देश के सभी शिक्षण संस्थान कम से कम एक महीना के लिए बंद हों,सभी परीक्षाएॅ टाली जाय: एआइफुक्टो.

नई दिल्ली

कोरोना के दूसरे खतरनाक वेभ के कारण पूरे देश में अराजक स्थिति  पैदा हो गई  है।राष्ट्रव्यापी भय और संशय का माहौल है।सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की असफलता और जर्जरता के कारण स्थिति बहुत ज्यादा खराब है।अस्पतालों में बेड,दवाई, ऑक्सीजन  एवं अन्य जरूरी सुविधाओं के अभाव के चलते चिंता गहराती जा रही है।वैक्सीनेशन की कच्छ्प गति और कम उपलब्धता से लोग बहुत परेशान हैं ।बहुत बड़ी संख्या में रोज-रोज होती मौतें,कुछ जानकारी में और अधिकांश बिना जानकारी में वर्तमान परिस्थिति में और ज्यादा लोगों को भ्रमित और भयाक्रांत कर रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की बदतर स्वरूप के कारण केन्द्र सरकार वर्तमान स्थिति को संभालने में पूरी तरह असफल है।देशभर के शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों-कर्मियो की लगातार बड़ी  संख्या में हो रहीं मौत से हम भी विचलित हैं ।एक संतोष की बात है कि बिहार में माननीय कुलाधिपति ने परिस्थिति की गंभीरता को भाॅपकर जून के बदले मई माह में ही विश्वविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश घोषित करने का आदेश दिया है।परीक्षाएॅ टाल दी गई हैं ।

आज यहाँ जारी एक प्रेस बयान में एआइफुक्टो महासचिव डाॅ अरुण कुमार ने कहा है कि देश की शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत शिक्षकों का अगुवाई करने के चलते एआइफुक्टो(AIFUCTO) मूकदर्शक बना नहीं रह सकता जब उसके शिक्षकों-कर्मचारियों का जीवन दाॅव पर लगा हो और वे कोरोना के चलते जीवन-मरण का सामना कर रहें हों।

एआइफुक्टो ने केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पिछले सप्ताह  ही त्राहिमाम संदेश भेजकर देश के सभी शिक्षण संस्थानों को मई माह में बंद करने और सभी तरह की परीक्षाएॅ तुरंत टालने का आग्रह किया है। सर्वोच्च न्यायालय का रूख भी कोरोना की स्थिति को सॅभालने में सरकार की विफलता के प्रति बहुत ही सख्त है।

उन्होंने कहा है कि भारत सरकार को परिस्थिति की गंभीरता को समझते हुए कम से कम एक माह के लिए प्राथमिक से लेकर विश्वविद्यालयों(KG to PG) तक लाखों शिक्षकों-कर्मचारियों की जीवनरक्षा के लिए पूर्ण बंदी की अविलंब घोषणा करनी चाहिए ।सभी तरह की परीक्षाएॅ कम से कम एक माह के लिए टाल देनी चाहिए।हमें पहले ही चुनावी रैलियों और कुंभ से बहुत नुकसान हो चुका है।

ऐसा करने से न केवल लाखों लोगों का कोरोना से जीवन रक्षा हो सकेगा बल्कि  शिक्षा कर्मियों में देशभर में विश्वास और उम्मीद का वातावरण भी बनेगा।