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नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में शुरू हो गई सार्वजनिक बस सेवा, फिलहाल 45 इलेक्ट्रिक और 3 हाइड्रोजन बसों में होगा सफर

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  **********  _-राजेश बैरागी-_  29 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद जनपद गौतमबुद्धनगर में आज एक छोर से दूसरे छोर तक सार्वजनिक परिवहन के तौर पर 45 बसों की सेवा शुरू हो गई। यमुना प्राधिकरण ने पूर्व तैयारी के तहत एक कदम आगे बढ़कर 3 हाइड्रोजन बसों का भी एनटीपीसी के सौजन्य से संचालन शुरू किया है जो सीवर के शोधित जल से चलेंगी और ऑक्सीजन उगलेंगी।योगी सरकार के निर्देश पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण ने अलग-अलग स्थानों पर भव्य समारोह आयोजित कर बस सेवा का शुभारंभ किया। 09 जून 1997 को स्थापित जनपद गौतमबुद्धनगर में आम नागरिकों को आज तक सार्वजनिक परिवहन की सेवा मयस्सर नहीं थी। इस महत्वपूर्ण औद्योगिक जिले की जनसंख्या बीस लाख से अधिक है और जिला प्रशासन तथा पुलिस के मुख्यालय एक छोर से सत्तर किलोमीटर तो दूसरे दो सिरों नोएडा और दादरी से तीस से चालीस किलोमीटर दूर हैं। हालांकि जनपद में दस लाख से अधिक चार पहिया वाहन हैं परन्तु सभी लोगों के पास ऐसी निजी परिवहन सुविधा नहीं है। बीच बीच में जेवर और दादरी से निजी बसें चली भी परंतु कुछ ही समय में बंद हो गईं। रोजाना नोएडा ग्रेटर नोएडा की औद...

सदनों में व्यवधान लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती, जनविश्वास बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी: लोक सभा अध्यक्ष

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  नई दिल्ली / चंडीगढ़ : कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन ( CPA) इंडिया रीज़न ज़ोन - II ( नॉर्थ ज़ोन ) का द्वितीय सम्मेलन , जिसका उद्घाटन कल लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला द्वारा किया गया था , आज हरियाणा के राज्यपाल प्रो . असीम कुमार घोष के समापन संबोधन के साथ संपन्न हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष    ने कहा कि सदनों का बार - बार बाधित होना और व्यवधान उत्पन्न होना लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस समस्या का समाधान विधायी संस्थाओं के भीतर जनअपेक्षाओं के अनुरूप आचरण , संवाद और सार्थक चर्चा को बढ़ावा देने में निहित है। जनता का विश्वास मजबूत करना आज सभी जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि विधायी संस्थानों में उनका आचरण अनुकरणीय होना चाहिए , ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण सुनिश्चित किया जा सके। श्री बिरला ने कहा , " जैसा नेतृत्व ...

जिस घर में दिखे कॉकरोच, उसे खत्म करने की कोशिश होती है; कॉकरोच जनता पार्टी: क्या नाम ने ही डुबो दी राजनीति?

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 **लेखक डॉ उमेश शर्मा  राजनीति में किसी दल का नाम केवल उसकी पहचान नहीं होता, बल्कि वही मतदाताओं के मन में उसकी पहली छवि भी गढ़ता है। नाम, प्रतीक और संदेश मिलकर किसी राजनीतिक संगठन की ब्रांडिंग तय करते हैं। ऐसे में यदि किसी राजनीतिक संगठन का नाम “कॉकरोच जनता पार्टी” रखा जाए, तो यह केवल एक नाम नहीं बल्कि एक जटिल मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रयोग बन जाता है। आख़िर जिस जीव को देखकर अधिकांश लोग असहज हो जाते हैं, उससे जुड़ा नाम जनता के बीच किस तरह की प्रतिक्रिया पैदा करेगा? क्या ऐसा नाम राजनीतिक लाभ दे सकता है या फिर शुरुआत से ही नुकसान का कारण बन जाता है? *नाम का मनोविज्ञान: पहली छवि ही आख़िरी छवि?* कॉकरोच या तेलचट्टा उन जीवों में गिना जाता है जिनसे अधिकांश लोगों को घृणा, डर या असुविधा का अनुभव होता है। मनोविज्ञान में इसे “*नकारात्मक संबद्धता”* कहा जाता है। जब किसी शब्द के साथ पहले से ही नकारात्मक भावनाएँ जुड़ी हों, तो उसे सकारात्मक राजनीतिक पहचान में बदलना बेहद कठिन हो जाता है। मतदाता किसी दल की विचारधारा पढ़ने से पहले उसका नाम सुनते हैं। ऐसे में “कॉकरोच” शब्द: * स्वच्छता के विपरीत छ...