संस्थान से एक परिवर्तनकारी तकनीक
उन्होंने लक्ष्य देते हुए कहा कि ICAR के हर संस्थान को अगले दो वर्षों में “वन इंस्टिट्यूट–वन ग्रांट इनोवेशन” के तहत कम से कम एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक या समाधान देना होगा, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव हो। यह इनोवेशन किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाए– चाहे वह नई फसल वैराइटी, वैक्सीन, डिजिटल टूल या क्लाइमेट–स्मार्ट कृषि मॉडल हो।
3. 10 करोड़ किसानों तक ICAR टेक्नोलॉजी पहुँचाने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि 100वें स्थापना वर्ष तक ICAR का लक्ष्य होना चाहिए कि कम से कम 10 करोड़ किसानों तक उसकी वैज्ञानिक तकनीकें, नवाचार और आधुनिक कृषि समाधान पहुँचें। उन्होंने इसे विकसित भारत 2047 के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान की दिशा में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया।
4. “मिशन ICAR-100” और KVK की नई भूमिका
शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्ताव दिया कि अगले दो वर्ष “मिशन ICAR-100” के रूप में लिए जाएँ, जिसमें देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) केवल प्रशिक्षण केंद्र न रहकर इनोवेशन हब, क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर, स्टार्टअप सपोर्ट सेंटर और किसान टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन सेंटर बनें। उन्होंने कहा कि ICAR स्थापना दिवस को किसानों के बीच मनाने के लिए एक पखवाड़े की योजना बनाई जाए, जिसमें हर KVK कम से कम 100 गाँवों में जाकर अपनी रिसर्च और तकनीक का बड़े स्तर पर प्रदर्शन करे।
5. ICAR ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म– हर किसान के मोबाइल पर ICAR
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने “ICAR Open Digital Knowledge Platform” बनाने का संकल्प रखा, ताकि हर किसान अपने मोबाइल पर ICAR की तकनीक, वीडियो सलाह और वैज्ञानिक जानकारी निशुल्क देख सके। उन्होंने कहा कि आज ज़्यादातर किसानों के पास मोबाइल है, इसलिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मोबाइल–फर्स्ट सोच के साथ डिज़ाइन करना ज़रूरी है, जिससे किसान खेत में खड़े–खड़े मृदा परीक्षण, फसल सलाह, मौसम और बाज़ार की जानकारी पा सकें।
6. नकली बीज–कीटनाशक पर सख्त कानून और तुरंत पहचान की व्यवस्था
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि नकली और घटिया बीज तथा कीटनाशकों पर सख्त कानून बनाना समय की ज़रूरत है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि ऐसी सरल तकनीक और उपकरण विकसित किए जाएँ जिनसे खेत में ही बीज और कीटनाशक की गुणवत्ता की तुरंत पहचान हो सके, ताकि किसानों को धोखे से बचाया जा सके और फसल का जोखिम कम हो।
7. 2029 तक 10,000 करोड़ की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि ICAR को केवल सरकार के बजट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी तकनीक, वैराइटीज़, वैक्सीन और लाइसेंसिंग से आर्थिक रूप से मज़बूत होना होगा। उन्होंने 2029 तक 10,000 करोड़ रुपये की आंतरिक संसाधन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखने को कहा और भरोसा दिलाया कि सरकार से मिलने वाला समर्थन चलते रहेगा, लेकिन संस्थान को अपने इनोवेशन से भी आत्मनिर्भर बनना होगा।
वैक्सीन, नई वैराइटीज़ और टेक्नोलॉजी– आत्मनिर्भर कृषि की दिशा
स्थापना दिवस पर 43 नई वैराइटीज़, 17 टेक्नोलॉजी/प्रोडक्ट और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण हुआ, जिनमें बेहतर उत्पादन, रोग–प्रतिरोधक क्षमता, पोषण–समृद्ध फसलें, पशुधन और मत्स्य के लिए वैक्सीन तथा डिजिटल कृषि समाधान शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एफएमडी और अन्य गंभीर पशु बीमारियों पर नियंत्रण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैक्सीन, नई वैराइटीज़ और तकनीक के ज़रिए बीज, फर्टिलाइज़र और पशु स्वास्थ्य के मामले में आत्मनिर्भर बनना ही आगे का रास्ता है। साथ ही 70 से अधिक एमओयू और टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौतों के ज़रिए इन तकनीकों को निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के सहयोग से तेज़ी से किसानों तक पहुँचाने की दिशा तय की गई।
वैज्ञानिकों के लिए प्रेरक संदेश
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर वैज्ञानिक की नौकरी केवल रोज़गार नहीं, बल्कि देश और दुनिया बदलने का मिशन है। उन्होंने श्रीकृष्ण के संदर्भ से बताया कि आदर्श कार्यकर्ता उत्साह से भरा, अहंकार–रहित, धैर्यवान और समन्वयकारी होता है और वैज्ञानिकों को भी इसी भाव से काम करना चाहिए। उन्होंने अपील की कि हर वैज्ञानिक किसानों के सपनों को अपना मिशन बनाए और अपनी पूरी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान का संकल्प ज़मीनी हकीकत बन सके।
इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर, श्री भागीरथ चौधरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, अतिरिक्त सचिव श्री ज्ञानेंद्र डी. त्रिपाठी ने भी संबोधित किया।
ICAR के 98वें स्थापना दिवस कार्यक्रम से देश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों, ICAR संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक, कर्मचारी, छात्र–छात्राएँ तथा कृषि परिवार के सदस्य वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे, जिससे यह समारोह पूरे भारतीय कृषि परिवार का साझा उत्सव बन गया।
समारोह में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, एस.पी. सिंह बघेल भी हुए शामिल
नई दिल्ली ; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का 98वां स्थापना दिवस आज नई दिल्ली के भारत रत्न सी. सुब्रमणियम ऑडिटोरियम, NASC कॉम्प्लेक्स में मनाया गया, जहाँ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत 2047 के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान का रोडमैप सामने रखा। उन्होंने एक तरफ 150 से ज़्यादा कर्मचारियों को पहली बार नियमित नियुक्ति देकर खुशी साझा की, तो दूसरी तरफ 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज, हर संस्थान से परिवर्तनकारी इनोवेशन, 10 करोड़ किसानों तक ICAR टेक्नोलॉजी पहुँचाने, नकली बीज–कीटनाशक पर सख्त कानून और डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म जैसे ठोस लक्ष्य और संकल्प रखे।
“किसान आत्मा हैं, वैज्ञानिक मस्तिष्क”
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का दिन सिर्फ स्थापना दिवस नहीं, उन पीढ़ियों को प्रणाम करने का दिन है जिनकी तपस्या ने अभाव को आत्मनिर्भरता में और संघर्ष को समाधान में बदला। उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा कि किसान अगर किसी की आत्मा हैं तो वैज्ञानिक मस्तिष्क, और जब सरकारी नीति, किसानों का पसीना और वैज्ञानिकों का टैलेंट मिलकर काम करते हैं, तभी खेतों में चमत्कार होते हैं। उन्होंने भारत के प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और ICAR के पूर्व नेतृत्व को नाम लेकर याद किया और कहा कि इन्हीं की मेहनत ने आज की मजबूत कृषि नींव तैयार की है।
150 से अधिक कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति
शिवराज सिंह चौहान ने विशेष रूप से बताया कि ICAR के 150 से अधिक कर्मचारियों को पहली बार स्थायी नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह वर्षों से चल रही अन्याय की पराकाष्ठा थी, और जब इन कर्मचारियों को उनका हक मिला तो पूरे ICAR परिवार ने उनके साथ खुशी और भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया। उन्होंने सभी नए नियमित कर्मचारियों को शुभकामनाएँ देते हुए इसे ICAR परिवार की बड़ी उपलब्धि बताया।
उत्पादन से आगे बढ़कर क्वालिटी पर ज़ोर
शिवराज सिंह ने खाद्यान्न, बागवानी, दूध और मछली उत्पादन में हुई तेज़ बढ़ोतरी पर खुशी जताई, लेकिन साफ़ कहा कि हम फूल के आत्म-संतोष में बैठ नहीं सकते। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब समय सिर्फ मात्रा बढ़ाने का नहीं, बल्कि “क्वालिटी ओवर क्वांटिटी” का है, ताकि देश के नागरिकों की सेहत सुरक्षित रहे और हमारे उत्पाद वैश्विक बाज़ार में मज़बूती से खड़े हों। उन्होंने एल नीनो और जलवायु परिवर्तन के खतरे का उल्लेख करते हुए क्लाइमेट रेज़िलिएंट एग्रीकल्चर, जिलेवार योजना और कृषि जोखिम प्रबंधन पर तेज़ काम करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नए–नए बाज़ार और व्यापारिक समझौते कृषि उत्पादों के लिए अवसर खोल रहे हैं; इसलिए उत्पादन को एक्सपोर्ट–ओरिएंटेड, उच्च गुणवत्ता वाला और सेहत के लिए हितकारी बनाना ज़रूरी है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख लक्ष्य–संकल्प
1. 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज का संकल्प
शिवराज सिंह चौहान ने साफ़ संकल्प रखा कि 100वें स्थापना वर्ष से पहले ICAR और उसके संस्थान मिलकर कम से कम 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित करें। इन गाँवों में जलवायु–स्मार्ट खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, पानी और मृदा संरक्षण तथा जोखिम कम करने के व्यावहारिक तरीके अपनाए जाएँ, ताकि किसान बदलते मौसम में भी सुरक्षित और लाभकारी खेती कर सकें।
2. “वन इंस्टिट्यूट–वन ग्रांट इनोवेशन”– हर संस्थान से एक परिवर्तनकारी तकनीक
उन्होंने लक्ष्य देते हुए कहा कि ICAR के हर संस्थान को अगले दो वर्षों में “वन इंस्टिट्यूट–वन ग्रांट इनोवेशन” के तहत कम से कम एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक या समाधान देना होगा, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव हो। यह इनोवेशन किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाए– चाहे वह नई फसल वैराइटी, वैक्सीन, डिजिटल टूल या क्लाइमेट–स्मार्ट कृषि मॉडल हो।
3. 10 करोड़ किसानों तक ICAR टेक्नोलॉजी पहुँचाने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि 100वें स्थापना वर्ष तक ICAR का लक्ष्य होना चाहिए कि कम से कम 10 करोड़ किसानों तक उसकी वैज्ञानिक तकनीकें, नवाचार और आधुनिक कृषि समाधान पहुँचें। उन्होंने इसे विकसित भारत 2047 के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान की दिशा में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया।
4. “मिशन ICAR-100” और KVK की नई भूमिका
शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्ताव दिया कि अगले दो वर्ष “मिशन ICAR-100” के रूप में लिए जाएँ, जिसमें देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) केवल प्रशिक्षण केंद्र न रहकर इनोवेशन हब, क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर, स्टार्टअप सपोर्ट सेंटर और किसान टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन सेंटर बनें। उन्होंने कहा कि ICAR स्थापना दिवस को किसानों के बीच मनाने के लिए एक पखवाड़े की योजना बनाई जाए, जिसमें हर KVK कम से कम 100 गाँवों में जाकर अपनी रिसर्च और तकनीक का बड़े स्तर पर प्रदर्शन करे।
5. ICAR ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म– हर किसान के मोबाइल पर ICAR
कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने “ICAR Open Digital Knowledge Platform” बनाने का संकल्प रखा, ताकि हर किसान अपने मोबाइल पर ICAR की तकनीक, वीडियो सलाह और वैज्ञानिक जानकारी निशुल्क देख सके। उन्होंने कहा कि आज ज़्यादातर किसानों के पास मोबाइल है, इसलिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मोबाइल–फर्स्ट सोच के साथ डिज़ाइन करना ज़रूरी है, जिससे किसान खेत में खड़े–खड़े मृदा परीक्षण, फसल सलाह, मौसम और बाज़ार की जानकारी पा सकें।
6. नकली बीज–कीटनाशक पर सख्त कानून और तुरंत पहचान की व्यवस्था
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों का हवाला देते हुए कहा कि नकली और घटिया बीज तथा कीटनाशकों पर सख्त कानून बनाना समय की ज़रूरत है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि ऐसी सरल तकनीक और उपकरण विकसित किए जाएँ जिनसे खेत में ही बीज और कीटनाशक की गुणवत्ता की तुरंत पहचान हो सके, ताकि किसानों को धोखे से बचाया जा सके और फसल का जोखिम कम हो।
7. 2029 तक 10,000 करोड़ की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि ICAR को केवल सरकार के बजट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी तकनीक, वैराइटीज़, वैक्सीन और लाइसेंसिंग से आर्थिक रूप से मज़बूत होना होगा। उन्होंने 2029 तक 10,000 करोड़ रुपये की आंतरिक संसाधन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखने को कहा और भरोसा दिलाया कि सरकार से मिलने वाला समर्थन चलते रहेगा, लेकिन संस्थान को अपने इनोवेशन से भी आत्मनिर्भर बनना होगा।
वैक्सीन, नई वैराइटीज़ और टेक्नोलॉजी– आत्मनिर्भर कृषि की दिशा
स्थापना दिवस पर 43 नई वैराइटीज़, 17 टेक्नोलॉजी/प्रोडक्ट और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण हुआ, जिनमें बेहतर उत्पादन, रोग–प्रतिरोधक क्षमता, पोषण–समृद्ध फसलें, पशुधन और मत्स्य के लिए वैक्सीन तथा डिजिटल कृषि समाधान शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने एफएमडी और अन्य गंभीर पशु बीमारियों पर नियंत्रण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैक्सीन, नई वैराइटीज़ और तकनीक के ज़रिए बीज, फर्टिलाइज़र और पशु स्वास्थ्य के मामले में आत्मनिर्भर बनना ही आगे का रास्ता है। साथ ही 70 से अधिक एमओयू और टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग समझौतों के ज़रिए इन तकनीकों को निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के सहयोग से तेज़ी से किसानों तक पहुँचाने की दिशा तय की गई।
वैज्ञानिकों के लिए प्रेरक संदेश
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हर वैज्ञानिक की नौकरी केवल रोज़गार नहीं, बल्कि देश और दुनिया बदलने का मिशन है। उन्होंने श्रीकृष्ण के संदर्भ से बताया कि आदर्श कार्यकर्ता उत्साह से भरा, अहंकार–रहित, धैर्यवान और समन्वयकारी होता है और वैज्ञानिकों को भी इसी भाव से काम करना चाहिए। उन्होंने अपील की कि हर वैज्ञानिक किसानों के सपनों को अपना मिशन बनाए और अपनी पूरी क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लिए विकसित कृषि और समृद्ध किसान का संकल्प ज़मीनी हकीकत बन सके।
इस अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर, श्री भागीरथ चौधरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट, अतिरिक्त सचिव श्री ज्ञानेंद्र डी. त्रिपाठी ने भी संबोधित किया।
ICAR के 98वें स्थापना दिवस कार्यक्रम से देश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों, ICAR संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक, कर्मचारी, छात्र–छात्राएँ तथा कृषि परिवार के सदस्य वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे, जिससे यह समारोह पूरे भारतीय कृषि परिवार का साझा उत्सव बन गया।