किसानों की भलाई हमारे जीवन का मंत्र- प्रधानमंत्री

 पीएम-किसान सम्मान निधि की 7वीं किस्त के 18 हजार करोड़ रू. नौ करोड़ किसानों के खातों में जमा

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सानों के विश्वास पर हम कोई आंच नहीं आने देंगे- प्रधानमंत्री

आज सुशासन की दृष्टि से बहुत बड़ा काम हो रहा है- कृषि मंत्री श्री तोमर

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 7वीं किस्त के 18 हजार करोड़ रू. आज नौ करोड़ किसानों के खातों में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने बटन दबाकर जमा किए। इस देशव्यापी समारोह में श्री मोदी ने कहा कि किसानों की भलाई हमारे जीवन का मंत्र है। किसानों के विश्वास पर हम कोई आंच नहीं आने देंगे। उन्होंने किसान-कल्याण के लिए किए गए सरकार के ऐतिहासिक कदमों को सिलसिलेवार बताते हुए कहा कि आत्मनिर्भर किसान ही आत्मनिर्भर भारत की नींव डाल सकते हैं। श्री मोदी ने कहा कि देशभर के किसानों ने जो खुलकर समर्थन दिया है, यह मेरे लिए अत्यंत संतोष व गर्व की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसान किसी के बहकावे में नहीं आएंगे, किसान आंदोलन के समाधान के लिए हम पूरा मन लेकर चल रहे हैं। कार्यक्रम में स्वागत भाषण में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज सुशासन की दृष्टि से बहुत बड़ा काम हो रहा है। सारा देश व दुनिया इसे देख रही है। न कोई बिचौलिया है, ना ही कोई दलाल है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज किसान को अपना पक्का घर मिल रहा है, शौचालय मिल रहा है, साफ पानी का नल मिल रहा है। यही किसान है, जिसे बिजली-गैस के मुफ्त कनेक्शन से बहुत लाभ हुआ है। कृषि सुधार के जरिए हमने किसानों को बेहतर विकल्प दिए हैं। नए कानूनों के बाद किसान जहां चाहें, जिसे चाहें, सही दाम पर उपज बेच सकते हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर या मंडी में अपनी उपज बेच सकते हैं। अपनी उपज का निर्यात करना चाहते हैं तो  कर सकते हैं, उसे व्यापारी को बेचना चाहते तो  बेच सकते हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज ने भी उनके जीवन की बड़ी चिंता कम की है। हमने एक और लक्ष्य बनाया कि छोटे किसानों के समूह बनें ताकि वो सामूहिक ताकत बनकर काम कर सकें। देश में 10 हजार से ज्यादा एफपीओ बनाने का अभियान चल रहा है, आर्थिक मदद दी जा रही है।

श्री मोदी ने कहा कि हम इस दिशा में भी बढ़े कि फसल बेचने के लिए किसान के पास सिर्फ एक मंडी नहीं बल्कि नए बाजार हो। हमने एक हजार से ज्यादा कृषि मंडियों को ऑनलाइन जोड़ा। इनमें भी एक लाख करोड़ रू. से ज्यादा का कारोबार हो चुका है। हमारी सरकार ने प्रयास किया कि किसान को फसल की उचित कीमत मिले। हमने लंबे समय से लटकी स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दिया। पहले कुछ ही फसलों पर एमएसपी मिलती थी, हमने उनकी संख्या बढ़ाई। हमने लक्ष्य बनाकर काम किया कि देश के किसानों की इनपुट लागत कम हो। सॉयल हेल्थ कार्ड, यूरिया की नीम कोटिंग, लाखों सोलर पंप की योजना, इसीलिए शुरू हुई। सरकार ने प्रयास किया कि किसान के पास एक बेहतर फसल बीमा कवच हो। आज करोड़ों किसानों को पीएम फसल बीमा योजना का लाभ हो रहा है। जब हमने दूसरे सेक्टर में इनवेस्टमेंट और इनोवेशन बढ़ाया तो हमने आय बढ़ाने के साथ ही उस सेक्टर में ब्रांड इंडिया को भी स्थापित किया। अब समय आ गया है कि ब्रांड इंडिया दुनिया के कृषि बाजारों में भी खुद को उतनी ही प्रतिष्ठा के साथ स्थापित करे। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों कई राज्य़ों- असम, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर में पंचायतों के चुनाव हुए। इनमें प्रमुखतः ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने, किसानों ने ही भाग लिया। उन्होंने एक प्रकार से किसानों को गुमराह करने वाले सभी दलों को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि मुझे आज इस बात का अफसोस है कि मेरे पश्चिम बंगाल के 70 लाख से अधिक किसान भाई-बहनों को पीएम-किसान स्कीम का लाभ नहीं मिल पाया है। बंगाल के 23 लाख से अधिक किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार ने वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को इतने लंबे समय से रोक रखा है। श्री मोदी ने कहा कि जो दल पश्चिम बंगाल में किसानों के अहित पर कुछ नहीं बोलते, वो यहां दिल्ली में आकर किसान की बात करते हैं। इन दलों को आजकल एपीएमसी-मंडियों की बहुत याद आ रही है, लेकिन ये दल बार-बार भूल जाते हैं कि केरल में एपीएमसी-मंडियां हैं ही नहीं। केरल में ये लोग कभी आंदोलन नहीं करते। आज जिन राजनीतिक दलों के लोगों को, जब देश की जनता ने नकार दिया है तो कुछ न कुछ ऐसे इवेंट कर रहे हैं, इवेंट मैनेजमेंट हो रहा है ताकि कुछ लोग सेल्फी ले लें, फोटो छप जाएं, टीवी पर दिखाई दें, ताकि उनकी राजनीति चमक जाएं। 

प्रारंभ में, स्वागत भाषण में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अटल जी सुशासन व पारदर्शिता के पक्षधर थे, आज सुशासन की दृष्टि से बहुत बड़ा काम हो रहा है। सारा देश व दुनिया इसे देख रही है। न कोई बिचौलिया है, ना ही कोई दलाल है। एक समय था जब देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री कहा करते थे कि हम 100 रूपए केंद्र से भेजते हैं तो 15 रूपए गांव जाते-जाते बचते हैं, लेकिन आज मोदी जी के नेतृत्व में हम यह दावे के साथ कह सकते हैं कि आज 18 हजार 98 करोड़ रूपए नरेंद्र मोदी जी की सरकार भेजेगी तो पूरा का पूरा पैसा किसानों के खातों में पहुंचेगा। श्री तोमर ने कहा कि वाजपेयी जी के समय भी कृषि को महत्ता दी गई थी और उस स्वप्न को साकार करने के लिए वर्ष 2014 से लगातार मोदी  के नेतृत्व में, गांव-गरीब-किसान की उन्नति के लिए काम किया जा रहा है। हम सब इस अवसर पर किसानों को नमन करना चाहते हैं जो कोविड संकट के समय में भी डटे रहे, किसानों ने फसल की कटाई की, उपार्जन का काम गत वर्ष की तुलना में अधिक किया, ग्रीष्म ऋतु की फसलें-खरीफ की फसलें अधिक बोई गई, बंपर उत्पादन हुआ व कृषि के क्षेत्र में किसानों के परिश्रम ने कोविड की परिस्थिति में अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की। 

श्री तोमर ने कहा कि लगातार इस बात की कोशिश की जा रही है कि कृषि का क्षेत्र व गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत हो। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि की अर्थव्यवस्था को बल देने के लिए लगातार प्रयत्न किए गए हैं। मोदी  के नेतृत्व में एमएसपी को बढ़ाया गया, खरीद को बढ़ाया गया, अधिक पैसा लगाया गया। पहले गेहूं व धान की खरीद हुआ करती थी, दलहन-तिलहन को भी उसमें जोड़ा गया और लगातार यह कोशिश की गई कि किसानों के पास डीबीटी से पैसा पहुंचे। बजट की दृष्टि से भी देंखे तो आज का कृषि बजट वर्ष 2013-14 की तुलना में छह गुना अधिक है, जो मोदी जी की दूरदर्शिता के कारण ही संभव हो सका है। देश में 86 प्रतिशत छोटे किसान है, जिनके उत्थान के लिए काम किया जा रहा है। ये किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित हो, टेक्नालाजी का सपोर्ट इन्हें मिल सकें, इसलिए 10 हजार एफपीओ बनाने का कार्य भी हो रहा है। 

कृषि मंत्री ने कहा- पीएम किसान सम्मान निधि बहुत महत्वाकांक्षी है, जिससे किसानों को बहुत लाभ हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा योजना के आरंभ के समय यह दो हेक्टेयर तक के किसानों के लिए थी, वर्ष 2019 में दोबारा सरकार बनने पर प्रधानमंत्री जी ने इसके दायरे में देश के सभी किसानों को ले लिया है। लगभग साढ़े 11 करोड़ किसान योजना में पंजीकृत हो चुके हैं, 10.59 करोड़ किसानों को 96 हजार करोड़ रू. उनके खातों में पहुंचाए गए हैं। कोविड व लाकडाउन की स्थिति में भी यह पैसा किसानों के पास जाता रहा है। पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी सभी राज्य इस योजना से जुड़ चुके हैं। प. बंगाल के लगभग 70 लाख किसानों को हर साल 4,200 करोड़ रू. मिल सकते है पर राज्य सरकार ने निर्णय नहीं किया है, उनसे अनुरोध है कि वे जल्दी से जल्दी योजना से जुड़े ताकि प. बंगाल के किसानों को स्कीम के इतने बड़े लाभ से वंचित नहीं रहना पड़े।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा हर क्षेत्र में सफलतापूर्वक कदम उठाए गए हैं, सारा देश इनका स्वागत कर रहा है। नए कृषि सुधार कानूनों को लेकर पंजाब सहित कुछ किसानों के मन में भ्रम है, उनसे आग्रह है कि आंदोलन को त्यागकर सरकार ने जो वार्ता का निमंत्रण दिया है, वे आएं। मुझे आशा है कि ये किसान इन कानूनों को समझेंगे, नए कानूनों के महत्व को समझेंगे और हम समाधान की ओर अग्रसर होंगे।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न स्थानों से रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह, गृह मंत्री  अमित शाह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गड़करी सहित अन्य केंद्रीय मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री व मंत्री, सांसद-विधायक, पंच-सरपंच व अन्य जनप्रतिनिधि तथा करोड़ों किसान कार्यक्रम से वर्चुअल जुड़े हुए थे। कार्यक्रम में देश के हर विकासखंड व हर पंचायत से किसान व अन्य लोग शामिल हुए। 8 करोड़ से ज्यादा किसानों ने कार्यक्रम से जुड़ने के लिए बकायदा रजिस्ट्रेशन भी कराया था। दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्रालय में कृषि राज्य मंत्री  परषोत्तम रूपाला व  कैलाश चौधरी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री जी ने अरूणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश के किसानों से सीधा संवाद भी किया।


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