वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए कुछ सरल लेकिन गहन आदतों को अपनाएं:डॉ कुसुम पथरिया
नोएडा
प्रसिद्ध समाज सेविका व सामाजिक न्याय एवं महिला अधिकारिता बोर्ड की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष डॉ कुसुम पथरिया बताती हैं कि हमें अपने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए कुछ सरल लेकिन गहन आदतों को अपनाना चाहिए । उनकी दिनचर्या में सचेतन भोजन, 30% फल शामिल करना, भोजन को अच्छी तरह चबाना और सुबह ब्रह्म मुहूर्त में आध्यात्मिक प्रक्रियाएं शामिल करना एक स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली की कुंजी है, खासकर 60+ उम्र के बाद। हमें उन्हें तनाव से बचने, शरीर की जरूरतों को समझने और जीवन को सहजता से जीने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि बुढ़ापा सिर्फ दवाइयों तक सीमित न रहे। उनकी देखभाल में उनकी आहार संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना शामिल होना चाहिए। उनके आहार में 30% फल शामिल करना शरीर को भीतर से ठीक करने और बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है। फाइबर युक्त अनाज, दालें, मेवे और सब्जियों को शामिल करना और तले हुए भोजन से उनको बचाना भी महत्वपूर्ण है। सुबह का नाश्ता अंकुरित मूंग, चना और भीगी हुई मूंगफली के साथ करना एक पौष्टिक शुरुआत हो सकती है।
वे बताती हैं कि जीवनशैली में सचेतनता लाना, शरीर और भोजन के प्रति सचेत रहना और तनावग्रस्त नहीं होना महत्वपूर्ण है। ब्रह्म मुहूर्त में उनको जगाकर आध्यात्मिक प्रक्रियाओं में शामिल करना चाहिए जिससे मन और शरीर दोनों के लिए लाभदायक होता है। 60 की उम्र के बाद भी सरल आदतों को अपनाकर शरीर और दिमाग को तेज रखा जा सकता है। मानसिक रूप से सकारात्मक और सहज बने रहने के लिए जीवन के उतार-चढ़ावों को स्वीकार करना और तनाव से बचाना आवश्यक है। बुढ़ापे को एक नई ऊर्जा के साथ जीने का अवसर मानना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक रूप से स्वस्थ और मानसिक रूप से जागरूक रखने के लिए एक सरल, प्राकृतिक और सचेतन जीवनशैली अपनाना आवश्यक है, ताकि वे अपने जीवन का भरपूर आनंद ले सकें। भारत की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ, सीनियर सिटीजन हेल्प की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है। हमें अपने बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने में मदद करनी चाहिए। स्वास्थ्य देखभाल समर्थन, भावनात्मक और सामाजिक समर्थन, दैनिक जीवन में सहायता और कानूनी और वित्तीय मार्गदर्शन उनकी जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उनके अनुसार एन जी ओ
और समुदाय-आधारित कार्यक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमें अपने स्तर पर जागरूकता फैलाने और उनकी देखभाल करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हमारे देश का कोई भी वरिष्ठ नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े । हम जन समस्या निवारण प्रोग्राम में उनको सम्मान देते हैं वारिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास करते हैं ।
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