महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस आयुक्त की विशेष कार्य योजना

गौतमबुद्ध नगर में डीसीपी और एसीपी महिला सुरक्षा की तैनाती


सीएम योगी की परिकल्पना को नोएडा पुलिस ने पहनाया अमली-जामा


नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक महत्वपूर्ण परिकल्पना को धरातल पर उतारने का कार्य पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने किया है। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों का संज्ञान लेकर एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत अब गौतमबुद्धनगर में महिला और बाल सुरक्षा की जिम्मेदारी के लिए महिला डीसीपी और एसीपी की तैनाती की जा रही है। पुलिस को इस योजना की बीते काफी समय से प्रतीक्षा थी। 


इस योजना की नींव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ और गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली की घोषणा करने के दौरान रखी थी। उसे अब अमली जामा पहना दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली की घोषणा के समय कहा था कि वह इन अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि वे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए प्रभावशाली पहल करेंगे। महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों की जांच में शीघ्रता के साथ गुणवत्ता को भी वरियता देंगे। 


पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन निर्देशों के अनुपालन में गुरुवार को इस योजना को लागू कर दिया। इस योजना के तहत प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक महिला सुरक्षा डेस्क और एक महिला इकाई का संचालन किया जाएगा। महिला डेस्क द्वारा ही पुलिस स्टेशन में आने वाली सभी महिलाओं और बच्चों की समस्याओं का सर्वप्रथम संज्ञान लिया जाएगा, जिससे महिलाओं व बच्चों को अपनी समस्याओं का साझा करने में कोई परेशानी और हिचक ना हो और समस्याओं का विषय के आधार पर  निस्तारण की उचित प्रक्रिया शुरू की जा सके। 


उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत महिला इकाई में दो उप-निरीक्षक, पुरुष और महिला (पुरुष और महिला कांस्टेबल के साथ उनकी मदद के लिए) शामिल होंगे, जो विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों के सभी मामलों की जांच करेंगे। जांचकर्ताओं के इस समर्पित कैडर को सामयिक, समय पर और सबूत आधारित जांच के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके अलावा किसी भी जांच अधिकारी को प्रति वर्ष 40 से अधिक मामलों की जांच करने के लिए नहीं दिया जाएगा। गुणवत्ता के साथ ही समय पर जांच सुनिश्चित करने के लिए ही इस दृष्टिकोण को अपनाया गया है। 


पुलिस आयुक्त ने बताया कि एसीपी रैंक के अधिकारी को दहेज हत्या, एससी/एसटी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ यौन अपराध की जांच करने की जिम्मेदारी होगी। जबकि एसीपी महिला सुरक्षा को अनैतिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम के तहत अपराध, किसी भी अन्य जघन्य अपराधों द्वारा महिलाओं के खिलाफ सभी गंभीर अपराधों की जांच की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने बताया कि डीसीपी और एसीपी महिला सुरक्षा को महिलाओं के खिलाफ अपराधों के पूरे स्पेक्ट्रम जैसे सभी यौन अपराधों और शादी से संबंधित सभी अपराधों की  बारीकी से निगरानी करने की जिम्मेदारी होगी। 


आलोक सिंह ने बताया कि महिलाओं और बच्चों से संबंधित पूर्व-मौजूदा इकाइयों और सेवाओं जैसे कि महिला सहायता, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, विशेष पुलिस किशोर इकाई, 1090 आदि के निगरानी की जिम्मेदारी भी डीसीपी महिला सुरक्षा की होगी। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए विभिन्न पहलों के बीच तालमेल बिठाने और पर्यवेक्षण का कार्य भी किया जाएगा। 


सीपी के मुताबिक नए मॉडल के तहत वैवाहिक विवाद के मामलों में पेशेवर परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन में एक पारिवारिक विवाद निवारण सेंटर की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही महिलाओं और बाल सुरक्षा के लिए मोबाइल गश्ती वाहनों का बेड़ा भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य पुलिस और बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चिकित्सा प्राधिकरण, चाइल्डलाइन और महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाले विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी होगा।