एआईसीटीई ने हरियाणा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डीसीआरयूएसटी से हाथ मिलाया

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा की धरती पर एआईसीटीई का स्वागत किया

# खट्टर ने कहा कि एआईसीटीई और डीसीआरयूएसटी के बीच साझेदारी हरियाणा में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देगी

नई दिल्ली : अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने शुक्रवार को सोनीपत के मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। नई साझेदारी के तहत एआईसीटीई और डीसीआरयूएसटी भारत में तकनीकी शिक्षा के स्तर को ऊंचे मुकाम पर ले जाने के लिए मिलकर काम करेंगे। डीसीआरयूएसटी एआईसीटीई को दो एकड़ क्षेत्र में जमीन प्रदान करेगा। इस जमीन पर एआईसीटीई ट्रेनिंग एंड लर्निंग (अटल) एकेडमी की बिल्डिंग बनाएगा। एआईसीटीई मुरथल स्थित अटल एकेडमी में मॉडल आइडिया लैब के रूप में एक आइडिया लैब भी स्थापित की जाएगी।

एआईसीटीई ने देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई गुणवत्तापूर्ण पहल की है, जिसमें देश भर के कॉलेजों में शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके को आधुनिक बनाने और उसमें सुधार करने पर खास फोकस शामिल है। ट्रेनिंग एंड लर्निंग (अटल) एकेडमी इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए एआईसीटीई की ओर से की गई एक पहल है। इसके तहत महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्रों में फैकल्टी शिक्षण को अपग्रेड करने के लिए अलग-अलग फैकल्टी डिवेपलमेंट प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं। अटल एकडेमी और एआईसीटीई ने इसकी प्रेरणा अपने प्रिय प्रधानमंत्री  अटल बिहारी वाजपेयी से ली है।

पिछले वर्ष, "वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड, लंदन"  पुस्तक में अटल एकेडमी का नाम शामिल किया गया था। अटल एकेडमी ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और 948 ऑनलाइन एफडीपी का सफलत पूर्वक संचालन किया, जिसमें 1.65 लाख से ज्यादा भागीदार शामिल हुए। इसमें फैकल्टी मेंबर्स, सीबीएसई टीचर, उद्योगपति संकाय सदस्यों, सीबीएसई शिक्षकों से लेकर उद्योग के व्यक्तियों, रिसर्च स्कॉलर और पोस्ट ग्रेजुएट के छात्रों को लाभ पहुंचा। अटल एकेडमी के माध्यम से प्रतिष्ठित संस्थानों (आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी, एनआईटी, आईआईएससी, आईएसआई, जेएनयू, बीएआरसी, डीआरडीओ आदि) और गैर-शैक्षिक संस्थानों (निजी कंपनियों या शोध संस्थानों) के लगभग 2000 विशेषज्ञ देश की सेवा कर रहे हैं। ये विशेषज्ञ राष्ट्रीय (28 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों के दूरदराज के इलाकों का भी प्रतिनिधित्व कर रहे हैं), और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी हैं। चूंकि कोरोना महामारी के कारण ऑनलाइन पढ़ाना और सिखाना एक नई सामान्य स्थिति बन गई है, अटल एकेडमी ने ऑनलाइन तरीके से फैकल्टी डिवेलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करने की तैयारी कर ली है। एआईसीटीई ने महत्वपूर्ण और उभरते हुए क्षेत्रों में 1345 से अधिक ऑनलाइन एफडीपी आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसका लक्ष्य 2 लाख प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करना है। यह 21वीं सदी की जरूरत के अनुसार फैकल्टी मेंबर्स को अपने विषय की नवीनतम जानकारी हासिल करने की सुविधा प्रदान करेगा।

निर्माण के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, एक आइडिया लैब भी स्थापित की जाएगी जिसमें अत्याधुनिक उपकरण और नवाचार करने की सुविधाएं होंगी। डीसीआरयूएसटी बाद में अपने खुद के संसाधनों से आइडिया लैब का आत्मनिर्भर मॉडल संचालन करेगा। एआईसीटीई-आइडिया (आइडिया डिवलपमेंट, इवैल्यूएशन एंड एप्लिकेशन) लैब्स पूरे देश में स्थापित की जा रही हैं, ताकि छात्रों को साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (एसटीईएम) के बुनियादी सिद्धांतों को अमल में लाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, जिससे उन्हें इसका व्यावाहरिक अनुभव मिल सकें। वह नई-नई बातें सीख सकें और प्रॉडक्ट का विजुअलाइजेशन भी कर सकें। डीसीआरयूएसटी विश्वविद्यालय के संचालन के लिए जरूरी स्टाफ की नियुक्ति करेगा। सभी विभागों को चलाने के लिए जरूरी फंड अलॉट करेगा। नई साझेदारी के तहत एआईसीटीई अटल एकेडमी शिक्षकों के ट्रेनिंग और लर्निंग प्रोग्राम के लिए उचित धन मुहैया कराएगा। इसके अलावा एआईसीटीई शुरुआती पांच वर्षों के लिए मेंटेनेंस चार्ज भी प्रदान करेगा। 

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा, “हरियाणा इस तथ्य को जानकर काफी खुश है कि भारत में तकनीकी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के क्षेत्र में केंद्र सरकार की सर्वोच्च नियामक संस्था, एआईसीटीई डीसीआरयूएसटी से साझेदारी कर रही है। मुझे आशा ही नहीं, बल्कि विश्वास है कि इस साझेदारी से राज्य में तकनीकी शिक्षा के विकास को बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में यह पहल  पूरे राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आएगी। में हरियाणा की धरती पर एआईसीटीई का पूरा गर्मजोशी से स्वागत करता हूं। उन्होंने एमओयू के लिए एआईसीटीई और डीसीआरयूएसटी को बधाई दी। “ 

डीसीआरयूएसटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. राजेंद्रकुमार अनायथ ने कहा, “यह मेरे लिए गर्व और बहुत ज्यादा खुशी की बात है कि किस्मत ने मुझे हरियाणा राज्य में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों और छात्रों के आत्मसशक्तिकरण के लिए आईडिया लैब एवं अटल अकादमी की नई पहल करने का अवसर प्रदान किया। यह महत्वपूर्ण है कि राज्य से तकनीकी मानव संसाधन उद्योग 4.0 के लिए पूरी तरह से तैयार हो ।“

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा, “एआईसीटीई की डीसीआरयूएसटी के साथ साझेदारी हरियाणा में प्रतिभाशाली छात्रों को और योग्य बनाएगी और उन्हें तकनीकी कौशल से लैस करेगी। मुझे यकीन है कि इस पार्टनरशिप से राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। हमारे उच्च शिक्षा संस्थाओं में युवा और प्रतिभाशाली छात्रों के टैलेंट को और निखारने तथा आवश्यक कौशल से लैस करने की क्षमता है, जो योग्यता के लिहाज से इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले छात्रों की प्रतिभा और गुणवत्ता के बराबर हों आईडिया लैब युवाओं को सामाजिक समस्या के समाधान के लिए विचारों पर प्रयोग करने के लिए प्रेरित करेगी। ।“

एआईसीटीई के उपाध्यक्ष डॉ. एम. पी. पूनिया ने कहा, "एआईसीटीई को  डीसीआरयूएसटी के साथ साझेदारी करने की काफी खुशी है। मुझे उम्मीद है कि आइडिया लैब छात्रों के कौशल को और उभारने के अवसर प्रदान करेगी। इससे राज्य के प्रतिभाशाली छात्र पूरे टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपने नवीन प्रयोगों से क्रांति ला सकेंगे। हरियाणा में बन रही सुविधाओं से भारत के उत्तरी क्षेत्र में विकास गतिविधियों में भी मदद मिलेगी। “

एआईसीटीई के सदस्य सचिव, प्रोफेसर राजीव कुमार ने बताया कि एआईसीटीई की डीसीआरयूएसटी के साथ साझेदारी राज्य के शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। राजीव कुमार के अनुसार तकनीकी शिक्षा संस्थानों को एक निश्चित आकार देने में एआईसीटीई का इतिहास गौरवशाली रहा है और यही जादू डीसीआरयूएसटी के साथ दोहराया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि आईडिया लैब उद्योग के सहयोग से उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करेगी

राई के विधायक  मोहनलाल बडोली ने कहा, "हरियाणा इस बात से काफी खुश है कि एआईसीटीई डीसीआरयूएसटी के साथ साझेदारी कर रहा है और यह प्रदेश के तकनीकी शिक्षा संस्थानों और छात्रों के लिए एक मील की पत्थर की तरह है। मैं एआईसीटीई का हरियाणा की धरती पर तहे दिल से स्वागत करता हूं।“

एआईसीटीई के निदेशक डॉ. रवींद्र सोनी ने धन्यवाद अभिभाषण दिया।

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