’संडे हो या मंडे रोज खाओं अंडे’ पर फंडा , विरोध में मर्सी फॉर एनिमल्स की महिला कार्यकर्ताओं का अनोखा

 विश्व अंडा दिवस पर विशेष

प्रदर्शन खुद को पिंजरे में कैद करके दिखाया कि अंडे र्के लिए मुर्गियां कैसे पीड़ित होती ह ैंमुर्गियाँ


भारत में चार करोड़ से अधिक मुर्गियाँ क्रूर बैटरी पिंजरों में बंद हैं 

दिल्ली :


14 अक्टूबर को विश्व अंडा दिवस मनाया जा रहा है। बताते चले विश्व भर में अक्टूबर के दूसरे शुक्रवार को अंडा दिवस मनाया जाता है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा अंडा उत्पादक देश है।अंडा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को अंडे की पौष्टिकता के बारे में जानकारी देना है। राष्ट्ीय पोषाहार संस्थान के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को साल में 180 अंडोें का सेवन करना चाहिए। अंडे में प्रोटीन की अच्छी मात्रा के साथ साथ कई तरह के विटामिन और अमीनो एसिड व लवण पाए जाते हैं जा शरीर को पूरी तरह स्वश्थ रखने में सहायक है। वहीं शाकाहार को बढ़ावा देने वाले जीव हिंसा के खिलाफ काम करने वाले मानवीय संगठन इस दिवस का पूरजोर विरोध भी इसी दिन कर रहे है। आज दिल्ली में तो अंडा दिवस के पहले ही, मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर एक अनोखा प्रदर्शन किया, जिसमें लोगों से पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों को चुनकर दयालु होने का आग्रह किया गया। मर्सी फॉर एनिमल्स की महिला स्वेंसेवको ने ‘खून’ से सने कपड़े पहन तथा हाथो मैं तख्तियां पकड़े जिनपर लिखा था “मुर्गिया अंडो के लिए प्रताड़ित होती है; वीगान बने”, खुद को विशाल पिंजरों मैं बंद कर लिया।


भारत में चार करोड़ से अधिक मुर्गियाँ क्रूर बैटरी पिंजरों में बंद हैं।अंडे देने के लिए रखी जाने वाली मुर्गियाँ ऐसी गंभीर पीड़ा से गुज़रती हैं जो किसी बुरे सपने से कम नहीं होती, और दो साल से कम उम्र में उनकी मृत्यु हो जाती है। जिन मुर्गियों को अंडे देने के लिए रखा जाता है, उनकी चोंच का एक हिस्सा गर्म ब्लेड से काट दिया जाता है और इस प्रक्रिया में किसी भी दर्द निवारक का उपयोग नहीं किया जाता है। इससे भी बदतर, ज्यादातर अंडे बैटरी केज फार्म से आते हैं जो मुर्गियों को ।-4 शीट सेभी कम जगह देते हैं जो उन्हें अपने पंख फैलाने या अपने प्राकृतिक व्यवहार को प्रदर्शित करने से रोकता है। मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन में समन्वयक निहारिका कपूर कहती हैं, “अंडे का उत्पादन सिर्फ क्रूर ीप नहीं बल्कि कोलेस्ट्रॉल और संतृप्त वसा में उच्च होते हैं जो कार्डियोवैस्कुलर बीमारी के उच्च जोखिम से जुड़े होते हैं। जानवरों की मदद करने, पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ अपने स्वयं के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए सबसे अच्छा काम शाकाहार को अपनाना।


मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन एक प्रमुख पशु संरक्षण संगठन है जो खाद्य प्रणाली में फंसे जानवरों की पीड़ा को कम करने के लिए काम करता है। हाल ही में, मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन से अभ्यावेदन प्राप्त करने के बाद, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने खाद्य सुरक्षा और मानक (शाकाहारी खाद्य) विनियम, 2021 पारित किया,जो भारत द्वारा निर्मित, पैक किए गए या आयात किए गए प्रत्येक वीगन खाद्य पदार्थ का एक अलग ’वीगन’ लेबल अनिवार्य करता है। इसके अतिरिक्त, मर्सी फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन की मांगों के जवाब में, दिल्ली, मणिपुर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मिजोरम और गुजरात की सरकारों ने माडा सुअर को कैद करने के लिए जेस्टेशन क्रेट और फैरोइंग क्रेट के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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