भारत ने उर्वरक उत्पादन में बनाया रिकॉर्ड

 

आत्म-निर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़कर 283.74 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई


सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के माध्यम से फॉस्फेट और पोटैशियम (पीएंडके) उर्वरकों की आपूर्ति को दुरूस्त किया

नई दिल्ली।भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और कच्चे माल की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करके उर्वरक क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया एस. पटेल ने बताया कि नई निवेश नीति (एनआईपी)-2012 और 7 अक्टूबर, 2014 को इसके संशोधन के तहत छह नई यूरिया इकाइयां स्थापित की गई हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की चार संयुक्त उद्यम इकाइयां और निजी कंपनियों की दो इकाइयां शामिल हैं। इन इकाइयों ने मिलकर यूरिया उत्पादन क्षमता में 76.2 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एलएमटीपीए) की वृद्धि की है, जिससे कुल स्वदेशी क्षमता 2014-15 में 207.54 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2023-24 में 283.74 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई है। इसके अलावा, नामित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के संयुक्त उद्यम (जेवीसी) तलचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (टीएफएल) के माध्यम से एफसीआईएल की तलचर इकाई के पुनरुद्धार के लिए एक विशेष नीति को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत कोयला गैसीकरण मार्ग पर 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला एक नया ग्रीनफील्ड यूरिया संयंत्र स्थापित किया जाएगा। हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने असम के नामरूप स्थित ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीवीएफसीएल) के मौजूदा परिसर में 12.7 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) वार्षिक यूरिया उत्पादन क्षमता वाले एक नए ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स की स्थापना के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने 25 मई, 2015 को मौजूदा 25 गैस-आधारित यूरिया इकाइयों के लिए नई यूरिया नीति (एनयूपी) - 2015 अधिसूचित की, जिसका एक उद्देश्य आरएसी से परे स्वदेशी यूरिया उत्पादन को अधिकतम करना था। एनयूपी-2015 के परिणामस्वरूप 2014-15 के दौरान वार्षिक उत्पादन की तुलना में यूरिया का अतिरिक्त उत्पादन 20-25 एलएमटी हुआ है।

उपरोक्त कदमों के फलस्वरूप यूरिया का उत्पादन 2014-15 के दौरान 225 एलएमटी प्रति वर्ष से बढ़कर 2023-24 के दौरान रिकॉर्ड 314.07 एलएमटी तक पहुंच गया। 2024-25 के दौरान देश में 306.67 एलएमटी यूरिया का उत्पादन हुआ।

सरकार ने फॉस्फेट और पोटैशियम (पीएंडके) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना 01.04.2010 से लागू की है। इस योजना के तहत, पीएंडके उर्वरक ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) के अंतर्गत आते हैं और कंपनियां अपनी व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार इन उर्वरकों का आयात/निर्माण करने के लिए स्वतंत्र हैं।

आयातित फॉस्फेट युक्त उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और देश को आत्म-निर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से निम्नलिखित उपाय किए गए हैं:

  1. उर्वरक विभाग ने 18.01.2024 को एमआरपी का औचित्य सुनिश्चित करने और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
  • II. अनुरोधों के आधार पर, नई विनिर्माण इकाइयों या मौजूदा इकाइयों की विनिर्माण क्षमता में वृद्धि को एनबीएस योजना के तहत मान्यता दी गई है/रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
  1. एनबीएस नीति के अंतर्गत आने वाले फॉस्फेट और पोटैशियम उर्वरकों की संख्या 2021 में 22 ग्रेड से बढ़कर 28 ग्रेड हो गई है।
  • IV. स्वदेशी रूप से निर्मित उर्वरक एसएसपी पर माल ढुलाई सब्सिडी को खरीफ 2022 से मंजूरी दी गई है ताकि मिट्टी को फॉस्फेटिक या 'पी' पोषक तत्व प्रदान करने के लिए एसएसपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

इसके अलावा, कच्चे माल के आयात के लिए आपूर्ति सुरक्षा को दुरूस्त करने के लिए सरकार भारतीय उर्वरक कंपनियों को संसाधन संपन्न देशों के साथ दीर्घकालिक समझौते (एलटीए) करने और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) में आगे बढ़ने में सहायता प्रदान करती है। उपरोक्त के अनुरूप, भारतीय कंपनियों ने 2025-26 के लिए जॉर्डन, मोरक्को, टोगो और मॉरिटानिया से रॉक फॉस्फेट; मोरक्को, ट्यूनीशिया और सेनेगल से फॉस्फोरिक एसिड; और सऊदी अरब, ओमान, जापान और मलेशिया से अमोनिया के लिए समझौते किए हैं।

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