बार-बार गाली देना और सार्वजनिक मंचों पर आक्रोश व्यक्त करना का डॉ उमेश शर्मा द्वारा एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण
नोएडा
मनोवैज्ञानिक डॉ उमेश शर्मा बताते हैं कि राहुल गांधी बार-बार बौखलाहट में आकर अपशब्द बोलते हैं –यह एक मानसिक बीमारी का लक्षण हो सकता है.
उन्होंने राहुल गांधी के व्यवहार का संभावित डायग्नोसिस (Diagnostic Possibility) किया है. डॉ शर्मा के अनुसार
*Intermittent Explosive Disorder (IED) – संभावना तब बनती है जब व्यक्ति बार-बार अचानक गुस्से के दौरे (anger outbursts) करता है उसकी भाषा असंतुलित हो जाती है (गाली, अपशब्द, आरोप). बाद में उन्हें खुद या उनके सहयोगियों को सफाई देनी पड़ती है या माफ़ी मांगनी पड़ती है. यह व्यवहार असंगत, अनपेक्षित और आवेगात्मक लगता है
*अचेतन मन का विश्लेषण (Unconscious Mind Analysis)*
. विकसित सुपरेगो और असंतुलित ईगो: राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक भारी विरासत (राजीव गांधी, सोनिया गांधी, इंदिरा गांधी) से हुई। इस “महानता” के दबाव में उनके ईगो और सुपरईगो के बीच द्वंद्व पैदा हो सकता है – जिससे असंतुलन उत्पन्न होता है।
• जब वास्तविकता उनके आदर्शों से मेल नहीं खाती, तो निराशा गुस्से में बदल जाती है।
2. *दमन (Repression) और विघटन (Displacement)*:
• सत्ता से बाहर होने की निराशा, अपनी पार्टी की स्थिति, आलोचनाओं का बोझ – यह सब दबा हुआ तनाव पैदा कर सकता है।
• वह गुस्सा वास्तविक कारणों पर नहीं, बल्कि सामने दिखने वाले प्रतीकों (जैसे प्रधानमंत्री या सत्ता के व्यक्ति) पर निकलता है।
3. *प्रतिस्पर्धात्मक ईर्ष्या (Competitive Envy)*:
• जब कोई दूसरा नेता (जैसे प्रधानमंत्री) जनसमर्थन, निर्णय-क्षमता या लोकप्रियता में उनसे आगे दिखता है, तो यह भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
• यह ईर्ष्या अचेतन मन में आक्रोश का रूप ले सकती है।
4. *Id का प्रभुत्व (Freudian View):*
• अगर व्यक्ति बार-बार भावनाओं के बहाव में बहकर आक्रामक शब्द बोलता है, तो यह उनके Id (प्रारंभिक इच्छा और भावनात्मक हिस्सा) के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है।
• नियंत्रित ईगो कमज़ोर होने से यह सार्वजनिक मंच पर फूट सकता है।
मनोवैज्ञानिक डॉ उमेश शर्मा इस मानसिक रोग का उपचार और सलाह के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि
1. CBT (Cognitive Behavioral Therapy):
• विचारों, भावनाओं और प्रतिक्रियाओं को पहचानना और नियंत्रित करना
• गुस्से के ट्रिगर को पहचानना
• भाषा पर नियंत्रण के अभ्यास
2. Insight-oriented Psychotherapy (Psychodynamic Therapy):
• अचेतन मन की जटिलताओं को समझना
• सत्ता, वंशवाद, पहचान और अस्वीकृति जैसे भावनात्मक अनुभवों का विश्लेषण
3. Medication (यदि आवश्यक हो):
• SSRIs (जैसे Fluoxetine) – मूड कंट्रोल के लिए
• Mood stabilizers – गुस्से के तीव्र झटकों को नियंत्रित करने हेतु
(यह तभी उपयोग होता है जब व्यवहार गंभीर और जीवन को प्रभावित कर रहा हो)
4. व्यवहारिक कोचिंग / स्पीच मॉडरेशन:
• सार्वजनिक मंच पर भाषा और अभिव्यक्ति को संभालना सीखना
• सार्वजनिक छवि प्रबंधन
उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में मनोवैज्ञानिक संतुलन का महत्व है.
यदि कोई व्यक्ति राजनेता है और जनसमूह को संबोधित करता है, तो उसकी भाषा मूल्य आधारित, शालीन और उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए. बार-बार अपशब्दों का प्रयोग न केवल उनकी छवि को बल्कि लोकतंत्र की गरिमा को भी ठेस पहुंचा सकता है
*निष्कर्ष*:
यदि राहुल गांधी जैसी सार्वजनिक शख्सियत बार-बार गाली या आक्रामक भाषा का प्रयोग कर रही हैं, तो यह केवल “*राजनीतिक रणनीति”* नहीं, बल्कि किसी गहरे मनोवैज्ञानिक संघर्ष, नियंत्रण की कमी, या भावनात्मक थकान का संकेत भी हो सकता है।
यह आवश्यक है कि ऐसे व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक परामर्श या व्यवहारिक कोचिंग दी जाए — ताकि वे न केवल खुद को बल्कि अपने शब्दों से दूसरों को भी सशक्त करें, आहत नहीं।