कर्नाटक में मुख्यमंत्री-रैत विद्या निधि योजना का सीएम व केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा शुभारंभ

 दलहन- तिलहन, आर्गेनिक व नारियल की खेती 

बढ़ाने के लिए मिशन मोड पर काम- श्री तोमर

छात्रवृत्ति खर्च नहीं बल्कि किसानों के लिए निवेश है, जिसका रिटर्न देश को मिलेगा- श्री बोम्मई 

बेंगलुरू:


कर्नाटक सरकार की मुख्यमंत्री-रैत विद्या निधि योजना का शुभारंभ रविवार को मुख्यमंत्री श्री बसवराज बोम्मई और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस योजना के तहत किसानों के बच्चों को छात्रवृत्ति देना प्रारंभ किया गया है। श्री तोमर ने विद्यार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की राशि सीधे हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की, वहीं मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने प्रतीकात्मक रूप से कुछ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरित की। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि देश में आर्गेनिक खेती व नारियल की खेती को बढ़ावा देने के साथ ही दलहन व तिलहन के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र सरकार मिशन मोड पर तेजी से काम कर रही है। पाम आयल की खेती बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में 11 हजार करोड़ रूपए का मिशन प्रारंभ किया है। 

श्री तोमर ने कहा कि हमारे किसानों ने घनघोर परिश्रम किया है, जिसके कारण खाद्यान्न से आज हम अपने देश का पेट तो भर ही रहे हैं, दुनिया की आवश्यकता की पूर्ति भी कर रहे है, लेकिन अब देश में खेती का रकबा व इसमें काम करने वाले लोग कम नहीं होना चाहिए। श्री तोमर बोले- पं. दीनदयाल उपाध्याय कहा करते थे- हर हाथ को काम, हर खेत को पानी। श्री लाल बहादुर शास्त्री ने कहा- जय जवान, जय किसान। श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसमें जय विज्ञान को भी जोड़ा और अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के रहते ये तीनों तो है ही, उन्होंने सबका साथ- सबका विकास, सबका विश्वास भी इसमें जोड़ा है। इस मंत्र के साथ देश आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है, इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं, जिससे हम अगले वर्ष तक यह लक्ष्य प्राप्त करने में जरूर सफल होंगे। 

श्री तोमर ने कहा कि छोटे किसानों की ताकत बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री जी ने 6,850 करोड़ रू. की लागत से 10 हजार नए एफपीओ बनाने की योजना चलाई है। पीएम किसान योजना के अंतर्गत अब तक 11.37 करोड़ किसानों को 1.58 लाख करोड़ रू. उनके बैंक खातों में दिए जा चुके हैं। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से किसानों को साहूकारी पर निर्भरता कम करने के लिए सालभर में 16 लाख करोड़ रूपए देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अभी 14 लाख करोड़ रू. की तरलता किसानों के बीच 3 प्रतिशत ब्याज की सब्सिडी के साथ हो रही है। फसल उपरांत नुकसान रोकने व गैप्स को भरते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र में डेढ़ लाख करोड़ रूपए से ज्यादा के फंड का प्रावधान प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत किया है, जिसमें से एक लाख करोड़ रू. कृषि इंफ्रा फंड के रूप में दिए है। 

श्री तोमर ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि कर्नाटक ने कृषि क्षेत्र में काफी प्रगति की है। आर्गेनिक खेती में कर्नाटक अग्रणी है। विज्ञान व तकनीक, कृषि उत्पादकता केंद्र, कृषि संजीवनी योजना हर दृष्टि से कर्नाटक राज्य देश में आगे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री-रैत विद्या निधि योजना भी कर्नाटक को देशभर से अलग बनाती है, जिसका अनुकरण अन्य राज्यों को करना चाहिए। श्री तोमर ने कहा कि एक समय था जब कहा जाता था कि खेती वहीं कर सकता है, जिसके पास पानी है लेकिन आज जिसके पास ज्ञान-विज्ञान है, वह खेती में सफल होता है। कृषि को विज्ञान व तकनीक से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री श्री बोम्मई के नेतृत्व में अच्छा काम हो रहा है। भारत सरकार भी डिजीटल एग्रीकल्चर प्लेटफार्म पर काम कर रही है। 6 व 7 सितंबर को मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की बैठक होगी, जिसमें कर्नाटक के बेहतर डिजीटल माडल पर भी चर्चा की जाएगी, ताकि पूरा देश इसे अपनाएं। जीडीपी में कृषि का योगदान और बढ़े, किसान महंगी फसलों को अपनाएं, इस मनोयोग के साथ काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी देश का सतत विकास सुनिश्चित कर रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं को कर्नाटक में समय-सीमा में लागू किया जा रहा है तथा योजनाओं के उद्देश्यों को हासिल किया जा रहा है। श्री बोम्मई ने कहा कि किसानों के बच्चों के लिए प्रारंभ की गई छात्रवृत्ति योजना के कोष को एक व्यय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, वास्तव में यह एक निवेश है जो हम किसानों के लिए कर रहे हैं और इसका रिटर्न न केवल कर्नाटक को बल्कि पूरे देश में वापस मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि एक राजनेता की निगाहें अगले चुनाव पर होती है जबकि एक दूरदर्शी व्यक्ति अगली पीढ़ी की तलाश करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के बच्चे बुद्धिमान हैं पर उच्च शिक्षा के लिए उन्हें सरलता से अवसर नहीं मिलते हैं, क्योंकि कॉलेज गांवों से दूर हैं, उन्हें बस से कॉलेजों तक जाना पड़ता है, ऐसे में छात्रवृत्ति की राशि से उन्हें कॉलेज तक पहुंचने में मदद मिलेगी। श्री बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का किसानों की आय दोगुनी करने का विचार उत्तम है। किसानों के समग्र जीवन के लिए श्री मोदी जी की चिंता जाहिर है, उनके जैसी दूरदृष्टि किसी अन्य नेता के पास नहीं है। 

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे, कर्नाटक के कृषि मंत्री श्री बी.सी. पाटिल, पशुपालन मंत्री श्री प्रभु बी. चौहान, उद्यानिकी-योजना एवं सांख्यिकी मंत्री श्री एन. मुनिरत्ना, शिक्षा मंत्री श्री बी.सी. नागेश, सांसद डा. उमेश जी. जाधव, श्री मुनि स्वामी, आर्गेनिक बोर्ड के अध्यक्ष श्री आनंद आदि ने भी संबोधित किया। 

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के इलाज में कारगर है ‘आयुष-64’

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: भारतीय विज्ञान की प्रगति का उत्सव

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हुआ " श्रीमती माधुरी सक्सेना कंप्यूटर शिक्षण केंद्र" का उद्घाटन