बच्चे को अच्छे संस्कार कैसे दें?

डॉ कुसुम पथरिया के फेसबुक वाल से 



बच्चे को अच्छे संस्कार कैसे दें? कैसे घोल सकते हैं बच्चों के जीवन में खुशियां, बच्चों के साथ कैसा हो पेरेंट्स का व्यवहार, सद्गुरु के बताया बच्चों का कैसे रखें ख्याल | How Should Parents Treat Their Kids 

आज के व्यस्त जीवन में माता-पिता दोनों के वर्किंग होने की वजह से बच्चों के साथ उनका तालमेल बैठा पाना बेहद मुश्किल हो गया है।जिससे नकारात्मक असर बच्चों के व्यवहार में साफ झलकता है।बच्चों को अच्छी परवरिश देना बेहद जरूरी है, परवरिश में कमी होने के कारण पैरेंट्स और बच्चों के बीच स्ट्रॉन्ग बॉन्डिंग नहीं होती।जो उनके और पेरेंट्स दोनों के लिए कहीं कहीं परेशानी खड़ी कर सकती है।बच्चों के साथ पेरेंट्स को किस तरह व्यवहार करना चाहिए।

बच्चों (लड़का या लड़की) को संस्कार देने का मतलब उन पर अपनी इच्छाएं थोपना नहीं, बल्कि उन्हें एक इंसान के रूप में स्वतंत्र, जागरूक और जिम्मेदार बनाना है। स्वतंत्रता और जिम्मेदारी (Freedom with Responsibility)उन्हें एक व्यक्ति के रूप में सम्मान दें, न कि अधीनस्थ की तरह। उन्हें जीवन के फैसले खुद लेने की आजादी दें।समानता का भाव (Equality in Parenting)लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव के खिलाफ हर माता-पिता को अपने अहंकार को छोड़कर दोनों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।करुणा और संवेदनशीलता (Kindness and Compassion)बच्चों को सिखाएं कि दयालुता कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। उन्हें जीवन के हर पहलू के प्रति संवेदनशीलता और करुणा का संस्कार दें, चाहे वह इंसान हो, जानवर हो भावनाओं को संभालने की समझ दें। बच्चों को सिखाएं कि वे अपने जीवन के अनुभव के केंद्र में खुद रहें, न कि बाहर की चीजों पर निर्भर रहें।स्वयं एक मिसाल बनें (Be a role Model)बच्चे सुनते नहीं, वे देखते हैं। आप चाहते हैं कि बच्चे अनुशासित और प्रेमपूर्ण हों, तो आपको खुद वैसा बनना होगा। घर का माहौल प्रेमपूर्ण और खुशनुमा रखें, न कि तनावपूर्ण । आप यदि प्रकृति से जुड़ाव  चाहते हैं (Connection with Nature)उन्हें तकनीक (मोबाइल/स्क्रीन) से दूर रखकर प्रकृति और जीवन के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें।आदर की भावना (Respect for All)लड़कों को सिखाएं कि वे महिलाओं का सम्मान करें, और लड़कियों को सिखाएं कि वे खुद को सशक्त समझें। समानता का मतलब केवल एक जैसा काम करना नहीं, बल्कि बराबर का सम्मान और अवसर देना है।

सबसे बड़ा संस्कार यह है कि आप अपने बच्चे को "एक पूर्ण इंसान" बनने में मदद करें, न कि उसे किसी सांचे में ढालें।


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