खेती को मुनाफे में लाने पर सरकार का जोर- केंद्रीय कृषि मंत्री

कृषि


क्षेत्र की गैप भरते हुए नई योजनाओं का सृजन किया,जिनका लाभ किसानों को मिल रहा है

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि खेती-किसानी को मुनाफे में लाने पर भारत सरकार का पूरा जोर है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन में हमेशा किसान रहते हैं। सरकार ने कृषि क्षेत्र की गैप्स को भरते हुए नई योजनाओं का सृजन किया है, जिनका लाभ देश के आम किसानों को मिल रहा है। हमारे गांव और कृषि क्षेत्र को परिमार्जित करके और सशक्त बना दिया जाएं तो हिंदुस्तान की बुनियाद ज्यादा मजबूत हो सकती है।

श्री तोमर ने यह बात राष्‍ट्रीय कृषि कार्यबल, दि इंस्‍टीट्यूट ऑफ कॉस्‍ट एकाउंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा ‘’कृषि लागत प्रबंधन’’ पर आयोजित राष्‍ट्रीय वेबिनार में कही। श्री तोमर ने कहा कि कृषि व गांव, दोनों की अर्थव्यवस्थाएं देश की रीढ़ है। यदि ये सुरक्षित है तो किसी भी परिस्थिति में पार पाना आसान हो जाता है। कोविड-19 के दौर में हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई। पूर्व में भी ऐसी स्थितियां झेली है, दुनिया मंदी के दौर से गुजरी है। ऐसे में भी हमारे गांवों की अर्थव्यवस्था ने अपने आप को मजबूती से खड़े रखा है। कोविड के बावजूद किसानों ने परिश्रमपूर्वक पहले से अधिक उपज पैदा की व अधिक उपार्जन हुआ। कोरोना के दूसरे दौर में भी हमारे देश में अच्छे से खेती हुई, उत्पादन व खरीद भी प्रभावित नहीं हुई, खेती सीना तानकर इस प्रतिकूल परिस्थिति में भी खड़ी रही है। ऐसे में गांवों व कृषि को परिमार्जित करके और सशक्त बना दिया जाएं तो हिंदुस्तान की बुनियाद ज्यादा मजबूत हो सकती है। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच कृषि क्षेत्र को मुनाफे में लाने की रही है। किसानों की आय बढ़े, इसके लिए नई योजनाओं का सृजन प्रधानमंत्री जी करते रहते हैं, जिसका लाभ किसानों व कृषि क्षेत्र को मिल रहा है। खेती के प्रति नई पीढ़ी की भी रूचि बढ़ना आवश्यक है। हमारी खेती और सशक्त होने पर दुनिया में भी भारत का योगदान बढ़ सकता है। भारत आज अनेक कृषि उपज के मामले में विश्व में नंबर एक या दो पर है। पहले कृषि का उत्पादन बढ़ाना समय की मांग थी। सरकार की कृषि हितैषी नीतियों व किसानों के परिश्रम ने आज खाद्यान्न की समस्या को समाप्त कर दिया, अब हमारा ध्यान उत्पादकता बढ़ाने पर है। इस दिशा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा कृषि वैज्ञानिक भी सतत काम कर रहे हैं। बीज से लेकर नई टेक्नालाजी तक, सारे साधन किसानों को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा हैं। कम रकबे में अच्छी फसलें, प्रोसेसिंग व भंडारण सुविधाएं, एफपीओ, फार्मिंग कैपेसिटी बढ़ाने, आदान की उपलब्धता, इन सबके लिए केंद्र सरकार ने अनेक ठोस कदम उठाए हैं। 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 10 हजार नए एफपीओ 6865 करोड़ रूपए खर्च कर बनाए जा रहे हैं, इन्हें 2 करोड़ रू. तक का लोन दिया जा रहा है, ब्याज में भी छूट प्रदान की जा रही है। कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में डेढ़ लाख करोड़ रू. से ज्यादा का फंड सरकार ने निर्धारित किया है। लगभग 4 हजार करोड़ रूपए का लोन वितरित हो चुका है। इनका फायदा निश्चित रूप से निचले स्तर तक मिलेगा। वेयर हाऊस का उपयोग सीधे किसानों के लिए हो सकें, इसके लिए खेतों के पास निर्माण की नीति सरकार ने बनाई है, जिस पर काम प्रारंभ हो चुका है, ताकि वे उचित समय पर अच्छे भाव पर उपज बेच सकें। कृषि क्षेत्र की गैप्स भरते हुए मोदी सरकार काम कर रही है ताकि किसानों को औने-पौने दाम पर उपज नहीं बेचना पड़े, इस सिलसिले में एग्रीकल्चर रिफार्म्स भी किए गए है, मंडियों के बाहर उपज बेचने पर कोई टैक्स नहीं है, किसान अपने घर-खेत से उपज कहीं भी बेच सकता है। कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए भी प्रावधान किया गया है। फसल बीमा योजना भी है। छोटे किसानों के लिए ये नई व्यवस्थाएं बहुत फायदेमंद साबित होगी, उनकी ताकत बढ़ेगी। 

श्री तोमर ने कहा कि अब किसानों की आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रधानमंत्री जी ने आव्हान किया है कि किसानों की आय दोगुनी होना चाहिए। स्वयं किसान भी इस दिशा में सोच रहे हैं और संतोष व प्रसन्नता की बात है कि आईसीएआई जैसी संस्थाओं के सदस्यगण- अन्य विद्वतजन भी चिंतन-मनन कर इस दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं। इससे विश्वास है कि आने वाले कल में किसानों की आय को बढ़ाने में निश्चित रूप से मददगार होंगे। खेती-किसानी की लागत में कमी लाने की दिशा में आईसीएआई जैसी संस्था काम कर रही हैं, यह शुभ संकेत है। कृषि लागत प्रबंधन भी निश्चित होगा और संयुक्त प्रयासों से, सारी दुनिया में, हिंदुस्तान की खेती के क्षेत्र में साख बढ़ाने का मनोरथ सार्थक होगा।

प्रारंभ में श्री पी. राजू अय्यर उपाध्‍यक्ष एवं चेयरमैन– राष्‍ट्रीय कृषि कार्यबल, आईसीएआई ने स्वागत भाषण दिया। श्री विश्‍वरूप बासु अध्‍यक्ष, आईसीएआई एवं डॉ. श्रीहरीचावा सदस्‍य, राष्‍ट्रीय कृषि कार्यबल, आईसीएआई ने भी संबोधित किया। वरिष्ठ सदस्य ज्योत्सना राजपाल ने संचालन किया। श्री विजेंद्र शर्मा अध्‍यक्ष, व्‍यावसायिक विकास समिति और अंतर्राष्‍ट्रीय मामले संबंधी समिति, आईसीएआई ने आभार माना।

आईसीएआई का राष्‍ट्रीय कृषि कार्यबल- इंस्‍टीट्यूट ऑफ कॉस्‍ट एकाउंट्स ऑफ इंडिया ने किसानों की आय में वृद्धि करने के, भारत सरकार के महत्‍वाकांक्षी उद्देश्‍य से स्‍वयं को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है और उसने ‘’रणनीतिक कृषि लागत और आय प्रबंधन’’  तैयार करने की संकल्‍पना की है। इसके लिए, आईसीएआई ने सीएमए (कास्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेन्ट) को अलग-अलग व आईसीएआई के जरिए संबद्ध करने के लिए नीतियां तैयार करने हेतु कार्यबल गठित किया है। 

यह कार्यबल इन बातों पर ध्‍यान देगा: शोध और अध्‍ययन करने के द्वारा एवं राज्‍य तथा केन्‍द्र स्‍तरों पर सरकारों को जोड़कर नीतिगत योजना और हस्‍तक्षेप। संस्‍थान के पाठ्यक्रम और अन्‍य व्‍यवसायिक विकास कार्यक्रम में कृषि लागत और प्रबंधन लेखांकन को समेकित करना। शोध, शैक्षिक, वाणिज्‍य और व्‍यापार में कार्यरत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संस्‍थानों के साथ नेटवर्क बनाना। संपूर्ण कृषि मूल्‍य श्रृंखला में लागत और आय को ईष्‍टतम बनाने तथा जोखिम को कम करने के संबंध में जागरूकता बढ़ाना। कर्जदारों और ऋणदाताओं दोनों के लिए कृषि ऋण और ऋण की लागत में वृद्धि करने के तरीकों की पहचान करना। 

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