कृषि उत्पादों की कीमतें स्थिर हैं और उन पर निरंतर कड़ी निगरानी— केंद्र सरकार

 *कृषि इनपुट और रसायनों की किसी भी स्तर पर कोई कमी नहीं है; उपलब्धता को और बढ़ाने के प्रयास जारी*

नई दिल्ली ।भारत सरकार पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के मद्देनजर नागरिकों को सूचित रखने के लिए नियमित रूप से अपडेट प्रदान करती रहती है। इसी संदर्भ में, आज राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने ईंधन की उपलब्धता, समुद्री संचालन, क्षेत्र में भारतीय नागरिकों को दी जा रही सहायता और समग्र स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे उपायों पर अपडेट साझा किए। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस संदर्भ में मीडिया को जानकारी दी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों के कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव और व्यवधानों को कम करने के लिए उठाए जा रहे उपायों के बारे में अद्यतन जानकारी साझा की। मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी के अनुसार:

राज्यों के साथ परामर्श करके खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, जिसमें से 180 लाख मीट्रिक टन (46 प्रतिशत) प्रारंभिक स्टॉक के रूप में उपलब्ध है - जो कि सामान्य पूर्व-सीजन स्तर लगभग 33 प्रतिशत से काफी अधिक है; उपलब्धता को और बढ़ाने के प्रयास जारी हैं और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्तर पर कृषि इनपुट और रसायनों की कोई कमी न हो।

उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग और समय पर एवं व्यवस्थित तरीके से अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित करने के संबंध में 30.03.2026 को कृषि एवं परिवार कल्याण विभाग, उर्वरक विभाग और राज्य सचिवों की एक बैठक आयोजित की गई ।

राज्यों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे विशेष अभियान चलाएं ताकि उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, सीमा पार तस्करी या गैर-कृषि उपयोग के लिए उर्वरक का डायवर्जन न हो सके।

पिछले वर्ष ग्राम पंचायत, उपमंडल और जिला स्तर पर धरती माता बचाओ आंदोलन समितियों के गठन के लिए एक अभियान शुरू किया गया था। राज्यों से एक बार फिर इन स्थानीय समितियों को निगरानी और समान वितरण के लिए सक्रिय करने का अनुरोध किया गया है।

मध्य प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना जैसे राज्यों द्वारा अपनाई गई नवोन्मेषी पद्धतियों को उन राज्यों के साथ साझा किया गया, जिससे उर्वरकों का वितरण सरल हो गया।

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