सीवर-सेप्टिक टैंक में लगातार हो रही मौतों पर तुरंत रोक लगाने के लिए जंतर-मंतर पर 25 को धरना व विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली । सफाई कर्मचारी आंदोलन देश भर में सीवर-सेप्टिक टैंकों में हो रही मौतों के खिलाफ 25 मार्च को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना व विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। इसमें करीब 10 राज्यों से सफाई कर्मचारी, गटर की सफाई में मारे गये लोगों के परिजन और एक्टिविस्ट शामिल होंगे। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री के नाम एक मांगपत्र जारी किया जाएगा, जिसमें ऐसी मौतों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की जाएगी।
सफाई कर्मचारी आंदोलन (SKA) गहरे दुख और आक्रोश के साथ यह कहता है कि देश में हर दो से तीन दिन में एक भारतीय नागरिक की सीवर-सेप्टिक में हत्या की जा रही है और इस पर सरकार पूरी तरह से चुप है। हमारा कहना है कि देश में विकास के तमाम दावों और दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की घोषणा के बीच भारत में अगर सफाई कर्मचारी समाज के लोगों को गटर में उतारा जा रहा है, तो यह राष्ट्रीय शर्म की बात है और इसके लिए देश के प्रधानमंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए। अन्याय की हद तो यह है कि हमारी मौत के आंकड़े भी छुपाए जा रहे हैं। हाल यह है कि 2026 के तीन महीने भी नहीं बीतें हैं और अभी तक 41 सफाई कर्मचारियों की मौत गटर में हो चुकी है, यानी 80 दिन में 41 मौतें। सरकार इन्हें तुरंत रोकने के बजाय आंकड़ों का खेल करती है।
सफाई कर्मचारी आंदोलन (SKA) के अनुसार वर्ष 2025 में देश में 121 लोग गटर में मारे गये, जबकि भारत सरकार के मुताबिक ऐसी मौतों की संख्या बस 46 ही है। इसी तरह 2024 में SKA का आंकड़ा 116 मौतों का है, जबकि सरकार 55 मौतें कहती हैं। वर्ष 2023 में भी SKA के पास 102 मौतों का ब्यौरा है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड केवल 65 मौतें बताते हैं। देश की संसद में भी सरकार हमारी मौत के सही आंकड़े नहीं पेश करती। आखिर क्यों? उधर, गैर कानूनी होने के बावजूद मैनुअल स्कैवेंजिंग अब भी चल रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और जम्मू-कश्मीर में मैला प्रथा चालू है। संसद में केंद्र सरकार के मंत्री कहते हैं कि मैला प्रथा खत्म हो गई है, जो सरासर झूठ है। इन सवालों को लेकर और इस अत्याचार के खिलाफ SKA पिछले 40 सालों से संघर्ष कर रहा है। इन्हीं मांगों को उठाने के लिए हम जंतर-मंतर पर जमा हो रहे हैं।