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नुक्कड़ नाटक श्रृंखला- “प्रयास” के माध्यम से श्रमिकों को सुरक्षा के बारे में किया गया शिक्षित

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 नई दिल्ली मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण स्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान के अंतर्गत, एनएचएसआरसीएल द्वारा पूरे एलाइनमेंट के लिए 100 अलग-अलग निर्माण स्थलों पर 'प्रयास' नामक नुक्कड़ नाटक का पहला सत्र पूरा किया गया । मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन से अहमदाबाद बुलेट ट्रेन स्टेशन तक आयोजित नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 6000 से अधिक श्रमिकों को शिक्षित किया गया। इन नुक्कड़ नाटकों के आयोजन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और श्रमिकों को निर्माण स्थलों पर सुरक्षा के महत्व के बारे में आकर्षक तरीके से शिक्षित करना था। प्रदर्शनों को प्रमुख सुरक्षा विषयों को कवर करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जैसे उपकरणों का उचित उपयोग, सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन, आपात स्थितियों पर प्रतिक्रिया और सुरक्षित कार्य वातावरण बनाए रखने का महत्व। देश के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात तथा विविध भाषा बोलने वाले श्रमिकों को ध्यान में रखते हुए, नुक्कड़ नाटकों की भाषा को सरल और समझने में आसान रखा गया था । श्रमिकों का ध्यान आकर्षित

सेक्टर 122 में उत्सवी माहौल में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस.

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 नोएडा  भारतीय  योग संस्थान  एवं राष्ट्रीय  स्वयं सेवक संघ के तत्वावधान में आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़े उत्साह  से मनाया  गया. *श्रीमती सीमा गर्ग एवं श्रीमती ललिता चौहान*  जो सेक्टर  122 में भारतीय  योग संस्थान के संस्थापक  हैँ  के देख रेख में  विभिन्न योग आसन एवं प्राणायाम  कराया गया जो बीपी, शुगर, थाइरोइड, यादास्त,पूर्ण स्वास्थ्य के लिये उपयोगी होगा। ऐसे तो योग में 908 आसन होते है पर आज करीब 50 आसन का अभ्यास सेक्टर के 100 से ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया.  ब्रजेश  शुक्ला ने भी करवाये विभिन्न उपयोगी आसन. कुछ  लोग समूह  में  शीर्षासन का भी अभ्यास  किया. योग दिवस का शुरुआत न्यायमूर्ति   एस आर यादव एवं डॉ उमेश शर्मा, अध्यक्ष , आरडब्लूए द्वारा दीपक जला कर किया गया एवं सरस्वती  वंदना स्वर कोकिला रेखा  एवं चन्द्रवती द्वारा गाया गया. गीता सिंह का योग पर गीत सबको भाया. आवासीय कल्याण संघठन के अध्यक्ष डॉ उमेश शर्मा ने बताया कि कुछ उपस्थित साधकों ने तो प्रतिज्ञा भी  लिया कि जिस घर में योग नहीं होता वहाँ बेटी या बेटे की शादी नहीं करेंगे.

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस का वास्तविक महत्व

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  विवेक अत्रे यद्यपि  “अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस” समारोह वैश्विक कैलेंडर का एक अभिन्न अंग बन गया है—विशेष रूप से भारत में—तथापि इसका वास्तविक महत्व हमारी आत्माओं में निहित है। “योग” का सहज अर्थ है “ईश्वर के साथ मिलन” अर्थात् वह सच्चा मिलन है जो सभी आत्माएं स्वाभाविक ढंग से खोज रही हैं। सम्पूर्ण विश्व के अधिकांश लोगों ने “योग” के बारे में सुना है, परन्तु उनमें से अधिकांश लोग अभी भी योग को शारीरिक व्यायाम या योगासन, अर्थात् हठयोग, के रूप में ही जानते हैं। परन्तु वस्तुतः योग और भी बहुत कुछ है जिसे समझने और अभ्यास करने की आवश्यकता है! प्रसिद्ध आध्यात्मिक गौरव ग्रन्थ “योगी कथामृत” के लेखक श्री श्री परमहंस योगानन्द एक अग्रणी भारतीय गुरु थे, जिन्होंने योग के सही अर्थ के बारे में सत्य की खोज करने वालों को शिक्षा प्रदान करने के लिए पश्चिमी जगत् की यात्रा की। जो लोग जीवन का सच्चे अर्थ खोज रहे हैं, उन सभी व्यक्तियों के लिए “कार्य योजना” के एक अभिन्न अंग के रूप में परमहंसजी द्वारा ध्यान के अभ्यास पर बल देना सामयिक के साथ-साथ कालातीत भी था। योगानन्दजी ने जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य, आत्म-साक्षात्कार अर्

देशभर में मनाया गया राष्ट्रीय पठन दिवस

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  नई दिल्ली : नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने भारत के पुस्तकालय आंदोलन के जनक पी.एन. पन्निकर को याद करते हुए देशभर में राष्ट्रीय पठन दिवस मनाया। इस अवसर पर नई दिल्ली, देहरादून, पटना, लखनऊ, भोपाल, वाराणसी, मुंबई, गुवाहाटी, अगरतला, कटक, चेन्नई, हैदराबाद और कोच्चि देशभर में अलग—अलग स्थानों पर बच्चों, शिक्षकों—प्रशिक्षकों और मेंटर्स के लिए पठन—पाठन से संबंधित रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन हुआ। पठन—संस्कृति को बढ़ावा देने की इस मुहिम से हजारों बच्चे, शिक्षक, अभिभावक ऑफलाइन और ऑनलाइन जुड़े। देश के अलग—अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों को पठन अभ्यास करवाया गया। बाल विशेषज्ञों ने बच्चों से कहानियाँ, कविताएँ पढ़वाईं और बताया कि किस तरह विषय के अनुरूप भावों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। कार्यक्रमों में बच्चों की पढ़ने की आदत में सुधार करने में सहायता की गई। बच्चों को पुस्तकें पढ़ने और राष्ट्रीय ई—पुस्तकालय के जरिये डिजिटल रीडिंग पर भी जोर दिया गया। उन्हें बताया गया कि किस तरह वे अपने पसंदीदा विषयों को मजेदार ढंग से पढ़कर याद रख सकते हैं। कार्यक्रमों में उपस्थित सभी बच्चों को एनबीटी, इंडिया

कृष्ण के परामर्श, 'हे अर्जुन, तुम योगी बनो’

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(अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य पर विशेष)   मंजु लता गुप्ता “योगी को, शरीर पर नियंत्रण करने वाले तपस्वियों, ज्ञान पर चलने वालों तथा कर्म के पथ पर चलने वालों से भी श्रेष्ठ माना गया है; इसलिए हे अर्जुन, तुम योगी बनो!” भगवद्गीता के चतुर्थ अध्याय में अर्जुन को कहे भगवान् कृष्ण के ये शब्द हम सभी को यह परामर्श देते हैं कि अनिश्चताओं और विलासिता से भरे जीवन के महाभारत में अर्जुन की भाँति संघर्षरत रहते हुए, योगी का जीवन जीना सुख का मूल है।          योग विज्ञान जो भारतवर्ष की धरोहर है, सम्पूर्ण संसार के लिए एक उपहार है; इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी महत्ता को समझते हुए 2015 में, भारत सरकार के अनुरोध पर, 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में संघोषित करके सम्पूर्ण मानवजाति के कल्याण की पुष्टि की। पश्चिम में ‘योग के जनक’ कहे जाने वाले परमहंस योगानन्द जिन्होंने अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण 30 वर्ष से भी अधिक समय पश्चिम में बिताया तथा भारत में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इण्डिया और अमेरिका में सेल्फ़ रियलाईज़ेशन फ़ेलोशिप की स्थापना करके ध्यान का क्रियायोग विज्ञान, जो योग की एक उन्नत और विशिष्ट शैली

ओम् ध्यान तकनीक द्वारा कोई भी व्यक्ति, ‘डाकू रत्नाकर’ से ‘महर्षि वाल्मीकि’ बन सकता है : स्वामी अमरानन्द गिरि

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  कृष्ण बिहारी मिश्र   रांची : कर्मफल के सिद्धांत से कोई बच ही नहीं सकता। कितना भी कोई तेज बनने की कोशिश करें। कर्मफल उसे अपने गिरफ्त में ले ही लेता है। लेकिन ध्यान एक ऐसी अवस्था है कि जिसके प्रभाव में आकर व्यक्ति कर्मफल के सिद्धांत पर भी विजय प्राप्त कर लेता है। वो स्वयं के द्वारा किये बुरे कर्मों के फलों पर भी विजय प्राप्त कर लेता है और ‘डाकू रत्नाकर’ से ‘ महर्षि वाल्मीकि’ को प्राप्त कर जाता है। उक्त बातें योगदा सत्संग मठ में आयोजित  सत्संग को संबोधित करते हुए स्वामी अमरानन्द गिरि ने योगदा भक्तों को सुनाई। उन्होंने कहा कि आप जितना ही ध्यान की गहराइयों में उतरेंगे, उतना ही आप आनन्द को प्राप्त करेंगे। इसमें कोई किन्तु-परन्तु नहीं। आप ध्यान के माध्यम से अपने बुरे कर्मों के फलों को आसानी से निष्फल कर सकते हैं और अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है कि जो जितनी गहराई में हमारा ध्यान करता है, मैं उसे उतनी ही सहजता से प्राप्त हो जाता हूं। वे स्वयं कहते है कि मुझे प्राप्त कर व्यक्ति अपने कर्म से परे हो जाता है। स्वामी अमरानन्द गिरि ने कहा कि

किसानोन्मुखी कार्यों पर करें पूरा फोकस- कृषि मंत्री श्री चौहान

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 100 दिनों की कार्ययोजना के संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ली बैठक कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें- केंद्रीय कृषि मंत्री किसानों व कृषि क्षेत्र के निरंतर विकास के लिए प्रधानमंत्री की संकल्पना अनुसार तेजी से करें काम नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन में बैठक लेकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प अनुसार, 100 दिनों की कृषि कार्ययोजना के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। इस दौरान श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि वे अपना पूरा फोकस किसानोन्मुखी कार्यों पर करें, ताकि देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के निरंतर विकास के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी जी की संकल्पना के मुताबिक तेजी से काम किया जा सकें।   केंद्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में, पहले 100 दिनों की विभागीय कार्ययोजना के सभी पहलुओं को समझने के साथ ही देश के कृषि क्षेत्र की मजबूती तथा किसानों के दुःख-दर्द को कम करने के लिए सशक्तता के साथ कदम उठाने के लिए दिशा-नि