*अरंडी और पीपल: 'कॉकरोच जनता पार्टी' की क्षणिक चमक और स्थायित्व का सच*
डॉ उमेश शर्मा सेक्टर 122,नोएडा एक प्रेरक कथा जो राजनीति, समाज और जीवन के मूलभूत सिद्धांतों पर प्रकाश डालती है। वर्षा ऋतु का आगमन जंगल के लिए एक नया जीवन लेकर आया था। चारों तरफ हरियाली छाई थी और मिट्टी की सौंधी खुशबू हवाओं में घुली हुई थी। इसी माहौल में, जंगल के एक किनारे पर दो पौधे एक साथ अंकुरित हुए—एक था अरंडी का पौधा और दूसरा पीपल का एक छोटा सा अंकुर। मौसम की अनुकूलता पाते ही अरंडी का पौधा बहुत तेज़ी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते, कुछ ही महीनों में वह कई फुट ऊँचा हो गया। उसमें घने पत्ते निकल आए और वह दूर से ही नज़र आने लगा। अपनी इस त्वरित सफलता और अचानक मिली ऊँचाई पर अरंडी को बहुत घमंड हो गया। वह खुद को जंगल का सबसे प्रभावशाली पौधा मानने लगा। इसके विपरीत, पीपल का पौधा शांत था। वह बहुत धीमी गति से बढ़ रहा था, क्योंकि उसकी ऊर्जा ऊपर दिखने वाले तने से ज्यादा ज़मीन के नीचे अपनी जड़ों को मजबूत और गहरा करने में लग रही थी। अरंडी रोज़ पीपल की धीमी गति का मज़ाक उड़ाता। एक दिन उसने अपने विशाल पत्तों को लहराते हुए अहंकार से कहा: "ज़रा मुझे देख! मैं कितनी तेज़ी से ऊपर पहुँच गया हूँ। च...