विश्व शांति को समर्पित तीन दिवसीय गुरमत समागम आयोजित

 गोबिंद सदन दिल्ली के संस्थापक बाबा विरसा सिंह का आगमन दिवस मनाया गया 

चंडीगढ़





: प्रत्येक वर्ष की तरह दिन रविवार 12 मार्च  गोबिंद सदन दिल्ली  के संस्थापक बाबा विरसा सिंह महाराज के आगमन दिवस के उपलक्ष पर गुरमत समागम का आयोजन  गुरुद्वारा नानक सागर, सेक्टर ३९- सी चंडीगढ़ में किया गया जिसे विश्व शांति को समर्पित किया गया।  इस समागम की शुरुआत 10 मार्च को श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के अखंड पाठ से हुई, और १२ मार्च  प्रातः ९ बजे से  इस अवसर पर गुरबाणी कीर्तन का गायन हुआ. प्रसिद्व संत महापुरषों और देश- विदेश से आये हुए विद्वानों ने अपने अपने विचार रखे और बाबा विरसा सिंह जी एवं गुरु ग्रन्थ साहिब जी और गुरु साहिबान, पीर पैगम्बर अवतारों के संदेशों को अपने जीवन में ढालने के लिए लोगों को प्रेरित किया साथ ही सामूहिक रूप में विशव शांति के लिए प्रार्थना (अरदास ) की गई। 

तीन  दिवसीय गुरमत समागम का आयोजन  यहाँ के मुख्य प्रबंधक गण (Management ) लै जनरल (Retd ) एच आर एस मान प्रेजिडेंट(President), एस. फुलवन्त सिंह सिदु (IAS Retd.) वाईस प्रेजिडेंट (Vice President) एवं माननीय  सदस्य स. सुरिंदर वीर सिंह (शम्मी ), स. अवतार सिंह अथवा स. जरनैल सिंह  और मंच संचालक (Stage Secretary ) श्री शिव कँवर सिंह संधू  (समाज सेवक) एवं  सदस्यों  की  देख -रेख में सुचारु रूप से आयोजित किया गया।  

इस अवसर पर एक जानी मानी अंतर्राष्ट्रीय लेखिका (International Writer )  तथा बाबा जी महाराज की भक्त श्रीमती मैरी पैट फिशर जिनकी पुस्तकें सात से भी अधिक देशों में विभिन्न भाषाओं में कॉलेजों (Universities ) में पोस्ट ग्रेजुएट स्तर( Post Graduate Level ) तक पढ़ाई जाती हैं, भी उपस्थित थी. श्रीमती मैरी पैट फिशर  की एक बहु चर्चित किताब Living Religion का 11वां संस्करण (11th edition ) अमेरिका (USA ) की Largest selling Text Books में नाम शुमार है। श्रीमती मैरी पैट फिशर  ने बोलते हुए कहा कि  उन्हें अपनी किताबों को लिखने के  सिलसिले में देश विदेशों में भ्रमण के  दौरान  पुरे विश्व की धार्मिक पुस्तकों अथवा लोगों को नजदीक से जानने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि मैं दावे के साथ यह  कह सकती हूँ कि श्री  गुरु ग्रन्थ साहिब एक ऐसा महान धार्मिक ग्रन्थ है जो पुरे विश्व के लोगों को भाईचारे, प्यार  व् शांति के पथ पर ले जा सकता है। 

बाबा विरसा सिंह जी के संपर्क में आने के  बाद मुझे श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी एवं धर्म के मायने समझ आये।  बाबा विरसा सिंह जी का कहना है धर्म तोड़ता नहीं जोड़ता है।  गुरु नानक देव जी व् गुरु गोबिंद सिंह जी का सांझी वलता का सन्देश “एक पिता एकस के हम बारिक”, “अवल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बन्दे एक नूर ते सब जग उपजया कों भले कों मन्दे”, "मानस की जात सभे  एके पेहचानबो" जिन प्रेम कियो तिन ही प्रभ पायो " के मायने समझ आये।  अगर हम मानवता को विश्व भर में आने वाले संकटों से बचाना चाहते हैं और विश्व में शांति लाना चाहते हैं तो श्री  गुरु ग्रन्थ साहिब जी  की शरण में आना पड़ेगा और   बाबा विरसा सिंह जी के सन्देश एवं सुझाये रास्तों पर चलना होगा तो ही हम विश्व में शांति ला सकते हैं।  

स्वीडन देश से आयी  श्रीमती उलरिका  एक अध्यापिका व् समाज सेवक (Teacher / Social  worker ) ने बोलते हुए कहा की अगर हम विश्व को बचाना चाहते हैं तो देर किये बिना गोबिंद सदन बाबा विरसा सिंह जी के संदेशों का अपने जीवन में अनुसरण करें  क्योंकि विश्व शांति का रास्ता गोबिंद सदन से हो कर ही निकलता है। 

रूस व् कजाकिस्तान देश से आईं अरीना और मरीना ने कहा की गोबिंद सदन के संस्थापक बाबा विरसा सिंह जी महाराज के संदेशों को आज कई देशों के लाखों ही लोगों ने अपने जीवन में ढाल लिया है। हम भी पूरे विश्वास से कह सकते हैं कि गोबिंद सदन ही एक मात्र रास्ता है जो की पूरे विश्व को शांति की तरफ ले जा सकता है।   हमारे देश में लाखों ही लोग गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी की  वाणी जाप साहिब जी का पाठ करते हैं जाप साहिब जी का पाठ करने से नित प्रति हमारा जीवन बदल गया है घरों में खुशियां बरस रहीं हैं 

    महापुरष भाई जोगिन्दर सिंह  खालसा गुरदासपुर से  अनुयायियों के साथ इस समागम में समिमलित हुए।  भाई जोगिन्दर सिंह खालसा  ने अपने आध्यात्मिक सफर की शुरुआत  नानकसर सम्प्रदाय के ब्रह्मज्ञानी बाबा नन्द  सिंह जी के प्रभाव में शुरू की। ब्रह्मज्ञानी बाबा नन्द  सिंह जी की प्रेरणा स्रोत वर्ष 1978  में बाबा  विरसा सिंह महाराज जी के  दर्शनों के लिए गोबिंद सदन दिल्ली आये और गोबिंद सदन ब्रह्मज्ञानी बाबा विरसा सिंह महाराज जी के हो कर रह गए।

महापुरष भाई जोगिन्दर सिंह जी ने बोलते हुए कहा कि बाबा विरसा सिंह जी महाराज ने गुरु ग्रन्थ साहिब जी अथवा गुरु साहिबान का प्यार और सांझी वाल्ता का सन्देश देश व् विदेशों  में पहुँचाया ।  

गोबिंद सदन जहाँ धर्म  और मजहब की दीवारें टूट जाती हैं भगवान् का घर वो भी बिना दीवारों के ये चमत्कार  अपने आप हैरान कर देने वाला है । मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, भगवान् महावीर, भगवान् बुध और चर्च सब एक साथ स्थापित हैं। एक ही छत्त के नीचे अलग अलग धर्मों के लोग एक दुसरे के धर्म स्थानों पर पाठ पूजा हवन प्रार्थना करते देख सकते है , इसी चमत्कार को देखने अथवा महसूस करने दुनिया भर के लोग खिंचे  चले आते हैं।  पिछले कई दशकों से होते हुए गुरु ग्रन्थ साहिब के अखंड पाठ,गुरु गोबिंद सिंह जी की बानी जाप साहिब , हवन, जीसस प्रेयर, नामज और  पूजा हो निरंतर हो रही है।  आइये  हम सब मिल कर  बाबा विरसा सिंह जी महाराज जी को विश्व शांति के लिए प्रार्थना करें।

ऐतिहासिक गुरुद्वारा खडूर साहिब से ज्ञानी मेहताब सिंह जी कथा वाचक एवं प्रसिद्ध विद्वान् , सबसे पहले आये हुए श्रदालुओं को बाबा विरसा सिंह जी के आगमन दिवस की बधाई दी और बाबा जी संदेशों को अपने दिलों में बसाने के लिए प्रेरित किया। ज्ञानी जी ने बोलते हुए बताया की बाबा जी ने गुरु ग्रंथ साहिब जी व् दसम ग्रंथ साहिब जी का प्रचार प्रसार पूरी दुनिया में किया और लोगों को प्यार भाईचारा और शांति का पाठ पढ़ाया।  यह कहा जा सकता है कि गुरुग्रंथ साहिब जी के सांझी वाल्ता पर व्यवाहरिक रूप में बहुत काम हो चुका है।  गोबिंद सदन अपने आप में अनूठी मिसाल है जहाँ सब धर्मों कि सीख को एक माला में पिरोया गया है।


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