“नीट घोटाला राष्ट्रीय शर्म बन चुका है: केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें” – IDPD
नई दिल्ली:नीट परीक्षा के बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और भाजपा सरकार की भारत के विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा करने में पूर्ण विफलता को उजागर कर दिया है। एक बयान जारी करते हुए इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) के अध्यक्ष डॉ अरुण मित्रा तथा महासचिव डॉ शकील उर रहमान ने कहा कि सरकार अब इन घोटालों को केवल सामान्य प्रशासनिक लापरवाही के रूप में नहीं देख सकती। जवाबदेही की शुरुआत सबसे ऊपर से होनी चाहिए।
IDPD की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक आधार पर तुरंत इस्तीफा दें ताकि लगातार जारी परीक्षा घोटालों की राजनीतिक हस्तक्षेप और हितों के टकराव से मुक्त, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जा सके।
ऐसा प्रतीत होता है कि NTA की कार्यप्रणाली में बुनियादी खामियां हैं।
आखिर हर वर्ष उन्हीं मुद्दों पर बार-बार विफलताओं की और क्या व्याख्या हो सकती है? NTA के नौ वर्षों के अस्तित्व के दौरान लगभग 20 परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी हैं।
लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को भारी लापरवाही तथा निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा आयोजित करने में अधिकारियों की असमर्थता के कारण अनिश्चितता, चिंता और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा है। इससे देश की शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
जो विद्यार्थी वर्षों तक भारी त्याग, आर्थिक कठिनाइयों और अथक मेहनत के साथ तैयारी करते हैं, उनके लिए पेपर लीक के बाद परीक्षाओं का रद्द होना एक क्रूर विश्वासघात से कम नहीं है।
भारत के युवाओं को पारदर्शिता, विश्वसनीयता और न्याय चाहिए — न कि बार-बार होने वाले ऐसे घोटाले, जो उनके सपनों को तोड़ते हैं और सार्वजनिक संस्थाओं पर विश्वास को नष्ट करते हैं।
