इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रणाली की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए नया तंत्र

 


नई दिल्ली(इंडिया साइंस वायर): इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) प्रणालियों में इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और प्रणालियों के बीच डेटा प्रसारित किया जाता है। इस प्रकार डेटा ट्रांसमिशन और प्रबंधन को वर्तमान में अलग पारिस्थितिक तंत्र में पैक किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक उपकरण से संचालित किसी ऑपरेटिंग सिस्टम के भीतर काम करने वाली आईओटी प्रणालियां अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा प्रबंधित उपकरणों के साथ क्रॉस-टॉक नहीं कर सकते हैं। 


भारतीय शोधकर्ताओं ने IoT उपकरणों और अनुप्रयोगों से जुड़े डेटा संग्रह और ट्रांसमिशन की क्षमता बढ़ाने के लिए नया आर्किटेक्चर और एल्गोरिद्म विकसित किया है, जो इस तरह की चुनौतियों से निपटने में मददगार हो सकता है। यह अध्ययन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी, और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के शोधकर्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। 

 

अध्ययन से जुड़ी आईआईटी जोधपुर की शोधकर्ता डॉ सुचेतना चक्रवर्ती ने कहती हैं कि “इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) को अगली औद्योगिक क्रांति माना जाता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे हमारे जीवन को बदल रहा है। हमने पहले ही एम्बेडेड उपकरणों के माध्यम से रोजमर्रा की वस्तुओं को इंटरनेट से जोड़ना शुरू कर दिया है; स्मार्ट होम पहले ही एक वास्तविकता है, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रगति के साथ, IoT सिस्टम कार्यात्मक रोबोट, सेल्फ-ड्राइविंग कारों, आदि को साकार कर रहे हैं। ” आगे वह कहती हैं कि "पारिस्थितिकी तंत्र के बीच IoT सेवाओं को साझा करने में रुचि बढ़ रही है। ऐसे तंत्र में एक बुनियादी सवाल यह है कि एकल IoT सेटअप का सबसे अच्छा उपयोग और नियंत्रण कैसे कर सकते हैं?"

  

आधुनिक IoT एप्लीकेशन्स में, डेटा को ऐंड डिवाइस और एक प्रोसेसिंग सेंटर के बीच संप्रेषित किया जाता है, जो क्लाउड या एज सर्वर (वह क्षेत्र जहाँ एक डिवाइस या स्थानीय नेटवर्क इंटरनेट के साथ इंटरफेस करता है) में हो सकता है। मौजूदा समस्या यह है कि इसमें बड़ी मात्रा में डेटा प्रसारित करने की आवश्यकता होती है। डेटा संपीड़न विधियों के उपयोग के बावजूद विशिष्ट IoT एप्लिकेशन के लिए डेटा की प्रासंगिकता का पहलू छूट जाता है। इसके अलावा, प्रत्येक पारिस्थितिकी तंत्र स्वतंत्र रूप से चलता है और अपने स्वयं के क्लाउड/एज सर्वर पर लगाया जाता है, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है।


शोधकर्ताओं ने नये एल्गोरिदम के विकास के माध्यम से संसाधन अपव्यय और डेटा अप्रासंगिकता की दो समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया है। उन्होंने साझा IoT अवसंरचना में कुशल डेटा प्रबंधन और फॉरवार्डिंग के लिए CaDGen (Context-aware Data Generation) नामक एज-बेस्ड डेटा पूर्व-प्रसंस्करण तंत्र विकसित किया है।


CaDGen के दो मॉड्यूल हैं। एडाप्टिव सेंसिंग मॉड्यूल सेंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करने वाले चालित एप्लिकेशन्स के संदर्भ के आधार पर डेटा को फिल्टर करता है। जबकि, चयनात्मक फॉरवार्डिंग मॉड्यूल डेटा के लिए अग्रेषण पथ तय करता है, ताकि एज उपकरणों पर चलने वाली विभिन्न माइक्रो-सर्विसेज अपनी आवश्यकताओं के आधार पर डेटा का सर्वोत्तम उपयोग कर सकें।


विविध सेटअप्स में CaDGen का मूल्यांकन किया गया है, जिसमें नेटवर्क संसाधन उपयोग, मापनीयता, ऊर्जा संरक्षण, और इष्टतम सेवा प्रावधान के लिए गणना के वितरण के संदर्भ में आशाजनक परिणाम मिले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि संदर्भ विश्लेषण विधि; डेटा गुणवत्ता से समझौता किए बिना चालित एप्लिकेशन में अप्रासंगिक डेटा को फिल्टर करके सामान्य गतिशील परिदृश्य के लिए उत्पन्न डेटा में लगभग 35% की कमी कर सकती है।

 

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह का दृष्टिकोण एक कनेक्टेड लिविंग सेटअप में विभिन्न स्मार्ट वातावरण के अनुरूप हो सकता है, जो अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए प्रभावी सेवा ढांचा प्रदान करते हुए डेटा प्रबंधन की लागत को कम कर सकता है।

यह अध्ययन शोध पत्रिका फ्यूचर जेनरेशन कंप्यूटर सिस्टम्स में प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में, आईआईटी जोधपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ सुचेतना चक्रवर्ती के अलावा आईआईटी खड़गपुर में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संदीप चक्रवर्ती और आईआईआईटी गुवाहाटी के शोधार्थी अनिर्बान दास शामिल हैं। 

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