केरल सरकार की गलती और लापरवाही का नतीजा केरल में कोरोना के 22,000 केस : बीजेपी


कोरोना की दूसरी लहर के दौरान विपक्ष विशेष सत्र बुलाना चाहता था. अब जब रियल सत्र चल रहा है तो एक दिन भी कोरोना पर चर्चा नहीं की गई. सदन में कागज फाड़ना विपक्ष का गैर जिम्मेदाराना रवैया है। राहुल गांधी के अनुयायी संसद में पेपर फाड़ रहे हैं। सदन को सुचारू रूप से चलने नहीं दे रहे हैं और बाहर निकलकर मीडिया से बात कर रहे हैं।

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा ने आज भाजपा मुख्यालय में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केरल में बढ़ते कोरोना के नये मामलों पर राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला और कहा कि विपक्ष आखिर इस गंभीर मुद्दे पर चुप क्यों हैं? साथ ही, उन्होंने तथाकथित विपक्षी गठबंधन पर भी  निशाना साधते हुए कहा कि इनकी एक ही मंशा है अपने परिवार को बचाने की.

डॉ पात्रा ने कांग्रेस पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि जिस समय देश कोरोना से लड़ रहा था तब कांग्रेस को संसद में चर्चा करनी थी. आज जब संसद का सत्र चल रहा है तो कांग्रेस उसे चलने नहीं दे रही है. लोगों ने इन्हें संसद में बहस करने के लिए चुना है. कोरोना जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को छोड़कर कांग्रेस केवल और केवल संसद के नहीं चलने देने का बहाना खोजती रहती है.

डॉ पात्रा ने केरल में बनी नयी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज केरल में आखिर हो क्या रहा है? पिछले दिनों बकरीद के समय तीन दिन की जो छूट केरल सरकार ने दी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताते हुए कहा था कि कांवड़ यात्रा के मामले में हमने जो फैसला दिया है, उन हिदायतों का पालन बकरीद के समय केरल सरकार को भी करना चाहिए. लेकिन तुष्टिकरण की राजनीति जीती और सुप्रीम कोर्ट की इन हिदायतों का पालन केरल की सरकार ने नहीं किया. 

डॉ पात्रा ने केरल में बढ़ रहे कोरोना मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि केरल सरकार की इसी गलती और लापरवाही का नतीजा है कि आज कोरोना के 50 प्रतिशत से अधिक मामले केरल से सामने आ रहे हैं. आज केरल में कोरोना के 22,000 केस आये हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि मानो ये दूसरी लहर नहीं बल्कि केरल में कोरोना की एक नई लहर शुरू हो चुकी है. उन्होंने कहा कि विगत 4 हफ्तों में केरल में कोरोना के केस लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. महाराष्ट्र के बाद केरल सबसे ज्यादा संक्रमित राज्य है. केरल में कोरोना का पॉजिटिविटी रेट 12.35 फीसदी हो गया है. ये अपने आप में बहुत चिंता का विषय है. केरल की सरकार ने बड़ी गलती की है, तभी वहां कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं. 

डॉ पात्रा ने कहा कि केरल में इतने केस बढ़ रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण है ये जानना भी बहुत जरूरी है। कोरोना से निपटने के लिए ‘जान है तो जहान है’ के मूलमंत्र को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने कांवड़ यात्रा तक रोक दी. कांवड़ यात्रा के समय उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए, सुप्रीम कोर्ट ने जो हिदायत दी उसका भी पालन किया गया।

डॉ पात्रा ने राजस्थान की गहलौत सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कल राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने एक इंडोर स्टेडियम में अपना जन्मदिन मनाया, जिसमें कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियाँ उड़ाते हुए सैंकड़ों लोग शामिल हुए. स्कूल और कॉलेज राजस्थान में बंद हैं, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री अपना जन्मदिन इस तरह मनाकर सैंकड़ों लोगों की जान को खतरे में डाल रहे हैं.

डॉ  पात्रा ने संसद में जारी हंगामे पर विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान विपक्ष विशेष सत्र बुलाना चाहता था. अब जब रियल सत्र चल रहा है तो एक दिन भी कोरोना पर चर्चा नहीं की गई. सदन में कागज फाड़ना विपक्ष का गैर जिम्मेदाराना रवैया है। राहुल गांधी के अनुयायी संसद में पेपर फाड़ रहे हैं। सदन को सुचारू रूप से चलने नहीं दे रहे हैं और बाहर निकलकर मीडिया से बात कर रहे हैं। 

राहुल गांधी कह रहे हैं कि उनके फोन में हथियार डाल दिया गया है. अगर हथियार डाल दिया गया तो इतने दिन तक राहुल गांधी चुप क्यों बैठे रहे? इसपर उन्होंने FIR दर्ज की क्या? कोई हथियार नहीं है. जो चीज नहीं है उसका हथियार बनाकर इन्हें संसद को रोकना है. कांग्रेस और विपक्ष के लिए कोरोना से बड़ा पेगासस मुद्दा हो गया है. जब पूरा देश कोरोना से लड़ रहा था तब ये सभी घरों में दुबके बैठे थे. डॉ पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी का मतलब ही गैर जिम्मेदार होना है।

डॉ पात्रा ने विपक्ष के तथाकथित गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी कह रहे हैं विपक्ष एक साथ हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी ऐसी तस्‍वीर आई थी लेकिन गठबंधन का क्या नतीजा निकला, यह सबको मालूम है. गठबंधन में शामिल दल केवल अपने परिवार के बारे में सोचते हैं. उनकी एक ही मंशा है अपने परिवार को बचाने की. आपको क्‍या लगता है कि अखिलेश यादव, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी चाहती हैं कि देश का स्‍वर्णिम युग आ जाए. कदाचित नहीं. ये सभी चाहते हैं कि किसी तरह इनके बच्‍चे राजनीति में सेटल हो जाएं. वहीं हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केवल एक ही मंशा है कि हिंदुस्‍तान विकास के पथ पर आगे बढ़े.

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