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कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चिकित्सा उपकरणों की मदद से मरीजों का हो सकेगा सटीक उपचार ; केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

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 एस एन वर्मा नई दिल्ली। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन और परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से विकसित उपकरण अब चिकित्सा जांच में व्यक्तिगत अनुमान या जांच परिणामों में अंतर को समाप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे मरीजों को अधिक सटीक और स्पष्ट उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा। मेडलुमिना 2026  इंटरनेशनल मल्टी स्पेशियलिटी मेडिकल कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब कोई पैथोलॉजिस्ट नंगी आँखों से कैंसर मरीज़ की बायोप्सी स्लाइड की जाँच कर रहा होता है, तो वह अनजाने में प्रभावित सेल्स के एक छोटे लेकिन ज़रूरी क्लस्टर को परखने से चूक सकता है, वहीं एक ए आई -इनेबल्ड सिस्टम उसे सीधे और सही जगह तक गाइड कर सकता है, जिससे मानवीय त्रुटियों को कम से कम किया जा सकता है। इसी तरह, क्लिनिकल जाँच में, मरीज़ के पूरे डेटा का विश्लेषण करने वाले ए आई टूल्स उन परिणामों को चिन्हित कर सकते हैं ज...

गोरखपुर शहर में होगा जेनरोबोटिक्स का मैनहोल-क्लीनिंग रोबोट का इस्तेमाल

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने गांधी जयंती के दिन अपने गृहनगर में बैंडिकूट लॉन्च किया नई दिल्ली  :   हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ,  उत्तर प्रदेश के गोरखपुर नगर निगम ने गांधी जयंती के दिन  2  अक्टूबर को केरल स्थित जेनरोबोटिक इनोवेशन द्वारा विकसित मैनहोल-क्लीनिंग रोबोट ‘बैंडिकूट’ का प्रयोग शुरू किया। अपने गृहनगर में बैंडिकूट के प्रयोग को आरंभ करते हुए ,  यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार सदियों पुरानी सामाजिक रूप से अपमानजनक इस प्रथा को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री आदित्यनाथ ने कहा कि रोबोट तकनीक का इस्तेमाल अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाकर सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा करने के सरकार के दृढ़ संकल्प का हिस्सा है। एक अधिकारी के अनुसार ,  गोरखपुर नगर निगम में बैंडिकूट की शुरूआत ,  मैनहोल की सफाई के लिए रोबोटिक समाधानों का उपयोग करने की दिशा में एक बड़ा कदम है ,  जो मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोना) को खत्म करने के र...

ट्यूमर का पता लगाने के लिए नया मशीन लर्निंग उपकरण

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  नई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर): ग्लियोब्लास्टोमा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में आक्रामक रूप से बढऩे वाला ट्यूमर है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग-आधारित नया कम्प्यूटेशनल उपकरण विकसित किया है, जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में कैंसर पैदा करने वाले ट्यूमर का सटीक रूप से पता लगा सकता है।  प्रारंभिक निदान के बाद दो साल से भी कम समय तक जीवित रहने की संभावित दर और सीमित चिकित्सीय विकल्प  वाले इस ट्यूमर को समझने के लिए अन्य कई शोध हुए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि चिकित्सीय विकल्पों में सुधार के लिए ग्लियोब्लास्टोमा में शामिल प्रोटीन रूपों के कार्यात्मक परिणामों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो सकता है। विभिन्न प्रोटीन रूपों में ड्राइवर (रोगजनक) म्यूटेशन की पहचान के लिए कार्यात्मक परीक्षण कारगर हो सकते हैं।  नए कम्प्यूटेशनल उपकरण जीबीएम ड्राइवर (ग्लियोब्लास्टोमाम्यूटीफार्म ड्राइवर्स) को विशेष रूप से ग्लियोब्लास्टोमा में ड्राइवर म्यूटेशन और पैसेंजर म्यूटेशन (पैसेंजर म्यूटेशन तटस्थ म्यूटेशन होते हैं) की पहचान के लिए विकसित किया गया है। जीब...

“ओमिक्रॉन की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार कुतरने वाले जीव”

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  नई दिल्ली : कोविड-19 महामारी के दूसरे वर्ष के अंत में सार्स कोरोनावायरस-2 (SARS-CoV-2) के ओमिक्रॉन संस्करण के नाटकीय प्रवेश ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था। यह महामारी के दौरान एक अप्रत्याशित घटना थी, जो वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों; दोनों के लिए चुनौती बनकर उभरी थी। 26 नवंबर 2021 को, डब्ल्यूएचओ ने इसे चिंताजनक वायरस के रूप में नामित कर दिया था।  एक नये अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने आशंका व्यक्त की है कि SARS-CoV-2 वायरस का ओमिक्रॉन संस्करण संभावित रूप से चूहा, गिलहरी, खरगोश जैसे कुतरने वाले रोडेन्ट्स (कृन्तक) प्रजाति के जीवों से उत्पन्न हुआ होगा। वैज्ञानिक पड़ताल कर रहे हैं कि कोविड-19 महामारी के दूसरे वर्ष में कैसे SARS-CoV-2 वायरस में इतने सारे रूपांतरण हुए थे।  वैज्ञानिकों का मानना है कि रिवर्स ज़ूनोसिस, कृन्तक आबादी में प्रसार, और बाद में ज़ूनोसिस के रूप में फैलने से संभवतः ओमिक्रॉन वायरस के चिंताजनक स्वरूप का विकास हुआ। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर; थिरुमलाई मिशन अस्पताल, रानीपेट, तमिलनाडु; और अपोलो अस्पताल, नवी मुंबई के शोधकर्ताओं के अध्ययन में...

शुरुआत में ही हृदयरोग की टोह देने वाला नया उपकरण

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  नई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर) : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी ) मद्रास के शोधकर्ताओं ने रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य और उम्र का पता लगाने के लिए एक नया उपकरण विकसित किया है। यह एक पोर्टेबल उपकरण है, जो हृदय रोगों की शुरुआती जाँच में मददगारहो सकता है। आर्टेंस नामक यह उपकरण ब्लड प्रेशर की निगरानी के लिए उपयोग होने वाले डिजिटल ब्लड प्रेशर मॉनिटर की तर्ज पर काम करता है। आईआईटी मद्रास में हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर में विकसितयह कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ा गैर-इमेजिंग परीक्षण है। हृदय रोगों की घटनाओं को देखते हुए शोधकर्ताओं का कहना कि नियमित चिकित्सीय परीक्षणोंमें स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिएआर्टेंस का उपयोग गैर-विशेषज्ञों द्वारा भी किया जा सकता है। ऊपरी बाँह और जाँघों पर लगाये जाने वाले प्रेशर कफ और कैरोटिड धमनी का पता लगाने के लिए गर्दन की सतह पर लगाने के लिए परीक्षण इस उपकरण मेंशामिल है। यह उपकरण कैरोटिड धमनी कठोरता , महाधमनी नाड़ी तरंग वेग और केंद्रीय रक्तचाप को मापता है। आईआईटीमद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंगविभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ जयराज ...