चालू खरीफ सीजन-2020 के दौरान रिकॉर्ड बुवाई, देश में 1082.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर

2019 की तुलना में 13 लाख हेक्टेयर अधिक, अभी बुवाई जारी


केंद्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने किसानों को दिया श्रेय


किसानों की उन्नति ही सरकार का लक्ष्य- श्री तोमर


नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन-2020 के दौरान देश में रिकॉर्ड बुवाई हुई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसका श्रेय किसानों को देते हुए कहा कि किसानों की उन्नति ही सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए तमाम योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए गए हैं। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सरकार कोई कसर बाकी नहीं रखेगी।


केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने बताया कि वर्तमान खरीफ मौसम 2020 में, रिकॉर्ड 1082.22 लाख हेक्टेयर (28 अगस्त 2020 तक) क्षेत्र को कवर किया गया है जो 2019 की तुलना में 13 लाख हेक्टेयर अधिक है। खरीफ 2019 के दौरान कुल कवरेज 1069.5 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछला रिकॉर्ड कवरेज खरीफ 2016 के दौरान 1075.71 लाख हेक्टेयर था। चावल की बुवाई कुछ राज्यों में अभी भी जारी है, जबकि दलहन, मोटे अनाज, बाजरा और तिलहन की बुवाई खत्म हो गई है। 


श्री तोमर ने कहा कि हम आश्वस्त हैं कि 2020-21 के दौरान कुल खाद्यान्न उत्पादन का आंकड़ा 298.32 मिलियन टन पार कर जाएगा। इसमें खरीफ मौसम से प्राप्त किया जाने वाला 149.92 मिलियन टन है। मोटे तौर पर खरीफ सीजन की फसल बारिश आधारित होती है व इस वर्ष अच्छे मानसून तथा किसानों की मेहनत से यह प्रगति मिली है।


श्री तोमर ने बताया कि खरीफ फसलों के कवरेज की प्रगति पर कोविड-19 का प्रभाव नहीं पड़ा। हमारे देश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का फोकस कृषि क्षेत्र की प्रगति पर है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में कृषि मंत्रालय व राज्‍य सरकारों ने मिशन कार्यक्रमों व फ्लैगशीप स्‍कीमों के सफलतापूर्वक कार्यान्‍वयन के लिए सभी प्रयास किए हैं। भारत सरकार द्वारा आवश्यक छूट दिए जाने के कारण कृषि मंत्रालय ने कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान भी बीज, कीटनाशक, उर्वरकों, मशीनरी, ऋण जैसे आदानों की समय पर व्‍यवस्‍था कराई। इससे फसल कटाई अच्छी तरह हुई, ग्रीष्मकालीन बुवाई पिछली बार से लगभग 40 प्रतिशत ज्यादा हुई और खरीफ की भी सर्वाधिक बुवाई हुई है। किसानों द्वारा समय पर कार्यवाही करने,प्रौद्योगिकियों को अपनाने व सरकारी स्‍कीमों का लाभ लेने से श्रेय किसानों को जाता है तथा कृषि वैज्ञानिकों का योगदान भी इसमें रहा है।