आईपीएल प्रधानमंत्री के आत्म निर्भर भारत के खिलाफ, अनेक चीनी निवेशक कंपनियां भी प्रायोजक

नोएडा 


भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा आयोजित आईपीएल काफी हद तक चीनी कंपनियों के द्वारा निवेश की गई अनेक कनेक कंपनियों द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है जिसमें न केवल टाइटल स्पॉन्सर ड्रीम 11 बल्कि विभिन्न अन्य प्रायोजकों की श्रंखला जिसमें चीनी कंपनियों का निवेश है वो टीमें और सेवाओं की प्रायोजक है ! आईपीएल का यह आयोजन सीधे तौर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लोकल पर वोकल और आत्मनिर्भर भारत के विजन को धुल धूसरित कर रहा है । यह कहना है कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का जो देश में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार का एक बड़ा अभियान चलाये हुए है और प्रधानमंत्री श्री मोदी के लोकल पर वोकल और आत्मनिर्भर भारत का कट्टर समर्थक है ।


कैट के दिल्ली एन सी आर संयोजक  सुशील कुमार जैन ने बताया कि कैट द्वारा आज यहां जारी एक बयान में बताया कि ड्रीम 11 में चीनी कंपनी टेनसेंट ग्लोबल का निवेश है , जो आईपीएल का टाइटल स्पांसर है और पांच टीमों के लिए प्रायोजक है। बाईजूस में भी टेनसेंट ग्लोबल का निवेश है जो भारतीय क्रिकेट के लिए टीम प्रायोजक है, पेटीएम में चीनी कंपनी अलीबाबा का निवेश है जो भारतीय क्रिकेट का प्रायोजक है और दिल्ली कैपिटल का सहयोगी प्रायोजक है। जोमाटो जिसमें अलीबाबा का निवेश है वो रॉयल चैलेंजर का सहयोगी प्रायोजक है और आईपीएल की अन्य टीमों का खाद्य पार्टनर है वहीँ स्विगी में चीनी कंपनी टेनसेंट ग्लोबल का निवेश है और यह आईपीएल के लिए सहयोगी प्रायोजक है।


कैट ने केंद्र सरकार से अपील की है कि एक ओर वर्तमान परिदृश्य में जब पूरे देश में चीन के खिलाफ आक्रोश की प्रबल भावना है और सरकार प्रधानमंत्री श्री मोदी के लोकल पर वोकल और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दे रही है ! भारत में विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में चीनी कंपनियों की भागीदारी को प्रतिबंधित करने, चीनी निवेशों पर प्रतिबंध लगाने, चीनी निवेशों को नियंत्रित करने, चीन के साथ व्यापार बाधाओं को लागू करने के लिए भारत सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही है वहीँ दूसरी तरफ बीसीसीआई सरकार की इस व्यापक नीति की पूरी तरह से अवहेलना कर रहा है और पूरी दुनिया को भारत में चीनी वित्तीय शक्ति के प्रदर्शन को करने में सभी कदम उठा रहा है जिससे अनेक तरह के गलत संकेत दुनिया को दिए जाने की सम्भावना है ! यह खेद का विषय है की बीसीसीआई को ऐसी कोई भारतीय कम्पनी नहीं मिली जो प्रायोजक बन सके या बीसीसीआई ने इस तरफ कोई प्रयास ही नहीं किया ! वजह चाहे कुछ भी हो किन्तु वर्तमान समय में देश के लिए यह बेहद शर्मानक स्तिथि है ।


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