बैंक कर्मचारियों द्वारा आत्महत्याओं का सिलसिला कब रुकेगा ?





 एस एन वर्मा 

नई दिल्ली : बैंक कर्मचारियों द्वारा आत्महत्याओं का सिलसिला कब रुकेगा ? यूनियन बैंक के एक अधिकारी ने बैंक के रीजनल ऑफिस के बाहर ही आत्महत्या कर ली। उसने अपने आत्महत्या के पत्र में बैंक में काम का दबाव और उच्च अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार को मुख्य कारण बताया है। ये कोई एक आत्महत्या की घटना नहीं है। बैंकिंग इंडस्ट्री में पिछले चार वर्षों में सैंकड़ों बैंकर्स ने आत्महत्या की है। बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए इस तरह आत्म्हत्याओं का बढना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

आजकल बैंकों में काम के दबाव के कारण कर्मचारियों द्वारा आत्महत्याओं की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। आये दिन किसी न किसी बैंक के कर्मचारी द्वारा आत्महत्या की खबर आ जाती है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ज्यादातर आत्महत्या करने वाले युवा बैंकर्स हैं  आत्महत्या के कई कारण हो सकते हैं जैसे पारिवारिक या बैंक से सम्बन्धित। बैंक से सम्बंधित कारणों में काम का दबाव, उच्च प्रबंधन द्वारा उत्पीडन, उच्च प्रबंधन द्वारा गलत लोन को देने के लिए दबाव, थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स के टारगेट का दबाव और किसी गलत लोन देने के बाद रिकवरी न होना हो सकते हैं। कुछ कर्मचारी अधिकारी इन सब कारणों में भी दबाव में नहीं आते लेकिन कुछ संवेदनशील कर्मचारी अधिकारी इन परिस्थितियों का सामना नहीं कर सकते और आत्महत्या कर लेते हैं। 

जिस संस्था में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच अच्छा तालमेल होता है वो संस्था ज्यादा प्रगति करती है। बैंकों में आज एच आर विंग ( मानव संसाधन विंग) तो हैं लेकिन ह्यूमन रिलेशन और मानवता जैसी कोई चीज नहीं है। बैंकों की प्रगति के लिये यह अच्छा नहीं है।

आज इस वातावरण से निबटने के लिये बैंक प्रबंधन, बैंक यूनियनस और कर्मचारियों, अधिकारियों को सोचना होगा ।  बैंक प्रबंधन कर्मचारियों, अधिकारियों को सिर्फ कर्मचारी, अधिकारी न समझें। अधिकारी कर्मचारी ह्यूमन कैपिटल हैं। यूनियंस को  भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम करने की जरूरत है। वित् मंत्रालय को भी इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है, बैंकों में काम के लिए दबावमुक्त वातावरण बनाने तथा एक कमेटी बनाकर इसके कारणों को जानने और इसके रोकथाम करने की जरूरत है ।

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