राष्ट्रपति भवन में एक संगोष्ठी में जैनाचार्य लोकेश ने कहा ‘“सबका मालिक एक” विचार धारा हमको आपस में जोड़ती है’





सच्चिदानंद वर्मा
नयी दिल्ली।  राष्ट्रपति भवन में एक संगोष्ठी में जैनाचार्य लोकेश ने कहा कि ‘‘सबका मालिक एक” यह विचार धारा हमको आपस में जोड़ती है। सभी धर्मों में इसे समान रूप से स्वीकार किया गया है। कोई इसे भगवान, कोई गॉड, कोई ईश्वर, कोई अल्लाह, कोई परमपिता, कोई परमेश्वर के रूप् में संबोधित करता है। दरअसल हम सभी उसी एक मालिक की बगिया के फूल हैं जो अलग अलग रंग और खुशबू से परिपूर्ण है और ये विविधता उस बागीचे को और अधिक खूबसूरत बनाती है।

उन्होंने कहा कि उसी तर्ज पर अनेकता में एकता हमारे देश की मौलिक विशेषता हैं। बहुलतावादी संस्कृति उसकी खूबी है। सर्व धर्म सद्भाव उसका मूल मंत्र हैं।  उस बहुलतावादी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन हम सब की जिम्मेदारी है।
वस्तुतः धर्म हमें जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। धर्म के क्षेत्र में हिंसा, घृणा, भय और नफरत का कोई स्थान हो नहीं सकता।

जैैनाचार्य ने कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा और अनेकांत वादी शैली से वार्ता और संवाद के द्वारा इज़रायल-फिलिस्तिन व युक्रेन-रशिया से युद्ध भी समाप्त कर सकते हैं एवं इस विचार को अपनाने से हमारे भीतर भ्रातृत्वभाव उत्पन्न होता है तब हम अपने अस्तित्व की तरह दूसरे के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं, अपने विचार की तरह दूसरों की विचारों का आदर करते हैं ये भाव सामाजिक समरसता को बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में धर्म के नाम पर हिंसा और असहिष्णुता विश्व के सामने बहुत बड़ी चुनौती है “सबका मालिक एक” उस चुनौती से निपटने का एक उपाय हैं इसलिए वर्तमान समय में “सबका मालिक एक” इस प्रासंगिक और प्रेरक विषय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए मैं पुनः ब्रह्माकुमारी परिवार को हार्दिक बधाई देता हूँ। इस अवसर पर माननीया राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी जिनका व्यक्तित्व और कर्तृत्व प्रेरणादायी है उनका संबोधन हम सबको इस दिशा में कार्य करने के लिए नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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