विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 115वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन 'विज्ञान भवन' में संपन्न




दिल्ली। विश्व हिंदी परिषद नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 115वीं जयंती के अवसर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन 2023 का भव्य कार्यक्रम दिल्ली के 'विज्ञान भवन' में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिसमें विभिन्न सत्रों में हिन्दी भाषा, साहित्य,संस्कृति व सत्ता, प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण विद्वत जनों ने दिनकर जी के राष्ट्रवादी चिंतन और उन की विलक्षण, अतुलित शब्द सामर्थ्य का स्मरण करते हुए उन्हें हिन्दी भाषा,प्रगतिशीलता और मानवता के पक्षधर  के रूप में ऋषितुल्य कालजयी कवि बताया।

सम्मेलन में प्रथम दिवस पर उद्घाटन सत्र में उद्घाटनकर्ता गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री  अजय कुमार मिश्र ने दिनकर जी की अनेक कालजयी रचनाओं को उद्धृत करते हुए कहा कि दिनकर जी राष्ट्रवादी चेतना के एक उत्कृष्ट कवि ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के राजनीतिज्ञ भी थे। उनकी कविताओं ने न केवल हिंदी भाषा को समृद्ध बनाया है बल्कि हरेक  वर्ग और हर  पीढ़ी के लिए उनकी कविताएं, उनका सृजन एक आदर्श हैं ।इस अवसर पर आरंभ में विश्व हिंदी परिषद के महासचिव डॉ.विपिन कुमार ने दिनकर जी के महान व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए कहा कि परिषद का इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के पीछे हिंदी भाषा व हिंदी सेवियों के मध्य एक मजबूत पुल खड़ा करना है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय राजभाषा सम्मेलन में आलेख प्रकाशन, वाचन, कवि सम्मेलन, सम्मान के अलग-अलग प्रकल्पों के साथ हिंदी भाषा को संवैधानिक रूप से राष्ट्रभाषा बनाने के प्रति एक रचनात्मक व वैचारिक वातावरण खड़ा करने का भी परिषद का मूल उद्देश्य है।इस अवसर पर 'आज तक'  हिन्दी समाचार चैनल के संपादक और ब्लैक एंड व्हाइट शो के मेज़बान सुधीर चौधरी ने बतौर अतिथि अपने वक्तव्य में कहा की राष्ट्रभाषा हिंदी की गरिमा और संरक्षण को बनाए रखने के लिए विश्व हिंदी परिषद जैसी लोक मंगल व सर्व कल्याण कारी संस्थाएं समर्थ और सक्रिय रूप से जो कार्य कर रही हैं वह हिन्दी के लिए बहुत  ही श्रेष्ठ, सकारात्मक स्तुत्य प्रयास है। उन्होंने कहा कि विश्व भर में आज हिंदी प्रथम स्थान बनने की ओर अग्रसर  है। उन्होंने मंच से आग्रह किया कि हम अपने घर परिवारों में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग करें व  नवीन पीढ़ी को प्रेरित करते हुए सुधीर चौधरी ने आज के समय में ट्विटर, इंस्टाग्राम,फेसबुक, व्हाट्सएप टेलीग्राम, युटू्यूब और तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिन्दी का बढ़ – चढ़ कर प्रचार करने पर ज़ोर दिया। उद्घाटन सत्र में जहानाबाद के पूर्व सांसद हिंदी एवं प्रकृति प्रेमी श्री अरुण कुमार, विधान पार्षद शर्वेश  कुमार, एन आइ ओ एएस के अध्यक्ष , विदुषी डॉ. सरोज शर्मा तथा इस उपभोक्ता मामलों खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अपर सचिव श्री शांतमनु ने  अपने विचार रखे।  सभी अतिथियों ने दिनकर जी के जीवन व उनके ओजस्वी कविताओं में उन्हें क्रांति व शांति का अमर दूत बताते हुए कहा कि दिनकर जी हिंदी साहित्य के वह सूरज हैं जिनका उजास हिंदी साहित्य नहीं हमारे समाज, संस्कृति और देश की देहरी को एक सदी से आलोकित कर रहा है और आगे भी करेगा। आरंभ में ही गृह राज्य मंत्री श्री अजय मिश्रा में अन्य अतिथियों ने राष्ट्रकवि दिनकर जी की तस्वीर के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित की। धन्यवाद की रस्म सम्मेलन के सहसंयोजक से दीपक ठाकुर ने अदा की एवं सत्र का संचालन परिषद की राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. शकुंतला सरूपरिया ने किया।

मणिपुर की महामहिम राज्यपाल सुश्री अनसूया उइके ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 115वीं जयंती के उपलक्ष में विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय  हिंदी सम्मेलन में कहा कि हिंदी भाषा भारतीय संस्कृति और सभ्यता की परिचायक है, जो हमारे जीवन मूल्य, संस्कृति संस्कारों की सच्ची संवाहक और संप्रेषण भी है। उन्होंने कहा कि हिंदी एक ऐसी मीठी, मृदुल, वैज्ञानिक भाषा भी है जो हमारे पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक प्रगति के बीच का सेतु है और हिंदी आम आदमी की भाषा के रूप में हमारे विशाल देश भारत की एकता का सूत्र भी है। हिन्दी को मिल जुलकर हमें हर दृष्टि से सर्वत्र सर्वोपरि बनाए रखना चाहिए। उन्होंने  हिन्दी को सर्वोत्कृष्ठ व सार्वभौमिक भाषा बताते हुए कहा कि हिंदी भाषा की समृद्धि और प्रचार प्रसार के लिए विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित इस तरह के उत्कृष्ट व विराट कार्यक्रम जगह-जगह होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे हिंदी भाषा से बहुत अधिक प्रेम है अतः मैं स्वयं राज भवन में आने वाले किसी भी आगंतुक से मिलने से पहले शर्त रखती हूं कि मुझ से हिंदी में ही बात की जाए। राज्यपाल महोदय ने बताया की कैसे उन्होंने अपने निरंतर प्रयासों से संसद सत्र मे हिन्दी मे बहस करने को अनिवार्य करवाया। अंत मे मणिपुर की जनता के कुशल भविष्य की कामना की।  कार्यक्रम के अध्यक्ष 'मुनि की रेती' ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी श्री चिदानन्द सरस्वती जो हिन्दू आध्यात्मिक गुरू एवं भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान, ऋषिकेश तथा पिट्सबर्ग के हिन्दू-जैन मन्दिर के भी संस्थापक एवं अध्यक्ष हैं। उन्होंने  आगंतुक साहित्यकारों और पत्रकारों को अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दी केवल भाषा नहीं, भावों की अभिव्यक्ति है, यह मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है। हिन्दी हमारी जननी है और हिन्दी से ही हमारी पहचान भी है। स्वामी जी ने राष्ट्रपति राष्ट्रकवि दिनकर जी को याद करते हुए कहा कि वे महान हिन्दी के तेजस्वी राष्ट्रवादी कवि थे, उनकी कविताओं में हिंदी भाषा का जो स्वरूप है उसमें  पूर्व से ही विकास और प्रसार की अपार संभावनाएं नज़र आती हैं। हिन्दी का सम्मान, हिन्द का सम्मान है। स्वामी चिदानन्द महाराज ने कहा कि ‘जब हम अपना जीवन जननी हिंदी, मातृभाषा हिंदी के लिये समर्पित कर दें, तभी हम हिंदी प्रेमी कहला सकते हैं। जिस भाषा ने भारत के लगभग सभी राज्यों और क्षेत्रों को जोड़ने का अनुपम कार्य किया है। अब समय आ गया है कि सभी भारतवासी हिन्दी के विराट अस्तित्व को जानें और उसे किसी भी प्रकार के भाषायी विवादों में न घसीटें। हिन्दी के प्रसार इसका प्रमुख कारण हिन्दी साहित्य, ग्रंथ, हिंदी सिनेमा, टेलीविजन तथा हमारी विविधता में एकता की संस्कृति का महत्वपूर्ण योगदान है। इसका प्रयोग पढ़ने, लिखने और संवाद हेतु किया जाता है व हिंदी अपनेपन और आत्मीयता युक्त संवाद की सबसे उत्तम भाषा है। स्वामी जी ने कहा कि हिंदी को भारत की आधिकारिक आधिकारिक  रूप से भाषा के साथ तकनीकी भाषा के रूप में स्वीकार करना नितांत आवश्यक है ही, परन्तु भारतवासियों को पहले हिन्दी को हृदय से स्वीकारने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने शब्दों मे हिन्दी के प्रति असीम प्रेम और गर्व की भावना रखते हुए आज के परिवेश मे हिन्दी के वैश्विक स्तर प्रसार सभी के कार्यों को सराहा 

     आरंभ में  डॉ॰ बिपिन कुमार- महासचिव विश्व हिन्दी परिषद ) ने देश विदेश से आए सभी आगंतुक सहभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है की हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित होगी साथ ही यह एक विश्व भाषा भी बनेगी।  उन्होंने  रामधारी सिंह दिनकर जी के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु  के साथ हुए एक बहुचर्चित  वाक़या को दोहराते हुए कहा “जब भी राजनीति लड़खड़ाएगी। तब -तब साहित्यकार उसे सहारा देकर संभालने में समर्थ  हैं”। 

इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र और धर्म के दर्शन और संस्कृत व्याकरण के विशेषज्ञ प्रो.सच्चिदानंद मिश्र, जहानाबाद के पूर्व सांसद  अरुण कुमार ने भी अपना दिनकर जी और हिंदी भाषा के उच्च स्वरूप का वर्णन करते हुए अपने विचार रखे।  अरुण कुमार ने संसद भवन में दिनकर  की विराट मूर्ति की स्थापना की भी बात कही। राष्ट्रकवि दिनकर  के सुपौत्र , पत्रकार एवं लेखक अरविंद सिंह पटना ने अपने दादा की पावन स्मृतियों को जीवन्त किया व उनकी कुछ कविताओं का वाचन भी किया। उनकी सुपौत्री श्रीमती पदमा सिंह  भी उपस्थित  रहीं। परिषद की राष्ट्रीय समन्वयक डॉ .शकुंतला सरूपरिया दके मंच संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल -सुश्री अनसूईया उईके,स्वामी श्री चिदानंद सरस्वती जी ने उल्लेखनीय साहित्य एवं  पत्रकारिता के क्षेत्र उत्कृष्ट कार्य करने हेतु विशिष्ट जनों का सम्मान किया। जिनमें आजतक के मशहूर सलाहकार संपादक सुधीर चौधरी, पंजाब केसरी की सीईओ किरण चौपड़ा, अमर उजाला के संपादक उदय कुमार सिन्हा, दैनिक जागरण के ऑनलाईन सम्पादक कमलेश, मोरीशस- की कवयित्री व लेखिका कल्पना लाल, नीदर लैंड की लेखिका एवं कवयित्री -पुष्पिता अवस्थी,राष्ट्रवादी कवि व पूर्व सांसद  ओमपाल सिंह लीडर डॉ. कीर्ति काले, हिंदी प्रोफेसर स्वाति पाल, लंदन से आईं सिम्मी राठौर-सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर आदि शामिल  थे।  सभी को शाॅल,स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया । 


राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर  की 115वीं जयंती पर विश्व हिन्दी परिषद द्वारा दो - दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का द्वितीय दिवस कार्यक्रम विज्ञान भवन मे किया  गया जिसमें प्रथम  10  बजे के प्रात:कालीन सत्र में अध्यक्षता करते हुए ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी ,नागालैंड के कुलाधिपति प्रोफेसर प्रियरंजन त्रिवेदी जी ने कहा की ,इस अवसर पर त्रिनिदाद व टबेगो के उच्चायुक्त डॉ.रॉजर गोपॉल फ़िज़ी के उच्च आयोग के सलाहकार  निलेश रोनिल कुमार व  मॉरीशस के उच्च आयुक्त हयामंडोयल डिलम एवं सूरीनाम के उच्चायुक्त अरुणकुमार हरदीन  ने अपने-अपने विद्वतापूर्ण उद्बोधन में हिंदी की बढ़ती जा रही लोकप्रियता व महिमा को स्वीकारते हुए मूल रूप से यही कहा कि एक उच्च भारतीय भाषा के रूप में हिंदी अब एक वैश्विक भाषा बन चुकी है, जिसे किसी भी भाषा से ख़तरा नहीं है। कार्यक्रम में एस. वी. कॉलेज,आरा,(बिहार) की प्राचार्य डॉ.पूनम कुमारी ने हिंदी और राष्ट्रवाद को लेकर पत्र वाचन किया। विश्व हिंदी परिषद के महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने सभी का स्वागत किया।  इस प्रारंभिक सत्र में विश्व हिंदी परिषद की प्रादेशिक कार्यकारिणियों के अध्यक्षों-उत्तराखंड के श्री भूदत्त शर्मा, हरियाणा के श्री राजपाल यादव, बिहार के डॉ. किशोर सिंह गुजरात के श्री मयंक कुमार डोलरराय रावल, महाराष्ट्र के प्रो.अर्जुन चव्हाण, राजस्थान के श्री दिनेश सिंदल, झारखंड के श्री अरूण सज्जन, हिमाचल प्रदेश के डॉ. मनोज शर्मा को विशेष स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।विश्व  हिंदी परिषद के विशिष्ट सहयोगी के रूप में प्रो. श्रीनिवास त्यागी ,  डॉ. श्रवण कुमार जी, को सम्मानित किया गया ।

 यह कार्यक्रम डॉ॰ बिपिन कुमार -महासचिव- विश्व हिन्दी परिषद के अध्यक्षता में आयोजित हुआ ।कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि  लक्ष्मण आचार्य  राज्यपाल- सिक्किम , विशिष्ट अतिथि साध्वी भगवती सरस्वती  ,परमार्थ निकेतन , ऋषिकेश , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  कर वरिष्ठ अधिकारी  इंद्रेश कुमार  रहे तो वही गणमान्य अतिथियों मे  एस॰पी॰ सिंह बघेल  ,केंद्रीय  स्वास्थ्य राज्यमंत्री, भारत सरकार थे  । कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया । बिपिन कुमार  द्वारा मंचासीन अतिथियों को शॉल भेंट कर, तुलसी का पौधा व स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मान ज्ञापित किया गया ,साथ ही उपस्थित सभी अतिथियों का सम्बोधन करते हुए रामधारी सिंह दिनकर  कविताओं के छंद सबके साथ साझा किया ।  राज्यपाल  ने हिन्दी भाषी होने पर न केवल गर्व जताया बल्कि कार्यक्रम के विषय को भी सराहा, साध्वी सरस्वती जी जी ने बताया की अक्सर लोग उनसे हिन्दी में बात करने पर अंग्रेज़ी में प्रतिक्रिया देते हैं, तो कैसे अंग्रेज़ी के प्रति लोगों को शुरू से अग्रसर रखा गया । हम सभी भारत वसियों को हिन्दी को विश्व पटल पर ले जाने के लिए एकजुट होकर अग्रसर होना चाहिए ।  संचालन डॉ. भावना शुक्ला ने किया वह धन्यवाद की रस्म डाॅ. श्रवण कुमार ने अदा की।


राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर  की 115वीं जयंती पर विश्व हिन्दी परिषद द्वारा दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के समापन समारोह में सिक्किम के राज्यपाल  लक्ष्मण कुमार आचार्य ने विश्व हिंदी परिषद के हिंदी के दिनकर जी के 115वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और हिंदी के प्रचार प्रसार के योगदान हेतु बधाई देते हुए कहा  कि राष्ट्रकवि श्री दिनकर एक ऐसे कवि थे जो मानव मात्र के दु:ख- दर्द और पीड़ा को शिद्दत से महसूस करते थे, जिनके लिए राष्ट्र सिर्फ़ सर्वोपरि था। जिनकी कालजयी हुंकार भरती हुई ओजस्वी कविताएं एक साधारण किसान, एक श्रमिक से लेकर किसी स्कॉलर छात्र तक के लिए एक प्रेरणा का स्रोत रही हैं।

 

 राज्यपाल  ने कहा कि आज समय आ गया है कि जन-जन में राष्ट्रवादी चिंतन के ऐसे शिरोमणी कवि के उच्च विचारों को पहुंचाया जाए, ताकि वैश्विक पटल पर हिंदी का सूरज प्रदीप्त  बना रहे।

 विशिष्ट अतिथि साध्वी भगवती सरस्वती ( परमार्थ निकेतन निकेतन आश्रम, ऋषिकेश ने बताया की अक्सर लोग उनसे हिन्दी में बात करने पर अंग्रेज़ी में प्रतिक्रिया देते हैं। जबकि मैं अमेरिका से जब भारत में आई तब से लोगों से बातचीत करते-करते मैंने मेहनत से हिंदी सीखी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की महक उन्हें यहां तक खींच लाई है। काम के प्रति अपनी निष्ठा और रचनाधर्मिता की बदौलत परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानंद सरस्वती के निर्देशन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मूर्त रूप देने का अवसर मिला । 

साध्वी भगवती ने बताया  कि दुनिया भर के करीब 200 से ज़्यादा देश योग दिवस में उनके निर्देशन में प्रतिभाग करते हैं जो दुनिया भर के सबसे बड़े आयोजनों में शुमार होता है। उन्होंने कहा मैं एक है हिंदी भाषा प्रदेश की निवासी हूं, फिर भी पर्यावरण और योग के क्षेत्र में वैश्विक प्रयासों के चलते ही उन्हें ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस का महासचिव बनाया गया है। उन्होंने कहा भारतीय संस्कृति की कई विशेष बातें हैं। मुझे भी हिंदी और हिंदुस्तान से प्यार है। 

इस अवसर पर संघ के प्रचारक  राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के सलाहकार इन्द्रेश कुमार ने कहा कि हिंदी साहचर्य सौहार्द ,भातृत्व भाव से भरी भाषा है और इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने से पहले हमें अपने परिवारों में स्थाई रूप से अपनाना होगा। उन्होंने कहा किसी भी दूसरी भाषा को ही समझना एक अपराध है और स्वयं को भी कभी किसी भाषा की निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि भाषा,शरीर,मन,बुद्धि और आत्मा की पहचान भी है यह संस्कृति, जीवन शैली अभिव्यक्ति भी है और हम किस भाषा में बोली बोलेंगे यह ईश्वर प्रदत्त है। अतः ईश्वर की देन को कभी हीन नहीं मानना चाहिए। हमें स्वभाषा स्वदेश पर भी स्वाभिमान होना चाहिए। उन्होंने कहा "देश प्रेम प्रथम देश प्रेम सतत्" जीवन का सार तत्व है। दिनकर जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश का सौभाग्य है की वसुधैव कुटुंबकम की भावना के स्त्रोत ओजस्वी और राष्ट्रवादी कविताओं को लिखने वाले दिनकर जी एक अमरजोत है जिनकी ज्योति हमेशा हमारे हृदय में रहेगी। उन्होंने कहा कि आज जहां हमारी संस्कृति में पश्चिम प्रभाव आता जा रहा है जो चिंतनीय विषय है । 

 इस अवसर पर स्वामी विवेक चैतन्य महाराज ने कहा जी “चंद लोगों द्वारा बोली जाने वाली अंग्रेज़ी को ख़ूब प्रचारित किया गया मैकाले के मानस पुत्रों द्वारा, अतः हम सभी भारत वसियों को हिन्दी को विश्व पटल पर ले जाने के लिए एकजुट होकर अग्रसर होना चाहिए । इस समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री  एसपी सिंह बघेल ने अपने जीवन अनुभवों को बताते हुए दिनकर जी की ऊर्जावान कविताओं का उदाहरण देते हुए अपने चिंतनशील भाषण में कहा कि हमें वर्तमान में हिंदी को सहेजने और संभालने की ज़रूरत है।  उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  द्वारा महिला आरक्षण बिल को पारित करने के संबंध में बधाई देते हुए सभी महिलाओं से कहा कि आप उन्हें कुछ कविताओं को भूलना होगा जिनमें से महिला के दोयम दर्जे पर होने की महक आती है।

समापन समारोह में नागालैंड के ग्लोबल विश्वविद्यालय कुलाधिपति  प्रियरंजन त्रिवेदी व बनारस के प्रकांड विद्वान प्रो.  सच्चिदानंद मिश्र भी मंचासीन थे। नीदरलैंड की लेखिका पुष्पिता अवस्थी एवं मारीशस  की   लेखिका कल्पना लाल ने भी अपने-अपने देश में हिंदी के प्रति हो रहे कार्यों की चर्चा की। विश्व हिंदी परिषद की स्मारिका 2023 का लोकार्पण अतिथि वृंदावन ने किया। पुष्पिता अवस्थी जी की दो किताबों का भी विमोचन अतिथियों ने किया। 

इस अवसर पर अनेक प्रबुद्ध साहित्यकारों का विश्व हिंदी परिषद की ओर से सम्मान किया गया। समारोह स्थल पर दो अलग-अलग भवन में हिंदी एवं राष्ट्रभाषा को लेकर जो आलेख मंगवाए गए थे उन में उपस्थित प्रतिभागी लेखन के पत्रों का वाचन भी हुआ वो प्रतिभागियों को विश्व हिंदी परिषद की ओर से प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समापन समारोह का संचालन राष्ट्रीय समन्वय डॉ. शकुंतला सरूपरिया ने किया धन्यवाद की रस्म दिल्ली विश्वविद्यालय  के प्रो. दीनदयाल में अदा की।


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