राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म पुरूस्कार 2020 घोषित

नई दिल्ली (इंडिया साइंस वायर): आमलोगोंमेंविज्ञानकेप्रतिउत्सुकताजगाने और समाज मेंव्यापकतार्किकएवंवैज्ञानिकदृष्टिकोणविकसितकरने के उद्देश्य से निर्मित 25 विज्ञान आधारित फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की स्वायत्त संस्था विज्ञान प्रसार और त्रिपुरा स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 10वें भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव (National Science Film Festival of India) के दौरान इन पुरस्कारों की घोषणा की गई है। ऑनलाइन रूप से आयोजित इस फिल्म महोत्सव के अंतिम दिन मशहूर फिल्म निर्माता और पुरस्कार निर्णायक मंडल के प्रमुख गिरीश कासारवल्ली ने पुरस्कृत विज्ञान फिल्मों के नामों की घोषणा की है। विज्ञान फिल्म पुरस्कार की इंटरफेस श्रेणी के अंतर्गत इस वर्ष 1.5 लाख रुपये का गोल्डन बीवर पुरस्कार सीमा मुरलीधरा और एच.बी. मुरलीधरा की फिल्म ‘चलती का नाम ऊष्मा’ को दिया गया है। यह फिल्म ठोस एवंतरल पदार्थों और वैक्यूम में ऊष्मा और ऊष्मीय ऊर्जा के स्थानांतरण के मूल सिद्धांतों से संबंधित है, जो बच्चों के लिए विशेष रूप से शिक्षाप्रद है। इसी श्रेणी के तहत एक लाख रुपये का सिल्वर बीवर पुरस्कार एस. बालामुरुगन की फिल्म ‘बैट वुमन – द नाइट वरियर’ को मिला है। यह फिल्म चमगादड़ों की दुनिया से बेहद रोचक अंदाज में परिचय कराती है। इंटरफेस श्रेणी में 75 हजार रुपये का ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार अर्जुन भगत एवं राधिका चंद्रशेखर की फिल्म ‘डिकोडिंग डिजास्टर’ और बीमारियों के निदान पर केंद्रित देवेंद्र चोपड़ा की फिल्म ‘अफोर्डेबल ऐंड प्वाइंट ऑफ नीड टेस्टिंग डायग्नोस्टिक सिस्टम्स फॉर हेल्थकेयर’ को संयुक्त रूप से मिला है। यह फिल्म महामारियों के उभरने, उनके विकसित होने, फैलने और उनकी रोकथाम के लिए दवाओंके विकास पर केंद्रित है। विज्ञान फिल्म पुरस्कारों की ‘फ्यूजन’ श्रेणी के अंतर्गत राकेश राव की ‘क्लाइमेट चैलेंज’ को गोल्डन बीवर पुरस्कार, जी.एस. उन्नीकृष्णन नायर की ‘रिटर्न ऑफ द होली ग्रेन’ को सिल्वर बीवर पुरस्कार, अनिल यादव द्वारा निर्देशित फिल्म ‘व्हाइट टाइगर इटर्नल इम्प्रिजनमेंट एक्सटिंक्शन ऑर फ्रीडम’ को ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार दिया गया है।‘फ्यूजन’ श्रेणीमें गोल्डन बीवर पुरस्कार के रूप में 1.5 लाख रुपये, सिल्वर बीवर पुरस्कार में एक लाख रुपये और ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार में 75 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ श्रेणी में एक लाख रुपये का गोल्डन बीवर पुरस्कार आदित्य की फिल्म ‘क्रोकिंग फ्रॉग्स’ को मिला है। जबकि, इसी श्रेणी में 75 हजार रुपये का सिल्वर बीवर पुरस्कार प्रिंस कुमार की ‘एनर-जी?’और 50 हजार रुपये का ब्रॉन्ज बीवर पुरस्कार पोनाला राघवेंद्र एवं वीनिता एस. की फिल्म ‘सॉल्यूशन’ को मिला है। ‘रेनबो’ श्रेणी के अंतर्गत खुशी आचार्या एवं धिमाही आचार्या की फिल्म ‘और पिंग-पॉन्ग बदल गया’, अनन्या जैन की ‘डिफ्रैक्शन’ एवं हेमा कुमारी की फिल्म ‘डॉन्ट शाई विद रेड स्पॉट्स’ समेत कुल आठ फिल्मों में प्रत्येक को 25 हजार रुपये का जूनियर बीवर पुरस्कार मिला है। इस वर्ष पहली बार शुरू किए गए पूनम चौरसिया मेमोरियल पुरस्कार के लिए सुचिब्रत बोरा को चुना गया है। बोरा को 50 हजार रुपये का यह पुरस्कार उनकी फिल्म ‘सर फ्रेड होएल; द मैन ए हेड ऑफ टाइम’ के लिए दिया गया है। निर्देशक महेश की फिल्म ‘इन्क्रिडिबल टेल ऑफ ए वाटर वरियर’ को ज्यूरी स्पेशल मेंशन अवार्ड के लिए चुना गया है। इस पुरस्कार के तहत 50 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त फिल्म निर्माण से संबंधित टेक्निकल एक्सिलेंस से संबंधित विभिन्न वर्गों के लिए 30 हजार रुपये के छह अलग-अलग पुरस्कार प्रदान किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि विज्ञान फिल्म महोत्सव के दौरान विभिन्न प्रतियोगी श्रेणियों के अंतर्गत विज्ञान आधारित फिल्मों की प्रविष्टियां आमंत्रित की जाती हैं। इनमें सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों द्वारा निर्मित फिल्में (इंटरफेस), स्वतंत्र फिल्म नि


र्माताओं की फिल्में (फ्यूजन), मीडिया संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं कॉलेज छात्रों की फिल्में (आउट ऑफ द बॉक्स) और स्कूली छात्रों की फिल्में (रेनबो) श्रेणियों के तहत देशभर से प्रविष्टियां आमंत्रित की जाती हैं। इसके अलावा,गैर-प्रतियोगी श्रेणी में विदेशी फिल्म निर्माताओं की फिल्में महोत्सव में प्रदर्शित किए जाने के लिए आमंत्रित की जाती हैं। 10वें भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न भाषाओं की कुल 372 फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। दस सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा इनमें से 115 फिल्मों को 24 से 27 नवंबर तक चलने वाले ऑनलाइन विज्ञान फिल्म महोत्सव के लिए चयनित किया गया था। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मलयालम, कश्मीरी, बंगाली, मराठी, पंजाबी और तमिल भाषाओं की फिल्में शामिल हैं। ये फिल्में अलग-अलग संस्थानों, निर्माताओं और छात्रों द्वारा बनायी गई हैं। इसविज्ञान फिल्म महोत्सव में डॉक्यूमेंट्री, डॉक्यू-ड्रामा, एनिमेशन एवं साइंस फिक्शन वर्गों में फिल्में आमंत्रित की जाती हैं। इस प्रतियोगिता में शामिल फिल्में मुख्य रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा, पर्यावरण, जल संरक्षण, स्वास्थ्य एवं औषधि, जीवनी, कृषि, परंपरागत ज्ञान, विज्ञान के इतिहास जैसे विषयों पर केंद्रित होती हैं। प्रतियोगिता के लिए फिल्मों को एक विशिष्ट निर्णायक मंडल द्वारा नामित किया जाता है। नामित फिल्में विज्ञान फिल्म महोत्सव के दौरान प्रदर्शित की जाती हैं और एक राष्ट्रीय स्तरीय निर्णायक मंडल उत्कृष्ट फिल्मों का चयन पुरस्कारों के लिए करता है। इसके तहत करीब 18 लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। विज्ञान प्रसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव के संयोजक निमिष कपूर ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस वर्ष दो नयी पुरस्कार श्रेणियां इस प्रतियोगिता में शामिल की गई हैं। इनमें से एक ‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा’ पुरस्कार है। इस वर्ष ‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा’ श्रेणी के अंतर्गत इस राज्य की समृद्ध जैव विविधता, संतरे एवं अनन्नास के बागों, रबड़ बागान, बांस एवं चाय रोपण, जूट तथा धान उत्पादन, ट्रू पोटाटो सीड्स और वन्यजीव अभ्यारण्यों पर केंद्रित विषयों पर प्रविष्टियां आमंत्रित की गई थीं। जबकि, दूसरा नया पुरस्कार - ‘पूनम चौरसिया मेमोरियल अवार्ड फॉर बेस्ट वुमेन साइंस फिल्ममेकर’ चर्चित विज्ञान फिल्ममेकर पूनम चौरसिया की स्मृति में शुरू किया गया है।”उन्होंने बताया कि “भविष्य में जिस राज्य में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव आयोजित होगा, उस राज्य के नाम पर ‘डेस्टिनेशन स्टेट’ पुरस्कार श्रेणी प्रतियोगिता में शामिल रहेगी। इसकी शुरुआत‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा’ से हो रही है। यह पहल स्थानीय जैव विविधता, पर्यावरण, कृषि, वन्यजीव और आम जनजीवन तथा संस्कृति के विभिन्न आयामों को रेखांकित करने के साथ-साथ पर्यटन एवं फिल्म निर्माण के गंतव्य के रूप में उस राज्य को स्थापित करने में मददगार हो सकती है। ‘पूनम चौरसिया मेमोरियल पुरस्कार’ विज्ञान आधारित फिल्मों के निर्माण के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।” विज्ञान प्रसार के निदेशक डॉ नकुल पाराशर ने कहा कि “वर्ष 2011 से शुरू हुए इस फिल्म महोत्सव ने पिछले 10 वर्षों के दौरान प्रशंसनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2011 में 58 फिल्मों से यह यात्रा शुरू हुई थी। अब तक विज्ञान एवं पर्यावरण से जुड़े विषयों पर करीब 1200 फिल्में इस महोत्सव के दौरान प्राप्त हुई हैं। देश में विज्ञान फिल्मकारों का एक व्यापक नेटवर्क खड़ा हुआ है, जिसमें बड़ी संख्या में स्कूलोंएवं कॉलेजों के छात्र शामिल हैं। राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव को भारत में विभिन्न संस्थानों, विज्ञान संचार एवं फिल्म निर्माण, टेलीविजन एवं रेडियो से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों के साथ-साथ दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो और एफएम चैनल सहित शोध संस्थानों, कॉरपोरेट क्षेत्र के उपक्रमों, विश्वविद्यालयों, संयुक्त राष्ट्र निकायों, जनसंचार एवं फिल्म संस्थानों, दूतावासों और राजनयिक मिशनों का साथ मिला है। जर्मनी से डॉयचे वेलेकी भी भागीदारी इस फिल्म महोत्सव में रही है।”


डॉ नकुल पाराशर ने बताया कि 10वां भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव इस वर्ष 18-22 मार्च को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आयोजित किया जाने वाला था। पर, कोविड-19 के चलते यह फिल्म महोत्सव वर्चुअल रूप में आयोजित करना पड़ा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की है कि आगामी विज्ञान फिल्म महोत्सव अपने वास्तविक स्वरूप में आयोजित हो सकेगा। 10वें विज्ञान भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव का उद्घाटन त्रिपुरा के उप-मुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा ने 24 नवंबर को वर्चुअल रूप से किया था। फिल्मों के प्रदर्शन के अलावा इस वर्चुअल महोत्सव में विज्ञान, मीडिया, स्वास्थ्य और सिनेमैटोग्राफी जैसे विषयों पर चर्चाएं और कार्यशालाएं भी आयोजित की गईं। इस दौरान आयोजित एक ऑनलाइन परिचर्चा के दौरान देशभर के शिक्षाविदों एवं मीडिया विशेषज्ञों ने देश में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में विज्ञान संचार के नियमित अध्ययन तथा अध्यापन और वैज्ञानिक संस्थानों में कुशल विज्ञान संचारकों की नियुक्ति का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है।


फिल्म महोत्सव के अंतिम दिन आयोजितइसी तरह की एक अन्य ऑनलाइन परिचर्चा के दौरान देशभर के मीडिया विशेषज्ञों ने डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और विज्ञान संचार के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया है। इससे पहले 9वां भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया था, जिसमें 88 भारतीय और 17 विदेशी विज्ञान फिल्में प्रदर्शित की गई थीं। 9वें विज्ञान फिल्म महोत्सव में विज्ञान की विभिन्न श्रेणियों में भारत के अलावा स्वीडन, डेनमार्क और नीदरलैंड जैसे देशों की फिल्में शामिल की गई थीं। पहली बार यह आयोजन वर्ष 2011 में चेन्नई में किया गया था। वर्ष 2012 में भुवनेश्वर, वर्ष 2013 एवं 2017 में कोलकाता, वर्ष 2014 में बंगलुरु, वर्ष 2015 में लखनऊ, वर्ष 2016 में मुंबई और वर्ष 2018 में गुवाहाटी में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया था। श्याम बेनेगल, मधुर भंडारकर, अदूर गोपालकृष्णन, अमोल पालेकर, मुज़फ्फर अली, डॉ चंद्र प्रकाश द्विवेदी, विक्रम गोखले, डॉ माइक पांडेय, सुहासिनी मुले जैसी नामचीन हस्तियां इस विज्ञान फिल्म महोत्सव के निर्णायकों में शामिल रही हैं। इस वर्ष विज्ञान फिल्म महोत्सव के निर्णायक मंडल में जाने-माने फिल्ममेकर गिरीश कासारवल्ली, मशहूर फिल्ममेकर एवं सिनेमा शिक्षाविद अभिजीत दास गुप्ता, मीडिया शिक्षाविद शंभूनाथ सिंह और दूरदर्शन के अतिरिक्त महानिदेशक अनिल कुमार श्रीवास्तव शामिल थे। (इंडिया साइंस वायर)


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