नया वर्ष, नया नोएडा, विकास की ऊँची इमारतों के बीच बुनियादी ज़रूरतों की तलाश- डॉ उमेश शर्मा





नोएडा। सेक्टर 122 के आवासीय कल्याण संगठन के अध्यक्ष व प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक डॉ उमेश शर्मा ने नोएडा के विकास केा लेकर अपना विचार व सुझाव व्यक्त करते हुए बताते हैं कि  नया वर्ष हर शहर के लिए नई उम्मीदें लेकर आता है। ंनोएडा जो देश के तेज़ी से विकसित होते शहरों में गिना जाता है, ऊँची इमारतों, आईटी हब और आधुनिक आवासीय परियोजनाओं के कारण पहचान बना चुका है। लेकिन जब विकास को आम नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी के पैमाने पर परखा जाता है, तो तस्वीर उतनी चमकदार नहीं दिखती।

वे बताते हैं कि किसी भी विकासशील शहर की असली पहचान उसकी बुनियादी सुविधाओं से होती है-साफ़ सड़कें, बेहतर यातायात, स्वच्छता, पानी, बिजली, सुरक्षा और जवाबदेह प्रशासन। इन्हीं मानकों पर नोएड को परखें तो कई गंभीर कमियाँ सामने आती हैं। सबसे पहली ज़रूरत है सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था। ंनोएडा की कई सड़कों पर गड्ढे, टूटे फुटपाथ और अव्यवस्थित ट्रैफिक आम समस्या बन चुके हैं। पैदल यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सड़क पार करना जोखिम भरा है। जाम अब केवल व्यस्त समय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे दिन की समस्या बन गया है। दूसरा बड़ा मुद्दा है स्वच्छता और कचरा प्रबंधन। सेक्टरों और बाज़ारों में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई देते हैं। खाली प्लॉट अनधिकृत डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। शिकायतों पर देर से कार्रवाई होने से नागरिकों में असंतोष बढ़ता है। पानी, सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था भी ंनोएडा की कमजोर कड़ी है। बरसात आते ही कई सेक्टरों में जलभराव हो जाता है। सीवर ओवरफ्लो और गंदे पानी की सप्लाई से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं।

डॉ शर्मा ने बताया कि इन्हीं बुनियादी सुविधाओं में एक गंभीर समस्या है बिजली सप्लाई की अनियमितता। आए दिन होने वाले पावर कट, लो-वोल्टेज की समस्या और बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती से आम नागरिक, छात्र और व्यापारी सभी प्रभावित होते हैं। गर्मियों में यह समस्या और विकराल हो जाती है। डिजिटल युग में निर्बाध बिजली आपूर्ति अब सुविधा नहीं, बल्कि मूल आवश्यकता बन चुकी है, जिसमें नोएडा कई क्षेत्रों में पीछे दिखता है।

उन्होंने बताया कि पर्यावरण के मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक है। पार्कों की देखरेख की कमी, कटते पेड़ और बढ़ता वायु प्रदूषण, शहर के भविष्य पर सवाल खड़े करते हैं। विकास यदि पर्यावरण संतुलन बिगाड़े, तो वह टिकाऊ नहीं कहा जा सकता।

इसके अतिरिक्त, नागरिक सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाएँ भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हैं। कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट खराब रहती हैं, जिससे रात के समय असुरक्षा की भावना बढ़ती है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित वातावरण किसी भी आधुनिक शहर की अनिवार्य शर्त है। इन सभी समस्याओं के मूल में जवाबदेह प्रशासन की कमी दिखाई देती है। शिकायत निवारण प्रणाली की धीमी गति, नागरिकों से संवाद का अभाव और पारदर्शिता की कमी, विकास के दावों को कमजोर बनाती है।

नए वर्ष मे ंनोएडा प्राधिकरण से अपेक्षा है कि वह काग़ज़ी योजनाओं से आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर ठोस कार्य करे। सड़क, पानी, बिजली, सफ़ाई और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। बिजली आपूर्ति को स्थिर और पारदर्शी बनाया जाए, तथा कटौती की पूर्व सूचना और त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होने अपना सुझाव देते हुए बताया कि  ंनोएडा को नई इमारतों से अधिक मजबूत बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है।विकास वही है जो आम नागरिक को राहत, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन दे। नया साल, नई सोच कृ ंनोएडा को इमारतें नहीं, बुनियादी सुविधाएँ चाहिए।।

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