बिहार की महिलाएँ अब नौकरी तलाशने वाली नहीं, नौकरी देने वाली बनेंगी
पटना: मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना बिहार की महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी हथियार है, जिन्हें दशकों तक केवल ‘वोट बैंक’ समझकर हाशिये पर छोड़ दिया गया था। आज बिहार की सरकार ने साफ कर दिया है कि महिलाएँ अब सिर्फ सांकेतिक शक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक बदलाव की असली धुरी बनेंगी।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना योजना उन राजनीतिक दलों के लिए करारा जवाब है, जो महिला सशक्तिकरण की बात तो करते हैं लेकिन सत्ता में रहते हुए कभी भी ठोस कदम नहीं उठा पाए। बिहार की महिलाओं के हाथों में अब सरकार ने वह आर्थिक ताकत दी है, जिससे वे न सिर्फ खुद का कारोबार खड़ा करेंगी बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक दिशा बदलकर दिखाएँगी।जो राजनितिक पार्टियां महिलाओं को सिर्फ रसोई और राशन तक सीमित रखते थे, उनका दौर खत्म। अब महिलाएँ दुकान, उद्योग, सर्विस सेक्टर, स्टार्टअप और उत्पादन इकाइयों की मालिक बनेंगी। अब बिहार में रोजगार भीख नहीं, बल्कि व्यवसाय से पैदा होगा महिला उद्यमियों की अगुवाई में।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उन पुरानी सोच पर भी चोट है जो मानते थे कि महिलाएँ कारोबार नहीं संभाल सकतीं। सरकार की यह पहल हजारों-लाखों महिलाओं को वित्तीय मदद, प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और तकनीकी समर्थन दे रही हैकृजो पहले कभी किसी सरकार की प्राथमिकता नहीं रही।यह भी समझ लेना चाहिए कि महिला उद्यमिता का उभार सीधे-सीधे बिहार की ळक्च्, परिवारों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।इस कदम से उठने वाली रोजगार की लहर उन विपक्षी पार्टियों के मुँह पर तमाचा है जो विकास को केवल भाषणों तक सीमित रखते हैं। बिहार की महिलाएँ अब नौकरी तलाशने वाली नहीं, नौकरी देने वाली बनेंगीकृऔर यही असली बदलाव है।
प्रेम रंजन पटेल के अनुसार मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना राज्य की अर्थव्यवस्था, सामाजिक संरचना और राजनीतिक परिदृश्यकृतीनों को पुनर्परिभाषित करने वाली ऐतिहासिक पहल है। विरोधियों की आंखों में खटक रही यही बात आने वाले वर्षों में बिहार के विकास का सबसे बड़ा प्रमाण बनेगी।