आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पतालों की मनमानी पर तत्काल कार्रवाई की मांग

 


नोएडा। दिल्ली एवं नोएडा के अनेक अस्पतालों द्वारा आयुष्मान भारत कार्डधारकों को उपचार देने से मना किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। यह कहना है डॉ उमेश शर्मा का  जो इस  समस्या का पिछले दिनों भुक्तभोगी रहे हैं।

मालूम हो कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद नागरिकों को निःशुल्क और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। किंतु जब सूचीबद्ध अस्पताल ही विभिन्न बहाने बनाकर आयुष्मान कार्ड को अमान्य बताने लगें या मरीजों को उपचार से वंचित करें, तो यह योजना की मूल भावना के साथ अन्याय है।

 देश के प्रसिद्ध मनोवैज्ञनिक और सेक्टर 122 के आवासीय कल्याण संगठन के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि इस स्थिति का सबसे अधिक दुष्प्रभाव वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ-साथ आर्थिक और मानसिक दबाव भी झेलना पड़ रहा है। गंभीर बीमारी की अवस्था में अस्पतालों के चक्कर काटना, उपचार के लिए अजस में रहना और अपनी जमा-पूंजी खर्च करने को मजबूर होना अत्यंत पीड़ादायक है।

उन्होंने सरकार एवं संबंधित अधिकारियों से निवेदन करते हुए मांग की है कि ऐसे अस्पतालों की तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए, जो आयुष्मान भारत योजना के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक पात्र नागरिक, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को, बिना किसी बाधा के योजना का लाभ मिल सके।

स्वास्थ्य सेवा कोई उपकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। इस अधिकार की रक्षा करना सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों की जिम्मेदारी है।

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