किसान संगठनों के साथ बैठक सकारात्मक रही, अगले दौर की वार्ता 3 दिसंबर को

 


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ठक में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, श्री पीयूष गोयल एवं श्री सोम प्रकाश

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री सोम प्रकाश ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 1 दिसंबर 2020 को पंजाब-हरियाणा के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। केंद्रीय मंत्रियों ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए लाए गए अधिनियमों के लाभ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को समझाएं। साथ ही नए अधिनियमों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। यह बातचीत काफी सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई।

बैठक में मंत्री श्री तोमर ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया और इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। श्री तोमर ने कहा कि भारत सरकार के लिए कृषि-विकास हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहा है। विचार-विमर्श के दौरान, कृषि और किसान कल्याण मंत्री ने किसानों के मुद्दों पर आगे चर्चा के लिए एक छोटी विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि आपसी सहमति से उन्हें हल किया जा सके, पर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि सभी प्रतिनिधि आगे की चर्चा के दौर में भाग लेंगे और सरकार के साथ इस मामले को सुलझाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।

बातचीत के दौरान, अधिनियमों से संबंधित विशिष्ट मुद्दों की पहचान करने और सरकार के साथ इन्हें 2 दिसंबर तक साझा करने के लिए, सरकार की ओर से किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को सुझाव दिया गया है। इन मुद्दों पर 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजे होने वाली चौथे दौर की बैठक के दौरान आगे की चर्चा की जाएगी।

मंत्रियों ने यह आश्वासन भी दिया कि भारत सरकार हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसानों के कल्याण के लिए चर्चा करने हेतु सदैव तैयार है।

कृषि भवन में बैठक- विज्ञान भवन की बैठक के बाद, भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि श्री राकेश टिकैत के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर, श्री पीयूष गोयल एवं श्री सोम प्रकाश से कृषि भवन में मिले। यह बैठक भी बहुत ही अच्छे माहौल में हुई जिसमें बहुत सार्थक, सारगर्भित व उपलब्धिपूर्ण चर्चा रही। इन प्रतिनिधियों से भी अगले दौर की चर्चा होगी, जिसके पहले 2 दिसंबर तक लिखित में सुझाव मांगे गए हैं।