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वोटर लिस्ट की आख़िरी घड़ी BLO और वोटर की लुका-छिपी

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मनोवैज्ञानिक डॉ उमेश शर्मा का विश्लेषण नोएडा। सेक्टर 122 के आवासीय कल्याण संगठन के अध्यक्ष और देश के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ उमेश शर्मा ने वोटरर लिस्ट के सर्वेक्षण की आखरी घड़ी में आम जनता और बीएलओ की जो मनोस्थिति होती है उसका बड़ा ही सूक्ष्म ढंग से विश्लेषण किया है। उनके अनुसार वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) के समय में जो स्थिति बनती है, वह बिल्कुल परीक्षा की अंतिम घड़ी जैसी है। इसमें तीन तरह की मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलरही हैं 1. आख़िरी समय का दबाव  जैसे छात्र पढ़ाई पूरे साल नहीं करते, पर परीक्षा से ठीक पहले घबराकर दौड़ने लगते हैं, वैसे हीदृ ऽ वोटर आख़िरी दिनों में नाम जोड़ने/सुधारने के लिए भागते हैं ऽ BLO अंतिम दिनों में रिकॉर्ड पूरा करने के लिए इससे तनाव, जल्दबाज़ी और चिड़चिड़ाहट स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। 2.बचने की मनोवृत्ति कुछ लोग वोट बनवाने में रुचि नहीं लेते, क्योंकि ऽ काम बोझ लगता है ऽ सोचते हैं कि “क्या फ़र्क पड़ेगा” ऽ या सरकारी प्रक्रिया को झंझट समझते हैं इसे मनोविज्ञान में Avoidance Tendency कहा जाता है,लोग ऐसे कामों से बचते हैं ज...

आज एक बेटी की मुस्कान, हमारी सबसे बड़ी सफलता: डॉ कुसुम पथरिया

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  नोएडा। समाजिक न्याय व महिला अधिकारिता बोर्ड की महिला विंग की  अध्यक्ष डॉ कुसुम पथरिया ने आज अपनी टीम के साथ बेटी की विवाह की तैयारी कर रहे गरीब परिवार केा ज़रूरी सामान डबल बेड , मैटरेस,गद्दा, कपड़े, सिलाई मशीन और अन्य आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराईं।  उन्होंने बताया कि एक गरीब परिवार अपनी बेटी की शादी की तैयारियों को लेकर संघर्ष कर रही थी। उनके पास  न बिस्तर, न गद्दा, न कपड़े, और न ही सिलाई मशीन थी जिससे की वह दो पैसे कमा सके। लेकिन उम्मीद हमेशा रास्ता ढूंढ ही लेती है। हमारी टीम ने उनसे मिलकर उसके सपनों को सहारा दिया और इस बेटी के लिए ज़रूरी सामान डबल बेड , मैदरेस,गद्दा, कपड़े, सिलाई मशीन और अन्य आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराईं। डॉ पथरिया ने बताया कि यह कार्य सामाजिक न्याय एवं महिला सशक्तिकरण बोर्ड के अंतर्गत किया गया। इस टीम में उमा जायसवाल (उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश), ममता तिवारी (सचिव, उत्तर प्रदेश) व किरण कुशवाह (संयुक्त सचिव, उत्तर प्रदेश) शामिल थीं। उन्होंने बताया कि आज उस परिवार की  मुस्कुराहट, उसकी आँखों की चमक यही बताती है कि सही मदद सही समय पर किसी का भविष्य बदल सक...

निष्काम कर्म: अशान्त संसार में शान्ति प्राप्त करने के लिए गीता की गुप्त कुंजी

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लेखिका : रेणु सिंह परमार श्रीमद्भगवद्गीता युद्धभूमि पर घटित भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन के मध्य एक संवाद है। परन्तु इसका वास्तविक सन्देश केवल युद्ध के विषय में ही नहीं अपितु यह भी है कि प्रत्येक दिन बुद्धिमानीपूर्वक कैसे जीवन व्यतीत किया जा सकता है। इसकी सर्वाधिक प्रभावशाली शिक्षाओं में से एक है निष्काम कर्म अर्थात् फल के प्रति आसक्त हुए बिना अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना। महान् भारतीय आध्यात्मिक गुरु, श्री श्री परमहंस योगानन्द के अनुसार, निष्काम कर्म योग का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। श्रीमद्भगवद्गीता की अपनी चिरस्मरणीय व्याख्या, ईश्वर-अर्जुन संवाद : श्रीमद्भगवद्गीता, में उन्होंने यह समझाया है कि श्रीकृष्ण का सन्देश कोई अमूर्त दर्शन नहीं अपितु प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक व्यावहारिक पथप्रदर्शक है, चाहे वह गृहस्थ धर्म का पालन कर रहा हो, किसी व्यवसाय का संचालन कर रहा हो, अथवा ईश्वर की खोज कर रहा हो। श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं : “तुम्हारा मानव-अधिकार केवल कर्म करने के लिए है, परिणामस्वरूप कर्मफलों पर नहीं। स्वयं को अपने कर्मों के फलों का स्रष्टा न मानो...

बिहार की महिलाएँ अब नौकरी तलाशने वाली नहीं, नौकरी देने वाली बनेंगी

  पटना: मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना बिहार की महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी हथियार है, जिन्हें दशकों तक केवल ‘वोट बैंक’ समझकर हाशिये पर छोड़ दिया गया था। आज बिहार की सरकार ने साफ कर दिया है कि महिलाएँ अब सिर्फ सांकेतिक शक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक बदलाव की असली धुरी बनेंगी।  भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल द्वारा जारी  एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना योजना उन राजनीतिक दलों के लिए करारा जवाब है, जो महिला सशक्तिकरण की बात तो करते हैं लेकिन सत्ता में रहते हुए कभी भी ठोस कदम नहीं उठा पाए। बिहार की महिलाओं के हाथों में अब सरकार ने वह आर्थिक ताकत दी है, जिससे वे न सिर्फ खुद का कारोबार खड़ा करेंगी बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक दिशा बदलकर दिखाएँगी।जो राजनितिक पार्टियां महिलाओं को सिर्फ रसोई और राशन तक सीमित रखते थे, उनका दौर खत्म। अब महिलाएँ दुकान, उद्योग, सर्विस सेक्टर, स्टार्टअप और उत्पादन इकाइयों की मालिक बनेंगी। अब बिहार में रोजगार भीख नहीं, बल्कि व्यवसाय से पैदा होगा महिला उद्यमियों की अगुवाई में। प्रेस विज...

राज्य में यमुना जल लाने का मार्ग प्रशस्त, शेखावाटी अंचल में पहुंचेगा यमुना जल

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 *नोएडा में अपर यमुना रिव्यू कमेटी की 9वीं बैठक।* नई दिल्ली। राजस्थान के लिए अतिमहत्वपूर्ण अपर यमुना रिव्यू कमेटी की 9वीं बैठक गुरुवार को नोएडा के यमुना भवन में संपन्न हुई। इसमें राजस्थान से जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत शामिल हुए। बैठक में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री .  सी आर पाटिल, राजस्थान मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा और हरियाणा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के भागीरथ प्रयासों से वर्षों से लंबित यमुना जल अपवर्तन कार्य को धरातल पर लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।   श्री रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में अंतिम छोर तक जल उपलब्धता की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले ले रही हैं। यमुना जल की यह परियोजना राज्य सरकार की प्राथमिकता में है। उन्होंने बताया कि फरवरी, 2024 में यमुना जल के सम्बंध में एक ऐतिहासिक एमओयू के अनुरूप हरियाणा और राजस्थान सरकार द्वारा संयुक्त टास्क फॉर्स का गठन किया गया। इस फाॅर्स द्वारा ही डीपीआर को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के शेखावाटी अं...

नशा मुक्त भारत : भ्रम बनाम सच का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

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“दम मारो… पर नशा छोड़ो—अपने सपनों को नहीं!” नशे की धुंध में खोता समाज डॉ उमेश शर्मा “दम मारो दम मिट जाये…”—यह फ़िल्मी पंक्ति हमारे समाज की वास्तविकता से कभी-कभी मेल खाती दिखाई देती है। देश में नशामुक्ति अभियान तेज़ी से चल रहा है, यद्यपि नशे के प्रकार और उनके प्रभाव को लेकर आम नागरिकों में कई भ्रांतियाँ मौजूद हैं। एक ओर भाँग/गांजा/Marijuana पर कानूनी रोक है, जबकि दूसरी ओर शराब खुलेआम उपलब्ध है—और कई बार हर गली-कूचे में दुकानें खुली मिल जाती हैं। इस विरोधाभास ने यह बहस जन्म दी है कि कौन-सा पदार्थ कितना हानिकारक है और किसका दुष्प्रभाव समाज पर अधिक गहरा पड़ता है। इस लेख का उद्देश्य किसी भी नशे का महिमामंडन नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टि से तथ्यपरक तुलना प्रस्तुत करना है, ताकि नशामुक्ति के अभियान को सही समझ और दिशा मिले। Marijuana (भाँग/गांजा) और शराब : स्वास्थ्य प्रभाव 1. शारीरिक प्रभाव Marijuana: • यह फेफड़ों, प्रतिक्रिया-समय और याददाश्त पर प्रभाव डाल सकती है। • नियमित और अधिक उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। • लेकिन शराब की तुलना में इससे होने ...

भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर नोएडा में सप्त शक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन

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नोएडा:वि द्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा  संस्थान  से सं बद्ध भाऊ र ाव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर नोएडा में  आज   सप्त  शक्ति संगम कार्यक्रम का  आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ  मुख्य  वक्ता  सुश्री रेखा  चूड़ास मा   जी   ,   अध्यक्षा श्रीमती   प्रीति दादू   जी ,   व   डॉ  कविता रस्तोगी  जी  (  प्रधानाचार्या  )   एवं  कार्यक्रम की   मुख्य अतिथि डॉ मोनिका चौहान जी   द्वारा  दीप  प्रज्वलन  से किया  गया  तथा सरस्वती माता की संस्कृत वन्दना  प्रस्तुत की गयी। तत्पश्चात् कार्यक्रम  की   संयोजिका  डॉ   नीतू सिंह  ( भा.दे.स०वि०म०, नोएडा) द्वारा अतिथि यों का  परिचय एवं  स्वाग त क राया   गया   ।  इसके बाद  डॉ कविता रस्तोगी द्वारा  “ सप्त  शक्ति संगम ”  कार्यक्रम क ी   प्रस्तावना   प्रस्तुत   की   गयी   । जिसमें  उन्होंने बताया कि नारी केवल...