रिंकू शर्मा की मोब लिंचिंग में हत्या पर खामोशी क्यो?

  राम का नाम लेने की सजा सिर्फ मौत मिल रही है 


 विष्णु गुप्त 

देश की राजधानी  दिल्ली जहां पर  प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति बैठते हैं, देश की अग्रणी मीडिया, विदेशी मीडिया बैठती है, थोक में मानवाधिकार कार्यकर्ता बैठते हैं, जहां पर हाई कोर्ट है, सुप्रीम कोर्ट है वहां पर बर्बर मोब लिंचिंग हुई और कही शोर तक नहीं ,हर दंडात्मक नियामक खामोश रहा, मीडिया भी खामोश, राजनीतिक पार्टियां भी खामोश, हिन्दू संगठन भी खामोश। यानी प्रतिकार शून्य। आखिर ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मोब लिंचिंग में मरने वाला हिन्दू था, वह मुस्लिम होता तभी मोब लिंचिंग मानी जाती। आखिर  इन मुस्लिम बर्बर मानसिकता पर रोक कैसे लगेगी?

..........  मोब लिंचिंग में मारे जाने वाला युवक रिंकू शर्मा था जो एक अस्पताल में टेक्निशन था। दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में रहता था। वह बजरंग दल से जुड़ा हुआ था। अपने इलाके में वह रामजन्म भूमि निर्माण रैली में शामिल हुए था। मंगोलपुरी और आसपास के इलाकों में मुस्लिम आबादी की दहशत होती है, मुस्लिम आबादी की दशशत में हिन्दू जीने के लिए अभिशप्त हैं। रिंकू शर्मा का अपराध सिर्फ राम मन्दिर निर्माण रैली में भाग लेना और राम का नाम लेना था। जिसकी सजा  उसे मौत के रूप में मिली है।

........ मंगोलपुरी की बर्बर मुस्लिम आबादी  को रिंकू शर्मा का अपने धर्म के प्रति समर्पण बर्दाश्त नहीं हुआ। एक साजिश हुई, साजिश की कड़ी मस्जिद से लेकर मुस्लिम संगठनो तक जुड़ी हुई है। भीड़ जुटाई गई। करीब 30  मुस्लिम की बर्बर भीड़ लाठी, डंडे और छुरी, तलवार लेकर रिंकू शर्मा के घर पर हमला कर देती है, रिंकू शर्मा के भाई, पिता किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब हो जाते है। घर से खींच कर सरेआम बाहर निकाल कर सड़क पर छुरी मारकर रिंकू शर्मा की हत्या कर दी जाती है। मुस्लिमो की बर्बर भीड़ धमकी देना नहीं भूलती। मुस्लिमो की बर्बर भीड़ की धमकी थी कि जो राम का नाम लेगा उसका यही हाल होगा।

....... पुलिस खानापूर्ति पर उतर आई है। दो चार लोगो को गिरफ्तार कर रफा दफा कर दी। साजिश मस्जिद से लेकर मुस्लिम संगठनो तक जुड़ी थी। कई जिहादी संगठन भी सक्रिय है। निष्पक्ष, ईमानदार पुलिस जांच होती तो फिर बड़े जिहादी और जिहादी मानसिकता के मुस्लिम संगठन की गर्दन नपती।  पुलिस आज मुस्लिमो  के खिलाफ कार्रवाई से डरती है क्योंकि फिर मुस्लिम परस्त राजनीति मुस्लिम उत्पीड़न का आरोप मढ़ देती हैं।

........  इधर देश भर में कई ऐसी घटनाएं घटी है जिसमें राम के नाम लेने पर मुस्लिम आबादी ने अपराध का सहारा लिया है। राम मन्दिर निर्माण रैली निकालने वाले और चन्दा राशि एकत्रित करने वाले राम भक्तो पर  मुस्लिम हिंसा हुई है, सरेआम हिंसा का शिकार बनाया गया, गोलियां मारी गई। राजस्थान में भी  एक राम भक्त को इसी तरह गोली मारी गई है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी इस तरह की घटना सामने आई है।

........ देश में मोब लिंचिंग की अवधारणा बहुत ही विचित्र और एकतरफा है, जिहादी है, मुस्लिम परस्त है और इसके केंद्र में  राजनीति से लेकर मीडिया तक है। मोब लिंचिंग तभी जाएगी जब मरने वाला मुस्लिम होगा। अगर मारने वाला हिन्दू होगा तो फिर मोब लींचिंग नहीं मानी जाएगी। पश्चिम बंगाल सहित पूरे देश भर में दर्जनों हिन्दुओं की मोब लिनचिग हुई है पर कोई शोर नहीं, कोई आलोचना नहीं, कोई स्पेशल कोर्ट नहीं बनाई गई। कोई मुआवजा नहीं। 

......अगर  निर्दोष हिन्दू जगह कोई मुस्लिम अपराधी भी अपराध करते समय भीड़ द्वारा मारा  गया तो फिर उसके लिए स्पेशल कोर्ट बैठी, सरकार से सरकारी नौकरी और धन मिला, मुस्लिम संगठन धन की बारिश करना नहीं भूलते हैं, देश ही नहीं बल्कि विदेशी मुसलमान और विदेशी मुस्लिम संगठन भी धन की बारिश करते है। रिंकू शर्मा सहित कई हिन्दू मुस्लिम हिंसा के शिकार हुए है पर सरकारी राहत और सहायता नहीं मिली। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को मुस्लिम अपराधियों और बलात्कारियों को भी राहत और सहायता देने में शर्म महसूस नहीं होती पर मोब लींचिग के शिकार हिन्दुओं की सहायता करना दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार को स्वीकार नहीं है। यही मानसिकता अन्य सभी सरकारों की है।

.......  यह दुर्भाग्य है कि हिन्दू अपने देश में ही गाजर मुली की तरह काटे जा रहे हैं, उनकी मोब लिंचिंग हो रही है पर उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। प्रश्न अधूरा है। हिन्दुबओं की रक्षा कौन करेगा, उन्हें न्याय कौन दिलाएगा?