सैनिकों पर हमले से व्यापारी आक्रोश में, सरकार से चीनी कम्पनियों को दिए टेंडर वापिस लेने का किया  आग्रह

 चीनी वस्तुओं के एडवरटाईजमेंट करने वाले फ़िल्मी और क्रिकेट सितारों से यह न करने की अपील 


नोएडा


कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स ने चीनी सेना द्वारा भारतीय सैनिकों पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि भारत के व्यापारी लद्दाख में एलएसी के ताजा घटनाक्रम से काफी आक्रोशित और ग़ुस्से में है और कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट)के चीनी उत्पादों का बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय अभियान को और अधिक तेज करने का फ़ैसला किया है । कैट ने सरकार से चीनी कम्पनियों को दिए गए ठेकों को तुरंत रद्द करने  और भारतीय स्टार्टअप में चीनी कंपनियों द्वारा निवेश को वापस करने के नियमों को बनाने जैसे कुछ तत्काल कदम उठाने का भी आग्रह किया है, ताकि भारतीय सैनिकों के खिलाफ चीन के अनैतिक और बर्बरतापूर्ण व्यवहार के लिए कड़ा जवाब दिया जा सके।


कैट  के राष्ट्रीय अध्यक्ष  बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री  महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों और भारत के प्रति चीन के लगातार रवैये के मद्देनजर, भारतीय व्यापारियों ने संकल्प लिया है चीनी आयात को कम करके चीन को एक बड़ा सबक सिखाएं और कैट  द्वारा दिसम्बर निर्धारित एक लाख करोड़ के लक्ष्य को हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। भले ही व्यापारियों का व्यापार चीन से आयात हो रहा है, लेकिन फिर भी उनके लिए राष्ट्रीय हित से पहले कुछ नहीं होगा और उन्होंने आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़े होने का फैसला किया है।


कैट  के राष्ट्रीय अध्यक्ष  बीसी भरतिया ने सरकार से चीन पर एक मजबूत स्थिति बनाने का आग्रह किया है और चीनी कंपनियों को दिए गए सभी सरकारी अनुबंधों को तुरंत रद्द कर दिया जाए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से चीनी कंपनियां विभिन्न सरकारी अनुबंधों में बहुत कम दरों पर बोली लगा रही हैं और इस तरह से वे कई सरकारी परियोजना निविदाओं को प्राप्त करने में सफल हुई हैं। श्री बीसी भरतिया ने कहा कि सरकार को लागत में मामूली अंतर होने के बावजूद भारतीय कंपनियों को यह अनुबंध देने चाहिए।


संयोजक कैट दिल्ली एन सी आर सुशील कुमार जैन ने भारतीय तकनीकी स्टार्टअप में चीनी निवेश के तेजी से विकास पर भी प्रकाश कहा कि टेक स्टार्ट सेगमेंट में चीनी प्रभुत्व को खत्म करने की तत्काल आवश्यकता है। पेटीएम, उदान, बिग बास्केट, मिल्क बास्केट, फ्लिपकार्ट, स्विगी जैसे कई भारतीय स्टार्टअप में चीन की कम्पनियों ने पैसा लगाया है ।यह पूरी तरह से भारतीय खुदरा बाजारों पर कब्जा करने के लिए चीन के एक भयावह डिजाइन के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को चीनी निवेश पर प्रतिबंध लगाने के लिए नियमों को लाना चाहिए और साथ ही इन तकनीकी दिग्गजों को चीनी निवेश वापस लेने की सलाह भी देनी चाहिए।


 सुशील कुमार जैन ने भारतीय फ़िल्म स्टारों और क्रिकेट स्टारों द्वारा चीनी ब्रांडों के बड़े पैमाने पर एंडोर्स्मेंट करने पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने फ़िल्मी सितारों दीपिका पादुकोण , आमिर खान, विराट कोहली, रणवीर सिंह , सारा अली खान , रणवीर कपूर , विकी कौशल जो विभिन्न चीनी मोबाइल उत्पादों की ब्रांडिंग करते हैं से अपील की कि वे चीनी ब्रांडों का ब्रांडिंग  करना बंद करें और राष्ट्र की भावनाओं का सम्मान करें।


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