गैस आपूर्ति बढ़ने से यूरिया उत्पादन में 23 फीसदी का बड़ा उछाल
निर्भरता कम करने के लिए उर्वरक आयात में विविधता, किसानों को मिलेगी सुरक्षा
वैश्विक टेंडर के जरिए पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की तैयारी
एस एन वर्मा
नई दिल्ली। आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए सरकार के पास उर्वरक के पर्याप्त भण्डार उपलब्ध हैं। सरकार ने विभिन्न रणनीतियों पर काम करना शुरू कर दिया है। घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ ही ग्लोबल टेंडर के जरिए उर्वरक की खरीद सुनिश्चित की जा रही है। ताकि वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम से भारतीय किसानों को किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।
भारत सरकार ने ईपीएमसी (Empowered Pool Management Committee) के माध्यम से उर्वरक उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की खरीद की है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार से स्पॉट खरीद के माध्यम से भारत को 7.31 MMSCMD (Million Metric Standard Cubic Meters per Day) अतिरिक्त गैस मिलने लगी है। इस आपूर्ति से भारत में उर्वरक उत्पादन में 23 फीसद तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। अभी तक भारत के यूरिया प्लांट्स को 32 MMSCMD के करीब प्राकृतिक गैस मिल रही थी, इसके बाद यह मात्रा बढ़कर 39.31 MMSCMD हो गई है।
23 फीसद अतिरिक्त प्राकृतिक गैस मिलने से भारत में यूरिया उत्पादन में लगभग 23 फीसद तक की वृद्धि हो जाएगी। घरेलू यूरिया उत्पादन 54,500 से बढ़कर 67,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है। वैश्विक टेंडर में स्पॉट ट्रेडिंग के जरिए खरीदी गई गैस की सप्लाई से भारत के यूरिया प्लांट्स को अब तक हो रही 62 फीसद की आपूर्ति बढ़कर 76 फीसद से ज्यादा हो जाएगी।
भारत के पास पिछले साल के मुकाबले इस साल पर्याप्त उर्वरक भंडार उपलब्ध हैं। यूरिया, डीएपी सहित सभी उर्वरकों का स्टॉक पिछले साल मार्च में 138.79 LMT था जो इस साल बढ़कर 180.04 LMT हो गया है। यह स्टॉक 19 मार्च 2025 की तुलना में 29.72 फीसद अधिक है। डीएपी के स्टॉक में तो दोगुनी वृद्धि दर्ज हुई है।
अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच सरकार आगे बढ़कर कई प्रभावी फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि “हमारे पास, विशेष रूप से खरीफ 2026 के लिए उर्वरक के पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं। हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं। उर्वरक विभाग ने भी समय रहते ग्लोबल टेंडर्स जारी किए, जिस पर अच्छी प्रतिक्रिया आई है। हम उम्मीद करते हैं कि विभिन्न स्रोतों से ज्यादातर ऑर्डर मार्च के अंत तक भारत पहुंच जाएंगे। उर्वरकों के आयात के लिए हम अलग-अलग देशों से लगातार संपर्क में हैं।”
सरकार द्वारा लगातार कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से उर्वरक की सप्लाई करने वाले देशों के साथ समय पर खरीद और ग्लोबल टेंडर जारी कर देश की उर्वरक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में मार्च महीने के आखिर तक देश में और अधिक उर्वरक सप्लाई की संभावना बनी हुई है।