सरकार बैंक कर्मचारियों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं की जाँच करवाये:यूनियन

एक सप्ताह में ही एक बैंक के दो बैंक कर्मचारियों द्वारा आत्म हत्या 


नई दिल्ली : एक सप्ताह में एक बैंक के ही दो बैंक कर्मचारियों द्वारा आत्महत्या पहले सिंडिकेट बैंक के एक डी.जी.एम. श्री शंकर कोटियन ने बेंगलुरु में आत्महत्या कर ली। कोटियन भोपाल में ट्रांसफर हुए थे और परिवार को लेने के लिये बेंगलुरु गए थे। 59 वर्ष के कोटियन एक गॉड फियरिंग व्यक्ति थे। बैंक की संवेदनहीनता के चलते रिटायरमेंट के 10 महीने पहले उनको भोपाल ट्रांसफर किया गया था। दूसरा मामला केनरा बैंक के एक चपरासी द्वारा भिलाई में आत्महत्या का है। बैंक कर्मचारियों द्वारा आत्महत्याओं का सिलसला कब रुकेगा ? बैंकिंग इंडस्ट्री में पिछले चार वर्षों में 100 से ज्यादा बैंकर्स ने आत्महत्या की है। बैंकिंग इंडस्ट्री के लिए इस तरह आत्म्हात्याओं का बढना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार बैंक कर्मचारियों द्वारा आत्महत्याओं की जाँच करवाये।


आजकल बैंकों में काम के दबाव के कारण कर्मचारियों द्वारा आत्महत्याओं की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। आये दिन किसी न किसी बैंक के कर्मचारी द्वारा आत्महत्या की खबर आ जाती है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ज्यादातर आत्महत्या करने वाले युवा बैंकर्स हैं आत्महत्या के कई कारण हो सकते हैं जैसे परिवारिक या बैंक से सम्बन्धित। बैंक से सम्बंधित कारणों में काम का दबाव, उच्च प्रबंधन द्वारा उत्पीडन, उच्च प्रबंधन द्वारा गलत लोन को देने के लिए दबाव, थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स के टारगेट का दबाव और किसी गलत लोन देने के बाद रिकवरी न होना हो सकते हैं। कुछ कर्मचारी अधिकारी इन सब कारणों में भी दबाव में नहीं आते लेकिन कुछ संवेदनशील कर्मचारी अधिकारी इन परिस्थितियों का सामना नहीं कर सकते और आत्महत्या कर लेते हैं। 


जिस संस्था में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच अच्छा तालमेल होता है वो संस्था ज्यादा प्रगति करती है।  बैंकों में आज एच आर विंग ( मानव संसाधन विंग) तो हैं लेकिन ह्यूमन रिलेशन और मानवता जैसी कोई चीज नहीं है। बैंकों की प्रगति के लिये यह अच्छा नहीं है।


आज इस वातावरण से निबटने के लिये बैंक प्रबंधन, बैंक यूनियनस और कर्मचारियों, अधिकारियों को सोचना होगा ।  बैंक प्रबंधन कर्मचारियों, अधिकारियों को सिर्फ कर्मचारी, अधिकारी न समझें। अधिकारी कर्मचारी ह्यूमन कैपिटल हैं। यूनियंस को  भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए काम करने की जरूरत है। सरकार को भी इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। बैंकों में काम के लिए दबावमुक्त वातावरण बनाने तथा एक कमेटी बनाकर इन कारणों को जानने की जरूरत है ।