तेज गुस्सा आए तो क्या करें ?



डॉ कुसुम पथरिया 

जल्दी गुस्सा आना आपके भीतर की अशांति को दर्शाता है, जिसे रोजाना 15-20 मिनट ध्यान, गहरी सांस लेने के अभ्यास (Pranayam), और अपनी भावनाओं के प्रति जागरूक रहकर नियंत्रित किया जा सकता है। बाहरी हालातों को दोष देने के बजाय, अपने मन की स्थिति खुद तय करें और शांत रहने का चुनाव करें। 

जब गुस्सा आए, तो गहरी सांस लें या सांसों को गिनना शुरू करें।आंतरिक स्थिति खुद चुनें: यदि आपको गुस्सा पसंद नहीं है, तो आप इसे न करने का विकल्प चुन सकते हैं। यह न सोचें कि बाहरी परिस्थितियों के कारण आपको गुस्सा आया, बल्कि यह याद रखें कि आप अपने भीतर क्या हो रहा है, यह खुद नियंत्रित कर सकते हैं।

भावनाओं से दूरी बनाएं: जब भी गुस्सा या तेज भावनाएं आएं, तो मौन हो जाएं और आंखें बंद करके थोड़ी देर एक जगह बैठ जाएं। दूसरों को अपनी भावनाओं का शिकार न बनाएं।

आत्म-जिम्मेदारी (Responsibility): अगर कोई दूसरा व्यक्ति तय कर रहा है कि आपको कब गुस्सा आना चाहिए, तो आप गुलाम हैं। अपनी प्रतिक्रियाओं की जिम्मेदारी खुद लें।शरीर-मन का संतुलन: यदि गुस्सा बहुत ज्यादा आता है, तो यह आपकी मानसिक स्थिरता की कमी है। हर दिन कम से कम कुछ मिनट स्थिर बैठना (बैठकर शांत होने का अभ्यास) सीखें।

विटामिन B12 का स्तर: कुछ मामलों में, विटामिन B12 की कमी भी चिड़चिड़ापन और गुस्से का कारण बन सकती है। 

कुछ देर टहलें या प्रकृति के बीच समय बिताएं।


क्रोश से अपनी ऊर्जा का नुक्सान हो रहा है

किसी एक व्यक्ति के साथ शुरू हुई दुश्मनी, धीरे-धीरे बढक़र पारिवारिक शत्रुता, सामूहिक शत्रुता और फिर पूरे राष्ट्र के प्रति शत्रुता की शक्ल में बदलती चली जाती है।

आप अपने शरीर के अंगों को किस रूप में रखते हैं उसके आधार पर आपकी प्राणशक्ति की गति में अंतर आ जाता है। 

बदला लेने की भावना समाज द्वारा मान्यता प्राप्त मनोवृत्ति बन गई है। आंखें बंद रखते हुए अपनी हथेलियों को सीधे ऊपर की ओर रखिए। अपनी सांसों पर ध्यान दीजिए। उन्हीं हथेलियों को औंधा रखकर सांसों पर ध्यान दीजिए। आप पाएंगे कि अब सांस चलने का ढंग अलग है। आप अपने शरीर के अंगों को किस रूप में रखते हैं उसके आधार पर आपकी प्राणशक्ति की गति में अंतर आ जाता है। इसका ख्याल किये बिना गुस्से में अपने हाथों को इधर-उधर हिलाते हुए चिल्लाते समय आपकी प्राणशक्ति किस कदर संकट में पड़ जाती होगी, इस पर जरा सोचिए। पता है, असावधानी के साथ आप अपनी शक्ति का किस हद तक नुकसान कर रहे हैं? अगर आप सही ढंग से काम नहीं करेंगे तो आप किसी भी काम में सफल नहीं होंगे।


क्रोध (anger) एक प्रकार का जहर है जो आप खुद पैदा करते हैं, लेकिन योग और ध्यान के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसका मुख्य उपाय खुद का साक्षी (witness) बनना, गहरी साँस लेना, अपनी भावनाओं को समझना और स्वयं को परिस्थिति से अलग करना है। क्रोध को एक लक्षण समझें, न कि कर्म, और अपनी चेतना को बढ़ाकर इसे प्रबंधित करें। 

क्रोध को संभालने के साक्षी (Witness) बनें: जब क्रोध आए, तो उससे लड़ने के बजाय, उसे एक 'दर्शक' की तरह देखें, बस साक्षी बनें।

गहरी साँसें लें: जब गुस्सा भड़के, तो साँस अंदर लेने की बजाय, धीमी और गहरी साँसें छोड़ने का अभ्यास करें।

खुद को शांत करें: किसी प्रिय दृश्य की कल्पना करें, शांत रहने वाले शब्दों को दोहराएं, या योग/प्राणायाम करें।

परिस्थिति से अलग रहें: खुद को उस situation से अलग करके देखें और सोचें कि क्या यह गुस्सा वाकई ज़रूरी है।

खुद पर शासन करें: क्रोध को यह समझें कि यह एक छोटा सा संकेत है कि आप जीवन में कहां जा रहे हैं, इसे एक जहरीली भावना के रूप में देखें और इससे दूर रहें।

योग और ध्यान का अभ्यास करें थोड़े समय के लिए टहलें या बाहर निकल जाएं।

मौन रहना: उस समय चुप रहने का प्रयास करें। 

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