नदी-जोड़ो परियोजना का मार्ग प्रशस्त

 डॉ दिनेश प्रसाद मिश्र

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में देश की नदियों को जोड़कर आवश्यकता एवं समयानुसार उनके जल को हस्तांतरित करने का मार्ग प्रशस्त करते हुए नदी जोड़ो अभियान को पूरे राष्ट्र में प्रभावी करने का मार्ग प्रशस्त


किया है। उन्होंने न केवल बुंदेलखंड की केन बेतवा नदी परियोजना को पूर्णता प्रदान करने हेतु पर्याप्त बजट की व्यवस्था की है अपितु दक्षिण भारत की अनेक नदियों को परस्पर जोड़ने की दिशा में कार्य करने की भी बात कही है। पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड के लोगों को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के लिए बजट में ₹1400 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस परियोजना के द्वारा बुंदेलखंड के बांदा हमीरपुर ललितपुर महोबा 4 जिलों तथा मध्य प्रदेश के ये 9 जिलों के किसानों की सिंचाई क्षमता तो बढ़ेगी ही, साथ ही बिजली का उत्पादन भी कर ऊर्जा की समस्या का भी समाधान मिल सकेगा। 44605 करोड़ रुपए की इस परियोजना पर बजट में 1400 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है पर योजना के पूर्ण होने पर इससे 9.08 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी साथ ही 6200000 लोगों को पीने के पानी की भी आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी पर योजना में 103 मेगावाट पनबिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का भी लक्ष्य रखा गया है इस परियोजना के अंतर्गत केन नदी का अतिरिक्त पानी वेतन बेतवा नदी तक पहुंचाया जाएगा।

बजट में केन बेतवा परियोजना के अतिरिक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दक्षिण भारत की 5 नदी जोड़ परियोजनाओं यथा-दमनगंगा पिंजाल, पार तापी  नर्मदा ,गोदावरी कृष्णा ,कृष्णा पेन्नार एवं पेन्नार कावेरी को भी जोड़ने की बात कही है । दमनगंगा पिंजाल नदी जोड़ परियोजना के अंतर्गत भुगड़ और खरगी हिल झील से अतिरिक्त पानी को पिंजाल नदी के द्वारा वैतरना बेसिन तक पहुंचाया जाएगा, इससे मुंबई में पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इसी तरह से पार तापी नर्मदा नदी जोड़ परियोजना के अंतर्गत पार, नार अंबिका और औरंगा नदियों के पानी को महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्र से होकर नर्मदा नदी तक पहुंचाया जाएगा जिससे औरंगाबाद और नासिक समेत महाराष्ट्र के बड़े क्षेत्र में पानी की समस्या दूर हो सकेगी। इसी प्रकार गोदावरी कृष्णा, कृष्णा पेन्नार और कावेरी पेन्नार नदी जोड़ परियोजनाओं को मूर्त रूप देकर इनके माध्यम से तेलंगाना ,आंध्र प्रदेश ,कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच नदियों के पानी को लेकर होने वाली लड़ाई तथा तनाव को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकेगा । इसके अंतर्गत गोदावरी नदी के अतिरिक्त पानी को दक्षिण भारत की विभिन्न नदियों के माध्यम से कावेरी तक पहुंचाया जाएगा। वित्त मंत्री की उद्घोषणा के अनुसार दक्षिण भारत की इन नदी जोड़ो परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट डीपीआर तैयार कर ली गई है । संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनते ही केंद्रीय सहायता देने का काम भी शुरू हो जाएगा।

      देश में व्याप्त जल समस्या के समाधान हेतु नदी जोड़ो परियोजना का प्रस्ताव एक सार्थक प्रयास है, जिसे उत्तर एवं दक्षिण भारत की अनेकानेक नदियों को परस्पर नहरों के माध्यम से जोड़कर उनमें एक दूसरे का पानी स्थानांतरित कर समय-समय पर देश के समक्ष उपस्थित होने वाली बाढ़ एवं सूखे की समस्या के निदान के रूप में प्रस्तुत किया था। देश में एक साथ ही अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि तथा बाढ़ एवं सूखे की समस्या आए दिन मुंह बाए खड़ी रहती है । एक ही समय में देश का एक हिस्सा अतिवृष्टि से प्रभावित होकर बाढ़ग्रस्त हो जाता है तो वहीं दूसरी ओर देश का दूसरा हिस्सा अनावृष्टि के कारण गंभीर सूखे की चपेट में आ जाता है ।प्रतिवर्ष कहीं न कहीं इस स्थिति का सामना करना पड़ता है जिसके कारण अपार जन धन की हानि होती है,जिसका स्थाई निदान खोज पाना असंभव सा है। नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से इस समस्या का निदान प्राप्त किया जा सकता है। बाढ़ के दिनों में एक नदी का जल नहर के माध्यम से दूसरे नदी में पहुंचा कर बाढ़ की समस्या का समाधान खोजा जा सकता है । बाढ़ का पानी जो बहकर समुद्र में जाकर व्यर्थ हो जाता है, उसको समुद्र में जाने से रोककर उसका सदुपयोग किया जा सकता है ।इस अतिरिक्त पानी को नहरों के माध्यम से एक नदी से दूसरी नदी में पहुंचा कर जहां एक और बाढ़ की समस्या से बचा जा सकता है वहीं दूसरी ओर सूखे की स्थिति में संबंधित क्षेत्र को जल पहुंचा कर वहां सूखे का समाधान प्राप्त करते हुए जल को राष्ट्र के विकास में नियोजित किया जा सकता है।

वस्तुतः केन बेतवा लिंक परियोजना माननीय अटल बिहारी वाजपेई की राष्ट्र को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना की भांति समूचे राष्ट्र को   जल तथा बाढ़ की समस्याओं से  निजात दिलाने के लिए देश की 37प्रमुख नदियों को एक दूसरे से जोड़ने की महत्वपूर्ण परियोजनाओं मैं से एक थी, जिनमें से मध्य प्रदेश के अंतर्गत नर्मदा तथा क्षिप्रा को जोड़ने की योजना मध्य प्रदेश राज्य से ही संबंधित होने के कारण समय से मूर्त रूप ले चुकी है ,जिसके परिणाम स्वरूप गर्मी में सूख जाने वाली क्षिप्रा में अब गर्मी में भी पर्याप्त पानी बना रहता है तथा उज्जैन को अपेक्षा अनुसार जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होती रहती है। इन्हीं योजनाओं में केन बेतवा  परियोजना भी थी जो समय के भंवर में फंसकर  अनेक कारणों से अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी थी किंतु अब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं प्रधानमंत्री की सदिच्छा से यह योजना मूर्त रूप लेने जा रही है, जिससे इन दोनों राज्यों का चतुर्दिक विकास होने के साथ-साथ राष्ट्र की विकास की गति में भी इस गईका योगदान बढ़ेगा, तथा बुंदेलखंड की प्यासी धरती सदियों से चली आ रही अपनी प्यास को बुझा कर राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देगी।

इस परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश की बेतवा और केन नदी को आपस में जोड़ा जाना है। केन नदी जबलपुर के पास कैमूर की पहाड़ियों से निकलकर 427 किलोमीटर उत्तर की ओर चलकर उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना नदी में मिलती है ।इसी प्रकार बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलकर 576 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में यमुना में मिलती है। 6000 करोड़ की इस परियोजना का मुख्य बांध पन्ना टाइगर रिजर्व के दौधन गांव में बनना है , 77 मीटर ऊंचा तथा 19633 वर्ग किलोमीटर जलग्रहण क्षमता वाले इस मुख्य बांध में 2853 एम सी एम पानी भंडारण की क्षमता होगी।

2613.19 करोड़ की लागत से बनने वाले इस बांध में दो बिजलीघर बनेंगे, जिससे 78 मेगा वाट बिजली मध्य प्रदेश को प्राप्त होगी । 341.55 करोड की लागत से इन बिजली घरों का निर्माण होगा। बांध से 2708. 36 करोड़ की लागत से नहरे बनाई जाएंगी । 218 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर उत्तर प्रदेश के बरुआसागर में जाकर मिलेगी ।इस नहर से 10 74 एम सी एम पानी प्रतिवर्ष भेजा जाएगा, जिसमें से 659 एम सी एम पानी बेतवा नदी में पहुंचेगा। दौधन बांध के अतिरिक्त तीन अन्य बांध भी मध्य प्रदेश में  में बेतवा नदी पर बनाए जाएंगे। रायसेन तथा विदिशा जिले में बनने वाले मकोडिया बांध से 56850 एकड़ क्षेत्र में ,बरारी बैराज से 2500 तथा केसरी बैराज से 2880 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। लिंक नहर से मार्गो में 60294 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा ,इससे मध्य प्रदेश के 46599 व उत्तर प्रदेश के 13695 हे . क्षेत्र में सिंचाई होगी । दौधन बांध से छतरपुर और पन्ना जिले की 3.23 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इस परियोजना को मूर्त रूप देने में म कुल 35111 करोड रुपए व्यय होंगे , जिसमें से 90% धनराशि केंद्र सरकार वहन करेगी ,शेष धनराशि की 5- 5% राशि राज्य सरकारें वहन करेंगी । 

आज सूखे के प्रकोप से पीड़ित तथा बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की भूमि को केन बेतवा लिंक परियोजना की लंबे समय से प्रतीक्षा थी, जो अब मूर्त रूप लेने जा रही है लेने जा रही है। बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के 9 जिले आते हैं, जिन्हें इस परियोजना के मूर्त रूप लेने की लंबे समय से प्रतीक्षा थी , जो अब मूर्त रूप लेने जा रही है।योजना के मूर्त रूप लेने से हमीरपुर स्थित मौदहा बांध को लिंक नहर से जोड़कर भरा जाएगा। इससे दोनों राज्यों को लाभ मिलेगा । उत्तर प्रदेश के महोबा झांसी ललितपुर एवं हमीरपुर के 21लाख लोगों को 67 मिलीयन क्यूबिक मीटर जल मिलेगा ।इसके साथ ही बांदा झांसी महोबा ललितपुर एवं हमीरपुर के 2.51  लाख हेक्टेयर  क्षेत्र में फसलों की सिंचाई की जा सकेगी ।हमीरपुर में मौदहा बांध को भरकर हमीरपुर में 26900 हेक्टेयर की सिंचाई व्यवस्था और तहसील राठ में पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा  । जनपद महोबा में  लगभग 37564 हेक्टेयर ललितपुर में 3533 हेक्टेयर झांसी में लगभग 17488 हेक्टेयर और बांदा में लगभग 192479 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का लाभ प्राप्त होगा। जनपद झांसी में लगभग 14.66 मिलियन क्यूबिक मीटर ललितपुर में 31.8 क्यूबिक मीटर,हमीरपुर में 2.79 मिलियन क्यूबिक मीटर और महोबा में लगभग 20.13मिलियन क्यूबिक मीटर जल पेयजल के रूप में उपलब्ध कराया जा सकेगा।परियोजना के अंतर्गत बरियारपुर पिकअप  बीयर के डाउनस्ट्रीम में दो नए वैराजों का निर्माण कर लगभग 188 क्यूबिक मीटर जल भंडारण किया जा सकेगा । केन बेतवा लिंक नहर पर उत्तर प्रदेश की आवश्यकता के अनुसार आउटलेट प्रदान करते हुए महोबा हमीरपुर  झांसी जिलों में अनेक वर्षों से पानी उपलब्ध न होने के कारण सूखे पड़े अनेक बांधों को बरसात में जल उपलब्ध कराकर भरा जाएगा।मध्यप्रदेश में छतरपुर टीकमगढ़ पन्ना जिले में किसान धान गेहूं की खेती कर सकेंगे ,जो अब तक सिंचाई के साधनों के अभाव में नहीं कर पाते थे, वर्षा जल के सहारे बोई गई फसल प्रायः सूख जाती थी ,।अब पर्याप्त मात्रा में सिंचाई हेतु जल उपलब्ध हो जाने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के न केवल  किसान खुशहाल होंगे अपितु वहां के खेतों में फसलें लहलहाएंगी ।दोनों राज्यों में 12लाख हेक्टेयर  भूमि में वर्ष में 2-3 फसलें उगाई जा सकेंगी ,पीने का पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा जिससे क्षेत्र का चतुर्दिक विकास होगा। इस परियोजना से  प्रत्यक्ष रूप से मध्य प्रदेश के  पन्ना टीकमगढ़ छतरपुर सागर दमोह दतिया विदिशा शिवपुरी और रायसेन जिले तथा उत्तर प्रदेश  के बांदा महोबा झांसी और ललितपुर जिलो को इसका लाभ मिलेगा ।इसके अतिरिक्त अप्रत्यक्ष रूप से अन्य कई जिले इस परियोजना से लाभान्वित होंगे।

यह परियोजना वर्ष 2005 में ही स्वीकृत की गई थी, जब उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 547 मिलीयन क्यूबिक मीटर एमसीएम और खरीफ फसल के लिए 1153 एमसीएम पानी देना तय हुआ था किंतु दोनों राज्यों के मध्य उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए यह पानी  देने को लेकर विवाद था। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश ने रबी फसल के लिए 700 एमसीएम पानी की मांग रखी जो बाद में 788 एमसीएम तक पहुंच गई और तुरंत बाद यह मांग जुलाई 2019 में  930 एमसीएम पानी  उपलब्ध कराने तक पहुंच गई और उसकी उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु उत्तर प्रदेश द्वारा इस आशय का मांग पत्र भेज दिया गया।  मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश को इतना पानी देने के लिए तैयार नहीं था जिससे दोनों राज्यों के मध्य पानी बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था और योजना को मूर्त रूप देना सम्भव नहीं हो सका था। दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के मध्य हुए समझौते के बाद इस परियोजना को मूर्त रूप देना संभव हो सका है।परियोजना के महत्व का प्रतिपादन करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा  है कि यह परियोजना बुंदेलखंड का भाग्य बदलेगी।इस परियोजना ने बुंदेलखंड की भाग्य रेखा को नया रंग रूप दिया है। परियोजना से लाखों लोगों को पानी तो मिलेगा ही, बिजली भी मिलेगी प्यास भी बुझेगी और प्रगति भी होगी।

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