प्रधानमंत्री ने की किसानों से चर्चा

प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा पौने 10 करोड़ किसानों को 19509 करोड़ रु. की नौवीं किस्त प्रदान छोटे किसानों की बड़ी भूमिका रहने वाली है- प्रधानमंत्री गरीब किसानों को ताकतवर बना रहे है पीएम- तोमर नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने आज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के तहत 9.75 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को 19,509 करोड़ रुपये की नौवीं किस्त जारी की। प्रधानमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी किसानों से सीधा संवाद भी किया। श्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2047 में देश की आजादी के 100 साल पूरे होने पर भारत की स्थिति को निर्धारित करने और कृषि को समृद्ध करने में हमारी कृषि व हमारे छोटे किसानों की बड़ी भूमिका रहने वाली है, इसलिए देश की कृषि नीतियों में अब छोटे किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार ने खरीफ व रबी सीज़न में किसानों से न्यूनतन समर्थन मूल्य (MSP) पर अब तक की सबसे बड़ी खरीद की है। इससे धान किसानों के खाते में लगभग 1 लाख 70 हज़ार करोड़ रु. और गेहूं किसानों के खाते में करीब 85 हज़ार करोड़ रु. डायरेक्ट पहुंचे हैं। अब राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP) द्वारा खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता का संकल्प लिया गया है, जिसमें 11,000 करोड़ रु. से अधिक निवेश किया जाएगा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्रीजी देश के छोटे-गरीब किसानों को ताकतवर बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगामी 75वें स्वतंत्रता दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि ये महत्वपूर्ण पड़ाव हमारे लिए गौरव का तो है ही, ये नए संकल्पों, नए लक्ष्यों का भी एक बहुत बड़ा अवसर है। इस अवसर पर हमें ये तय करना है कि आने वाले 25 वर्षों में हम भारत को कहां देखना चाहते हैं। देश जब आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा 2047 में, तब भारत की स्थिति क्या होगी, ये तय करने में हमारी खेती, हमारे गांव, हमारे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका है। ये समय भारत की कृषि को एक ऐसी दिशा देने का है, जो नई चुनौतियों का सामना कर सके और नए अवसरों का भरपूर लाभ उठा सके। उन्होंने बदलते समय की मांगों के अनुसार भारतीय कृषि में बदलाव का आह्वान किया, साथ ही महामारी के दौरान रिकॉर्ड उत्पादन के लिए किसानों की सराहना की। कोरोना अवधि के दौरान किसानों की कठिनाइयां कम करने के लिए सरकार के उपायों को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि सरकार ने बीजों, उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति और बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित की। यूरिया पूरे समय उपलब्ध था और जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी की कीमतें कई गुना बढ़ गईं, तो सरकार ने तुरंत उसके लिए 12000 करोड़ रु. की व्यवस्था की, ताकि किसानों को बोझ महसूस न हो। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि जब कुछ साल पहले देश में दालों की कमी थी, तब उन्होंने किसानों से दलहन उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया था। उन्होंने संतोष जताया कि इसके परिणामस्वरूप पिछले 6 वर्षों में देश में दालों के उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। श्री मोदी ने कहा कि जो काम हमने दलहन में किया या अतीत में गेहूं-धान को लेकर किया, अब हमें वही संकल्प खाने के तेल के उत्पादन के लिए भी लेना है। खाद्य तेल में हमारा देश आत्मनिर्भर हो, इसके लिए हमें तेजी से काम करना है। खाने के तेल में आत्मनिर्भरता के लिए अब राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम का संकल्प लिया गया है। आज देश भारत छोड़ो आंदोलन को याद कर रहा है, तो इस ऐतिहासिक दिन ये संकल्प हमें नई ऊर्जा से भर देता है। इस मिशन के माध्यम से खाने के तेल से जुड़े इकोसिस्टम पर 11 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया जाएगा। सरकार सुनिश्चित करेगी कि किसानों को उत्तम बीज से लेकर टेक्नालॉजी, उसकी हर सुविधा मिले। इस मिशन के तहत ऑयल-पाम की खेती को प्रोत्साहन देने के साथ ही हमारी जो अन्य पारंपरिक तिलहन फसलें हैं, उनकी खेती को भी विस्तार दिया जाएगा। इससे किसानों को तो सीधा लाभ होगा ही, गरीब-मध्यम वर्ग के परिवारों को सस्ता और अच्छी क्वालिटी का तेल भी मिलेगा। जिन राज्यों में पाम-ऑयल की खेती होगी, वहां ट्रांसपोर्ट से लेकर फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में युवाओं को अनेक रोज़गार मिलेंगे यानी यह बड़े स्तर पर रोजगार का निर्माण करेगा,फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बल देगा। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत कृषि निर्यात के मामले में पहली बार दुनिया के टॉप-10 देशों में पहुंचा है। कोरोना काल में ही देश ने कृषि निर्यात के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। उन्होंने कहा कि देश के 80 प्रतिशत से अधिक किसानों के पास 2 हेक्टेयर तक ही ज़मीन है। आने वाले 25 साल में देश की कृषि को समृद्ध करने में इन छोटे किसानों की बहुत बड़ी भूमिका रहने वाली है, इसलिए अब देश की कृषि नीतियों में इन छोटे किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी भावना के साथ बीते सालों में छोटे किसानों को सुविधा और सुरक्षा देने का एक गंभीर प्रयास किया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपए किसानों को दिए गए हैं। इसमें लगभग 1 लाख करोड़ रुपए तो कोरोना के मुश्किल समय में ही छोटे किसानों तक पहुंचे हैं। कोरोना काल में ही 2 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं, जिनमें से अधिकतर छोटे किसान हैं। इनके माध्यम से किसानों ने हजारों करोड़ रुपए का ऋण भी लिया है। अगर ये मदद छोटे किसानों को ना मिलती तो 100 वर्ष की इस सबसे बड़ी आपदा में उनकी क्या स्थिति होती? उन्हें छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए कहां-कहां नहीं भटकना पड़ता? उन्होंने उल्लेख किया कि कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की एक लाख करोड़ रु. की योजना को आज एक साल पूरा हो गया है। कृषि इंफ्रा फंड के तहत छोटे किसानों के लिए आधुनिक भंडारण की सुविधाएं तैयार हो रही हैं। बीते साल में साढ़े 6 हज़ार से अधिक प्रोजेक्ट स्वीकृत हो चुके हैं। ये प्रोजेक्ट्स जिन्हें मिले, उनमें किसान भी हैं, किसानों की सोसायटी, किसान उत्पादक संघ, सेल्फ हेल्प ग्रुप और स्टार्ट अप्स भी हैं। हाल में एक और बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने तय किया है कि राज्यों में सरकारी मंडियों को भी इस फंड से मदद दी जाएगी, जिससे मंडियां बेहतर-आधुनिक होगी। आज जो कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, जो कनेक्टिविटी का इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है या फिर जो बड़े-बड़े फूड पार्क लग रहे हैं, इनका बहुत बड़ा लाभ छोटे किसानों को ही हो रहा है। आज देश में विशेष किसान रेल चल रही हैं, जिनसे हजारों किसानों ने अपना उत्पादन कम कीमत में ट्रांसपोर्ट का खर्चा बहुत कम करके देश की बड़ी-बड़ी मंडियों तक पहुंचाकर अधिक कीमत से माल बेचा है। इंफ्रास्ट्रक्चर फंड हो या फिर 10 हज़ार एफपीओ का निर्माण, कोशिश यही है कि छोटे किसानों की ताकत को बढ़ाया जाए। छोटे किसानों की बाज़ार तक पहुंच भी अधिक हो और बाजार में मोलभाव करने की उनकी क्षमता में भी वृद्धि हो। जब FPOs से, सहकारी तंत्र से छोटे किसान एकजुट होंगे, तो उनकी ताकत सैकड़ों गुना बढ़ जाएगी। इससे फूड प्रोसेसिंग हो या फिर निर्यात, इसमें किसानों की दूसरों पर निर्भरता कम होगी। वो स्वयं भी सीधे विदेशी बाज़ार में अपना उत्पाद बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से मैं सरकार की अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थियों से चर्चा कर रहा हूं। सरकार ने जो योजनाएं बनाई हैं, उनका लाभ लोगों तक कैसे पहुंच रहा है, ये और बेहतर तरीके से हमें पता चलता है। जनता जनार्दन से डायरेक्ट कनेक्शन का यही लाभ होता है। कार्यक्रम में श्री मोदी ने पीएम-किसान स्कीम की गोवा निवासी लाभार्थी श्रीमती प्रतिभा राम वैलिपी, एग्री-इंफ्रा फंड के लाभार्थी- रत्नागिरी (महाराष्ट्र) के श्री देवेंद्र दानानेश्वर जापड़ेकर व कासगंज (उत्तर प्रदेश) के श्री श्यामचरण उपाध्याय, केसर पार्क जम्मू-कश्मीर से जुड़े पम्मोर जिले के श्री अब्दुल मजीद वानी, बागवानी मिशन टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) के श्री सुशांत उनियाल तथा जैविक मूल्य श्रंखला विकास मिशन, मणिपुर से सम्बद्ध श्रीमती थिंगचे गंगटे से सीधा संवाद किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर का उद्बोधन- कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी देश के सर्वांगीण विकास की दृष्टि से काम कर रहे हैं। समग्र व संतुलित विकास के साथ देश को आगे ले जाना व दुनिया में भारत की साख और ताकत बढ़ाने का प्रधानमंत्री जी का लगातार प्रयत्न रहा है। खिलाड़ियों की अथक मेहनत तथा प्रधानमंत्री जी द्वारा उनके समर्थन व प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप आज ओलंपिक में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हुआ है। प्रधानमंत्री बनने के बाद से श्री मोदी की यही कोशिश रही है कि गरीबों के जीवन स्तर में बदलाव आए व किसानों की आमदनी दोगुनी हो, जिसके लिए भारत सरकार द्वारा कई योजनाओं का संचालन राज्य सरकारों के सहयोग से सफलतापूर्वक किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में जरूरतनुसार सुधार किए गए हैं, कृषि सुधार कानूनों को भी लागू किया गया है। नीम कोटेड यूरिया जैसे अनेक प्रयत्न देश में किए गए हैं, जिनका लाभ किसानों को हुआ है। प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को सुरक्षा कवच दिया है। इस स्कीम में किसानों ने 17 हजार करोड़ रू. प्रीमियम राशि दी,जबकि उन्हें 94 हजार करोड़ रू. का क्लेम मिला है। पीएम-किसान योजना भी बहुत ही सफल एवं सार्थक है। साहूकारों से पीड़ित रहने वाले किसानों की तकलीफें दूर करने की प्रधानमंत्रीजी की सोच इस योजना के पीछे है। यह प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि की परिचायक है। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि कोविड के संकटकाल में भारत सरकार ने आवश्यक छूट दी व किसानों ने कड़ी मेहनत की, जिससे बंपर पैदावार हुई। एमएसपी पर उपज की बिक्री से भी किसानों को लाभ हुआ, आगे भी किसानों की मेहनत से कृषि उपज की अच्छी पैदावार होगी। दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने के मामले में भी प्रधानमंत्री चिंतित है, विशेष कार्यक्रम बनाकर उस पर फोकस किया जा रहा है, जिससे उत्पादन निश्चित बढ़ेगा। किसानों के फायदे के लिए सरकार पूरे मनोयोग से काम कर रही है। गरीब किसानों को ताकतवर बनाने के लिए प्रधानमंत्री जी पूरी तरह प्रयत्नशील है। कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी तथा सुश्री शोभा करंदलाजे भी उपस्थित थी। अनेक केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, लेफ्टिनेंट गवर्नर, उप-मुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के मंत्री, देशभर से करोड़ों किसान आनलाइन जुड़े थे। संचालन केंद्रीय कृषि सचिव श्री संजय अग्रवाल ने किया।

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