भारत के भविष्य की दिशा को बदलने वाला एक सशक्त संकल्प है—नारी सशक्तिकरण: डॉ कुसुम पथरिया
##नारी शक्ति वंदन ##
नोएडा:सामाजिक न्याय और महिला अधिकारिता बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ कुसुम पथरिया आज एक भव्य समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आपके समक्ष एक ऐसे विषय पर अपने विचार साझा कर रहीहूँ, जो केवल एक नीति नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा को बदलने वाला एक सशक्त संकल्प है—नारी सशक्तिकरण। एक महिला होने के नाते मैं इस परिवर्तन को केवल सुनती नहीं, बल्कि उसे जीती हूँ, महसूस करती हूँ।
उन्होंने कहा कि हमारे समाज ने नारी को सदैव शक्ति का रूप माना, परंतु उसे निर्णय लेने के मंचों से दूर रखा। उसकी क्षमता को सराहा गया, पर उसे अवसर नहीं मिला। यह विडंबना लंबे समय तक हमारे सामाजिक ढाँचे का हिस्सा रही। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू किया गया 33% महिला आरक्षण एक ऐतिहासिक पहल है। यह निर्णय केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समानता और न्याय के मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ करता है।
“डॉ कुसुम पथरिया ने कहा कि नारी केवल सशक्तिकरण की पात्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। जब उसे निर्णय लेने का अधिकार मिलता है, तब समाज का हर वर्ग सशक्त होता है।” यह विचार इस नीति के वास्तविक महत्व को स्पष्ट करता है।लंबे समय से महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय देती रही हैं, किंतु राजनीति में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही। 33% आरक्षण इस अंतर को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे महिलाओं को न केवल अपनी आवाज़ उठाने का मंच मिलेगा, बल्कि वे नीति-निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी।
उन्होंने अपना विचार प्रगट करते हुए कहा कि यह पहल आने वाले भारत की नींव को और मजबूत करेगी, जहाँ महिलाएँ केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता होंगी। यह परिवर्तन एक संतुलित, समावेशी और प्रगतिशील समाज की ओर भारत को अग्रसर करेगा।
उन्होंने कहा कि अपने अनुभव से कह सकती हूँ कि पिछले कुछ वर्षों में नारी सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं रहा, बल्कि एक वास्तविकता के रूप में सामने आया है। आज देश की बेटियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं—चाहे वह शिक्षा हो, उद्यमिता हो, सेना हो या प्रशासन। यह परिवर्तन अपने आप नहीं आया, बल्कि एक ऐसी सोच के कारण आया है, जिसने नारी को केवल संरक्षित करने योग्य नहीं, बल्कि नेतृत्व करने योग्य माना। प्रधानमंत्री जी ने नारी को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव आया है। घर-घर में स्वच्छता और गरिमा के लिए शौचालय निर्माण से लेकर, उज्ज्वला योजना के माध्यम से धुएँ से मुक्ति, जन-धन खातों के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण, और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों से मानसिकता में बदलाव—ये सभी प्रयास नारी को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रहे हैं।यह केवल योजनाएँ नहीं हैं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब हैं, जिसमें नारी को राष्ट्र निर्माण का केंद्र माना गया है। और अब,33% आरक्षण के माध्यम से, वही नारी नीति-निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाएगी।
डॉ कुसुम पथरिया ने प्रेमचंद को याद करते कहा उनकी कहानियों की वे स्त्रियाँ याद आती हैं, जो परिस्थितियों से लड़ते हुए भी अपने आत्मसम्मान को बनाए रखती थीं। आज की भारतीय नारी भी वैसी ही है—मजबूत, जागरूक और अब अवसरों से परिपूर्ण। फर्क इतना है कि अब उसे अपनी आवाज़ उठाने के लिए मंच भी मिला है और उसे सुनने वाला समाज भी।
जब एक महिला निर्णय लेने की स्थिति में होती है, तो वह केवल वर्तमान की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी सोचती है। इसलिए जब महिलाएँ संसद और विधानसभाओं में अपनी भागीदारी निभाएँगी, तो नीतियाँ अधिक संवेदनशील, अधिक समावेशी और अधिक प्रभावी होंगी।यह परिवर्तन केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए लाभकारी है। जब समाज का आधा हिस्सा आगे बढ़ता है, तभी देश पूरी गति से प्रगति करता है। आज भारत उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लेकिन साथियों, यह यात्रा अभी अधूरी है। हमें अपने भीतर भी बदलाव लाना होगा। हमें अपनी सोच को विस्तृत करना होगा, अपनी बेटियों को अवसर देना होगा और उनके सपनों को समर्थन देना होगा।
उन्होंने बताया कि मेरे मन में एक गहरी आस्था है—जब नारी सशक्त होती है, तो वह केवल अपने जीवन को नहीं बदलती, बल्कि पूरे समाज की दिशा बदल देती है। “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” उसी परिवर्तन की आधारशिला है।आज मैं एक महिला के रूप में, एक नागरिक के रूप में यह विश्वास के साथ कहती हूँ कि यह पहल भारत को एक अधिक न्यायपूर्ण, समान और सशक्त राष्ट्र बनाएगी—जहाँ हर महिला यह कह सके कि वह केवल इस देश की शक्ति नहीं, बल्कि उसकी दिशा तय करने वाली शक्ति है।


