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*प्रवेक कल्प एवं नवरत्न फाउंडेशन्स के निशुल्क कोविड वैक्सीनेशन कैंप में 250 लोग लाभान्वित *

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 नोएडा  प्रवेक कल्प आयुर्वेदिक  संस्थान, नवरत्न फाउंडेशन्स एवं क्लब 26 के सयुंक्त तत्वावधान तथा अपोलो हॉस्पिटल के सहयोग से क्लब 26 कर प्रांगण  में नोएडा के युवा विधायक  पंकज सिंह एवं क्लब 26 के अध्यक्ष राकेश खोसला जी ने सयुंक्त रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, घरेलु कामगार एवं सहायकों के लिए आयोजित निशुल्क कोविड वैक्सीनेशन कैंप  का रिबन काट कर उद्घाटन किया, इस कैंप में करीब 250 लोगों ने वैक्सीन लगवाकर कोरोना से बचाव के लिए एक कदम आगे बढाया.  मुख्य अतिथि पंकज सिंह  अपने उद्बोधन में कहा की सरकार तो अपने स्तर पर कोरोना को निर्मूल करने का प्रयास कर रही है और अगर साथ में जैसे यह तीन संस्थाएं आई हैं जिससे टीकाकरण में तेजी आई है और गरीब लोगों को इससे लाभ हुआ है और भी संस्थाएं आगे आकर ऐसा प्रयास करें तो इस देश से कोरोना जल्द खत्म हो जायेगा, पंकज जी ने इस कैंप की प्रभावी एवं सार्थक व्यवस्था को भी भरपूर सराहा.   क्लब 26 के अध्यक्ष राकेश खोसला  ने कहा की क्लब 26 में अब तक 4 कैंप लग चुके हैं और आज पांचवा कैंप है उम्मीद है की आज कुल मिला 1200 से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग जायेगी.  प्रवेक कल्प के अत

वायु प्रदूषण के सटीक आकलन और विश्लेषण के लिए नया मॉडल

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नई दिल्ली, (इंडिया साइंस वायर): सर्दियों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत और विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केवल ठंड से ठिठुरन की चपेट में ही नही आते, बल्कि इस दौरान बढ़े वायु-प्रदूषण की समस्या भी इन इलाकों को खासा परेशान करती है। यहां तक कि अदालतें भी सर्दियों के दौरान दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा की तुलना गैस चैंबर से कर चुकी हैं। सर्दियों के साथ आने वाली इस चुनौती से निपटने के लिए मौसम वैज्ञानिकों ने एक डिसिजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) विकसित किया है। इससे न केवल दिल्ली के प्रदूषण के स्रोतों को लेकर सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, बल्कि सर्दियों के लिए एक व्यावहारिक परिदृश्य का अनुमान लगाना भी आसान होगा।  व्यावहारिक परिदृश्य अनुमान से प्रदूषण के स्तर और उसके स्रोत के विषय में जानकारी मिलने से सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठा सकती है और सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के हिसाब से रणनीति बना सकती है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में विशेष प्रकार की गतिविधियों से प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है, वहां उन्हें सीमित किया जा सकता है। इससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने में बड़ी मदद मिलेगी।  दिल्ली के अल

शिक्षकों के जरिये बच्चों तक पहुँचेगा पोषक आहार का संदेश

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 नई दिल्ली, (इंडिया साइंस वायर): संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस वर्ष अप्रैल माह में शुरू किया गया देशव्यापी अभियान ‘आहार क्रांति’ अब एक नये पड़ाव पर पहुँच रहा है। इसके अंतर्गत जमीनी स्तर पर कार्य शुरू करने के लिए कार्यक्रमों की श्रृंखला की एक अहम कड़ी के रूप में इस अभियान में अब बड़े पैमाने पर शिक्षकों को शामिल करने की पहल की गई है।   सब्जियों, फलों और अन्य खाद्य पदार्थों की प्रचुरता के बावजूद भारत कुपोषण की समस्या का सामना कर रहा है। कई अध्ययनों ने अनुमान लगाया है कि हमारे में देश खपत होने वाली कैलोरी से चार गुना अधिक खाद्य पदार्थों का उत्पादन होता है। इसके बावजूद लोग कुपोषित हैं। इसका मूल कारण समाज के विभिन्न वर्गों में पोषण संबंधी जागरूकता की कमी है।  इसी चुनौती से लड़ने के लिए ‘आहार-क्रांति’ अभियान की शुरुआत की गई है।  पोषण आधारित संतुलित आहार की आवश्यकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने और आर्थिक रूप से सुलभ स्थानीय फलों व सब्जियों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए गैर सरकारी संगठन विज्ञान भारती (विभा) तथा भारतीय वैज्ञानिकों एवं टेक्नोक्रेट्स क

विकसित हुई फेफड़ों के कैंसर पर सटीक प्रहार की तकनीक

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नई दिल्ली, (इंडिया साइंस वायर): भारत में कैंसर एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। कैंसर का इलाज तो है लेकिन समय पर कैंसर की पहचान न हो पाने और उपचार में देरी के कारण इस से मृत्यु के आंकड़ो में भी लगातार वृद्धि हुई है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआईसीपीआर) के अनुसार प्रतिवर्ष कैंसर के 7 लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए जाते हैं और कैंसर के कारण होने वाली मृत्यु का आंकड़ा 5 लाख 50 हजार से भी अधिक हैं। वहीं, कैंसर सें संबंधित 50 प्रतिशत मृत्यु मुख एवं फेंफड़ों के कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर से होती हैं। हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एसपीजीआईएमएस) के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जिसकी मदद से फेफड़ो के कैंसर से जूझ रहे मरीजों के उपचार में मदद मिल सकती है। इस उपकरण को ‘3डी रोबोटिक मोशन फैंटम’ नाम दिया गया है। इसकें माध्यम से फेफड़ो के कैंसर के मरीजों को सटीक और कम मात्रा में भी अधिक प्रभावी रेडिएशन थेरेपी दी जा सकती सकेगी। दरअसल रेडिएशन के जरिए कैंसर ट्यूमर का उपचार सं

कोरोना की वैक्सीन ‘जायकोव-डी’ परिक्षण के तीसरे चरण में

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 न ई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर): कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है तो वहीं, दूसरी तरफ यह प्रयास किए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके क्योंकि वैक्सीन ही एक मात्र ऐसा हथियार जो कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने राज्य सभा में बताया है कि जायडस कैडिला कंपनी की कोविड-19 वैक्सीन ‘जायकोव-डी’ का तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण जारी है। यह कोरोना वायरस के विरूद्ध एक प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन है।   डीएनए वैक्सीन को वैक्सीन के विकासक्रम में सबसे आधुनिक तरीका माना जाता है। इसमें शरीर के आरएनए और डीएनए का इस्तेमाल कर इम्युन प्रोटीन विकसित किया जाता है। जो वायरस के संक्रमण को ब्लॉक करने का काम करता है और शरीर की कोशिकाओं को कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित रखता है। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सदन को बताया कि अगर ‘जायकोव-डी’ सभी परीक्षणों में पास हो जाती है और इसे

पौधा प्राधिकरण के माध्यम से हो रहा है किसानों के अधिकारों का संरक्षण- श्री तोमर

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 केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया पौधा प्राधिकरण भवन का शिलान्यास नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर ने आज पूसा, नई दिल्ली में पौधा प्राधिकरण भवन का शिलान्यास किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि पौधा प्राधिकरण के माध्यम से किसानों के अधिकारों का संरक्षण हो रहा है, जिसके लिए भारतीय संसद ने दुनिया के लिए यह एक अनूठा मॉडल दिया है। इससे किसान अपनी परंपरागत किस्‍मों के ऊपर और किसी अन्‍य किस्‍म के अपने ही पैदा किए हुए बीज के ऊपर अधिकार प्राप्‍त कर सकता है। साथ ही, यह भी सुविधा है कि बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन से किसानों का शोषण न हो। किसान पहले की तरह स्वतंत्रता से खेती कर सकते हैं व पौधा प्रजनक भी अपने पूरे अधिकार का संरक्षण कर सकते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में राष्ट्रीय आईपीआर नीति-2016, नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाओं व संशोधनों के जरिये लागू की गई है। जहां अन्य आईपीआर वाणिज्य मंत्रालय से सम्बद्ध है, जबकि पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए) कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय से सम्ब

अमेरिका, फ्रांस और यूके से अधिक भारत में स्टेम महिला स्नातक

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 न ई दिल्ली,(इंडिया साइंस वायर): विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की भागीदारी वैश्विक स्तर पर कम है। पर, स्टेम विषयों में भारतीय महिला स्नातकों की भागीदारी वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी और यूके जैसे देशों के मुकाबले स्टेम विषयों में भारतीय महिला स्नातकों की संख्या अधिक है। शिक्षा मंत्री  धर्मेंद्र प्रधान द्वारा यह जानकारी लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।  विश्व बैंक द्वारा प्रकाशित जेंडर सांख्यिकी डेटा बैंक का हवाला देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्टेम विषयों में अमेरिका (34%), यूके (38%), जर्मनी (27%) और फ्रांस (32%) जैसे विकसित देशों की तुलना में तृतीयक स्तर पर महिला स्नातकों की भागीदारी भारत में सर्वाधिक 43 प्रतिशत है। शिक्षा मंत्री ने लोकसभा में बताया कि अखिल भारतीय उच्चतर शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई), 2019-20 के आंकड़ों के अनुसार, स्टेम विषयों में 40,71,533 महिलाओं के नामांकन की तुलना में नामांकित पुरुषों की संख्या 53,52,258 है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, हाल के व