दलबदलू स्वामी प्रसाद मौर्य किसी को क्या मुख्यमंत्री बनायेंगे,बसपा में आने के बाद ही उनकी किस्मत खुली - मायावती

 
लखनऊ : अपने जन्म दिन के अवसर पर मायावती ने मीडिया को संबोधित करते हुए बोली कि जैसाकि आप लोगों को यह विदित है कि आज मेरा ख़ुद का अपना जन्मदिन है और इस मौके पर सबसे पहले मैं अपने शुभचिन्तकों का व विशेषकर बी.एस.पी. के उन लोगों का हार्दिक दिल से आभार प्रकट करती हूँ जो पूरे देश में मेरे जन्मदिन को, पिछले वर्ष की तरह इस बार भी, कोरोना नियमों का पालन करते हुये तथा अपने महान् सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फूले, छत्रपति शाहूजी महाराज, नारायणा गुरु, बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर एवं  कांशीराम आदि की मानवतावादी सोच व उनकी मूवमेन्ट को ध्यान में रखकर, जिनके बताये हुये रास्तों पर चलकर ही मैंने उनकी इस सोच व मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने के लिए अपनी पूरी ज़िन्दगी भी समर्पित की है, वे अर्थात् इनके अनुयायी आज मेरे जन्मदिन को जनकल्याणकारी दिवस ;च्मवचसमश्े ॅमसिंतम क्ंलद्ध के रूप में बहुत ही सादगी व संजीदगी के साथ मना रहे है, जिसके तहत् चलकर ही मेरे जन्मदिन के मौके पर हर वर्ष बी.एस.पी. के लोग अपने आर्थिक सामर्थ्य के हिसाब से अपने-अपने क्षेत्र में सर्वसमाज में से विशेषकर ग़रीब, कमज़ोर, लाचार, असहाय, व अन्य ज़रूरतमन्द लोगों की विभिन्न रूपों में मदद भी करते है, और इस बार भी मदद कर रहे हैं और इस सन्दर्भ में मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि ख़ासकर कोरोना महामारी के दौरान् परिवार में जिन कमाने वालों की मृत्यु हो गई है और उनके पीछे दुःखी व पीड़ित चल रहे परिवारों की सरकारी मदद के आभाव में अब हालत काफी ज़्यादा ख़राब हो गई है तो उनकी भी पार्टी के लोग पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी विभिन्न रूपों में काफी कुछ मदद कर रहे है।
पूर्व मुख्यमत्री ने कहा कि लेकिन इस मामले में दुःख इस बात का है कि इस समय यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब आदि इन राज्यों में विधानसभा के आमचुनाव घोषित होने तथा चुनाव आचार संहिता भी लगने की वजह से अब यहाँ पार्टी के लोग इन सभी की किसी भी रूप में इस बार मदद नहीं कर पा रहे हैं, जबकि यह बात सर्वविदित है कि हमारी पार्टी समाज में विशेषकर ग़रीब, कमज़ोर, असहाय व अन्य उपेक्षित वर्गां के हित एवं कल्याण के लिए हमेशा अति-गम्भीर, संवेदनशील, ईमानदार व संघर्षरत् रहती है जिसके मुताबिक चलकर ही बी.एस.पी. ने यूपी में चार बार अपने नेतृत्व में यहाँ सरकार भी चलाई है और इस दौरान् हमारी पार्टी की सरकार ने मेरे जन्मदिन के मौके पर भी ऐसे लोगों के हित व कल्याण के लिए अनेकों जनहित की नई-नई योजनायें भी प्रारम्भ की है, जिनसे इन्हें काफी ज्यादा लाभ पहुँचा है।
उन्होंने कहा कि यह सब यहाँ जातिवादी, संकीर्ण, साम्प्रदायिक व पूँजीवादी, मानसिकता रखने वाली सभी विरोधी पार्टियों को अच्छा नहीं लगा है और फिर इन्होंने यहाँ बी.एस.पी. के विरुद्ध अन्दर-अन्दर एक होकर व क़िस्म-क़िस्म के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डे इस्तेमाल करके हमारी पार्टी को सत्ता में आने से रोका है, जिसे अब प्रदेश की जनता काफी हद तक समझ चुकी  है, जिनसे हमें यह उम्मीद भी है कि यूपी में इस समय विधानसभा के लिए हो रहे आमचुनाव में   बी.एस.पी. को फिर से जनता यहाँ जरूर सत्ता में वापिस लायेगी, और मैं भी उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहती हूँ कि इस बार सत्ता में आने के बाद हमारी पार्टी अपने पूर्व के रहे शासनकाल की तरह ही फिर से यहाँ हर मामले में व हर स्तर पर अपनी ’’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’’ की नीतियों पर आधारित ही सरकार चलायेगी।
बसपा अघ्यक्ष ने कहा कि इस सम्बन्ध में यहाँ मैं यह भी कहना चाहूँगी कि मैंने कुछ महीने पूर्व दिनांक 7 सितम्बर 2021 को बी.एस.पी. के प्रबुद्ध वर्ग के हुये सम्मेलन में इनकी सुरक्षा, सम्मान व तरक्की आदि को लेकर तथा इसके बाद दिनांक 9 अक्टूबर सन् 2021 को बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापकी कांशीराम ी की पुण्यतिथि के मौके पर भी लाखों-लाखों की संख्या में लखनऊ में आये हुये लोगों को सम्बोधित करते हुये प्रदेश की बिगड़ी हुई कानून-व्यवस्था को सुधारने तथा यहाँ दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगो के साथ-साथ ग़रीबों, मज़दूरों, बेरोज़गारों, नौजवानों, किसानों, व्यापारियों, कर्मचारियों, व अन्य विभिन्न क्षेत्रों में लगे लोगों के एवं छात्रों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों, आदि के हित व कल्याण आदि के सम्बन्ध में जो कुछ भी ज़रूरी बातें कही हैं तो उन पर फिर हमारी पार्टी की सरकार बनने पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अमल किया जायेगा।
वैसे भी आज देश की असली चिन्ता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान के हिसाब से चलकर देश की करोड़ां जनता को ग़रीबी, बेरोज़़गारी, महंगाई व तनावपूर्ण हिंसक वातावरण की दुर्दशा से निकाल कर उन्हें कानून द्वारा कानून के राज के माध्यम से सुख, शान्ति व स्थिरता (स्थायित्व) पहुँचाने की है, जिसके आभाव में उनका जीवन काफी त्रस्त हो रहा है और ये लोग फिर से गुलाम व लाचार बनते जा रहे हैं।
और यह अब केवल यूपी को ही नहीं बल्कि पूरे देश को भी यह यकीन हो चला है कि यहाँ उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड व पंजाब आदि इन राज्यों में हो रहे विधानसभा आमचुनावों के परिणाम आने के बाद देश में परिस्थिति जरूर बदलेगी और आम जनहित में कुछ जरूर बेहतर होगा। इस प्रकार काफी लम्बी प्रतीक्षा के बाद अब नया साल सन् 2022 यहाँ उम्मीदों की ऐसी नई किरण लेकर आ रहा है जिससे आम जनहित का भला होने की काफी प्रबल उम्मीद भी है।
उन्होंने कहा कि अपने जन्मदिन के शुभ अवसर पर मेरे खुद के द्वारा लिखित पुस्तक ’’मेरे संघर्षमय जीवन एवं बी.एस.पी. मूवमेन्ट का सफरनामा’’, का . ए ट्रेवेलोग ऑफ माई स्ट्रगल-रिडेन लाइफ एण्ड बी.एस.पी. मूवमेन्ट) हिन्दी व अंग्रेजी संस्करण भी जो मुख्य तौर पर एक वर्ष के दौरान् का पार्टी व मूवमेन्ट के कार्यकलापों व संघर्षों आदि का साफ-सुथरा लेखा-जोखा होता है, उसे आज जारी किया जाता है। इसीलिए यह पुस्तक ख़ासकर वर्तमान में युवा पीढ़ी व आगे आने वाले पीढ़ी के लिये भी काफी प्रेरणादायक साबित होगी, ताकि मान्यवर श्री कांशीराम जी के नेतृत्व में उनकी त्याग-तपस्या व कठोर मेहनत से बनी बी.एस.पी. की अम्बेडकरवादी व मानवतावादी मूवमेन्ट हमेशा आगे ही बढ़ती रहे और फिर उनकी यह मूवमेन्ट कभी भी आगे ना रूके।
अब मैं इस प्ररेणादायी पुस्तक का विमोचन करूँ, लेकिन इससे पहले आज मैं अपने जन्मदिन के मौके पर ख़ासकर यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब में अपनी पार्टी के लोगों से यह भी अनुरोध करती हूँ कि पार्टी के जो लोग यहाँ चुनाव आचार संहिता लगने की वजह से इस बार मेरा जन्मदिन अपने-अपने घरो में ही रहकर मना रहे हैं, वे कोरोना नियमों व चुनाव आचार संहिता का भी पालन करते हुये, अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने के लिए रात-दिन खूब मेहनत करें और उन्हें भारी वोटों के अन्तर से भी जरूर जितायें। यदि ऐसा हो जाता है और यहाँ सन् 2007 की तरह फिर से बी.एस.पी. की अकेले ही अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बन जाती है तो फिर यही इस बार मेरे जन्मदिन के लिए इनका यह ख़ास व अत्यन्त कीमती तोहफा भी होगा। लेकिन मुझे यह तोहफा (गिफ्ट) देने के लिए पार्टी के लोगों को वोट पड़ने तक यहाँ यूपी, उत्तराखण्ड व पंजाब प्रदेश मे भी विरोधी पार्टियों के सभी साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से ज़रूर सावधान रहना है।
जैसे अब इस चुनाव में खासकर जातिवादी व बी.एस.पी.-विरोधी मीडिया को बी.एस.पी. की मुखिया के विरूद्ध कुछ खास मुद्दे बोलने के लिए नहीं मिल रहे हैं तो ये लोग मेरे चुनाव ना लड़ने को भी लेकर जानबूझ कर षडयंत्र के तहत् इसे भी आए दिन उछालते रहते हैं और इसकी आड़ में जनता को मेरे बारे में ऐसा इम्प्रेशन भी देते हैं जैसे मैंने कभी कोई चुनाव ही नहीं लड़ा है, जबकि इनको यह मालूम होना चाहिये कि मैं चार बार लोकसभा की व तीन बार राज्यसभा की भी सदस्य (सांसद) रह चुकी हूँ। इसके इलावा, दो बार यूपी विधानसभा में व दो बार यूपी विधान परिषद की भी सदस्य रह चुकी हूँ।
मायावती ने कहा कि हमारे कानून में यह व्यवस्था बनी है कि बिना लोकसभा का सीधा चुनाव लड़े भी, राज्यसभा में जाकर, कोई भी योग्य व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री व केन्द्रीय मंत्री भी बन सकता है तथा इसी प्रकार विधान परिषद में भी जाकर कोई भी योग्य व्यक्ति किसी भी स्टेट का मुख्यमंत्री आदि भी बन सकता है जहाँ पर विधान परिषद की व्यवस्था है। इसलिए यूपी में बी.एस.पी. की सरकार बनने पर मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सीधा चुनाव ना लड़के व अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव जीत कर भी यूपी प्रदेश की बागडोर सम्भाल सकती हूँ, जिसकी इस समय काफी सख़्त जरूरत भी है।
मायावती ने बताया कि  खिसयानी बिल्ली खम्बा नोचे की तरह विरोधी पार्टियाँ व जातिवादी मीडिया भी मेरे क्षेत्र में ना जाने को भी लेकर आए दिन किस्म-किस्म की तथ्यहीन व बुनियादी बाते करते रहते हैं, जिसका जवाब मैं पहली जनवरी को मीडिया को भी दे चुकी हूँ, उसे मैं फिर से दोहराना नहीं चाहती हूँ। वैसे भी मुझे पूरा भरोसा है कि इस बार चुनाव में बी.एस.पी. सन् 2007 की तरह फिर से यूपी की सत्ता में जरूर वापिस लौटेगी और तब फिर पूर्व की तरह इस बार भी यहाँ सर्वे एजेन्सियों का ओपनियन पोल व सर्वे आदि धरा का धरा रह जायेगा ।
इतना ही नहीं बल्कि अब यहाँ आकाश आनन्द को भी लेकर चुनाव लड़ने या ना लड़ने की भी बाते करते रहते है, जबकि अभी वह राजनीति में धीरे-धीरे अपने आपको काफी तैयार व परिपक्व भी कर रहा है और इसके साथ ही मेरे चुनावी राज्यों में ज्यादा व्यस्त होने की वजह से अब वह मेरे दिशा-निर्देशन में उन राज्यों में जहाँ चुनाव नहीं हो रहे हैं, वहाँ पार्टी के जनाधार को भी बढ़ाने में पूरे जी-जान से लगा है और फिर उचित समय पर ही इनको व पार्टी के अन्य नौजवानों को भी सीधा व अप्रत्यक्ष रूप में चुनाव लड़ने का भी मौका जरूर दिया जायेगा जो ये सभी मेरे बी.एस.पी. परिवार के ही लोग हैं लेकिन इसे भी मेरे से सीधा जोड़ लिया जाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उम्मीद के साथ ही अब मैं अपनी पुस्तक का विमोचन भी कर रही हूँ।
और अब इसके बाद मैं यूपी विधानसभा के प्रथम चरण की 58 सीटों पर चुनाव के लिए   बी.एस.पी. की 53 उम्मीदवारों की सूची जारी कर रही हूँ। बाकी की एक-दो दिन में जारी हो जाएगी।
और अब मैं अन्त में सभी मीडिया बन्धुओं से मेरे जन्मदिन का केक व जलपान आदि लेने का भी विशेष आग्रह करती हूँ। साथ ही, अपनी बात यहीं समाप्त भी करती हूँ, किन्तु इससे पहले यदि आप लोग मुझसे कुछ सवाल पूछना चाहते हैं तो एक-एक करके पूछ सकते हैं। लेकिन आप सभी के एक सवाल का मैं खुद ही आपको जवाब दे देती हूँ और वह यह है कि देश में चुनाव के नजदीक जिस प्रकार से स्वार्थी किस्म के लोगों का दलबदल करने का सिलसिला शुरू हो जाता है तो इसे ख़ास ध्यान में रखकर अब दलबदल विरोधी कानून को काफी सख़्त बनाने की जरूरत है, क्योंकि इससे हमारे लोकतन्त्र पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
मायावती ने कहा कि , जो दलबदलू नेता व सपा के साथ गठबन्धन करके चुनाव लड़ने वाली पार्टियाँ यह कह रही हैं कि यह पार्टी यानी कि समाजवादी पार्टी एससी, एसटी, ओबीसी व एमसी अर्थात् माईनारिटीज़ वर्गां के हितों की व इनके सन्तों गुरुओं व महापुरुषों आदि को भी सम्मान करने वाली पार्टी है, साथ ही कुछ दलबदलू चीख-चीख कर व चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि सपा समाजवादी के साथ-साथ, अम्बेडकरवादी भी है, तो इसमें रत्ती भर भी सचाई नहीं है, क्योंकि जिस समाजवादी पार्टी ने दलितों के सरकारी नौकरियों में पदोन्नति को लेकर लाये गये विधेयक को राज्यसभा में फाड़ कर फेंक दिया था और इस विधेयक को पास नहीं होने दिया था, जो अभी तक भी लटका पड़ा है, यह तो भी इनको ज़रूर जानना चाहिये, तो यह कैसे दलित-हितैषी पार्टी हो सकती है?
साथ ही, दलित समाज में जन्मे सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों के नाम पर रखे गये कुछ ज़िलों के नाम व जनकल्याणकारी योजनाओं आदि का सपा ने हमेशा विरोध किया है। इस संदर्भ में उल्लेखनीय है कि दलित समाज में जन्मे  संतगुरु रविदास जी के नाम पर रखे गये नये भदोही ज़िले का नाम भी बदल दिया था। यह पूर्वांचल के लोग अच्छी तरह से जानते हैं, जबकि पूरे देश में व यूपी व पंजाब आदि में भी लोग संतगुरु रविदास जी को बहुत आदर-सम्मान देते हैं। उनकी बहुत कद्र करते हैं तथा उनके बताये हुये रास्ते पर चलते हैं। लेकिन दुःख इस बात का है कि मेरी सरकार ने भदोही को जिला मुख्यालय बनाते हुये संतगुरु रविदास जी के नाम पर नया जिला बनाया, लेकिन सपा नेता इतने दलित-हितैषी हैं कि इन्होंने उस जिले का नाम ही बदल दिया।
सपा प्रमुख श्री अखिलेश यादव द्वारा 2012-2017 में इनकी सरकार के दौरान किये गए कार्यों की लिस्ट जारी की गई है, लेकिन कुछ कामों को वो भूल गए। इसीलिए सोचा कि मैं ही याद दिला दूँ : 1. सपा सरकार ने एससी, एसटी का सरकारी ठेकों में आरक्षण खत्म किया। 2. एससी, एसटी के छात्रों का विदेश जाकर पढ़ाई करने की योजना को खत्म किया। 3. पंचशील नगर का नाम बदलकर हापुड़ किया। 4. संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही किया। 5. भीम नगर का नाम बदलकर संभल किया। 5. छत्रपति शाहूजी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर किंग जॉर्ज मेडिकल किया। 8. मान्यवर श्री कांशीराम जी कृषि विश्वविद्यायल बाँदा का नाम बदल दिया। 9. मा. कोर्ट के निर्णय की आड़ में अनुसूचित जाति जनजाति के कर्मचारियों का ग़लत तरीके से डिमोशन किया। 10.अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों का शून्य शुल्क पर प्रवेश समाप्त किया। 11. अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति पर 60 प्रतिशत की बाध्यता लगाकर उनकी छात्रवृत्ति रोकने का काम किया। 12. मान्यवर श्री कांशीराम जी अरबी फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलने का काम किया। 13. लखनऊ के गोमती नगर में डा. भीमराव अम्बेडकर पार्क जो बी.एस.पी. की सरकार में बनाया गया था उसका नाम बदलकर जनेश्वर मिश्र पार्क कर दिया। 14. सरकारी भूमि आवंटन में एससी, एसटी को मिलने वाली प्राथमिकता को खत्म किया। 15. एससी, एसटी की भूमि खरीद को लेकर नया संशोधन लेकर आये जिसमें बिना डीएम की अनुमति के कोई भी उनकी जमीन खरीद सकता था जिससे इन कमजोर वर्गां की जमीन को हथिया जाया सके। यह सब है श्री अखिलेश जी व उनकी सरकार की अम्बेडकरवादी कुछ खास सोच एवं प्रेम?
इतना ही नहीं बल्कि इसी पार्टी ने अपने सत्ता में रहते हुये पिछड़े वर्ग में केवल अपने यादव समाज का ही अधिकांशः ध्यान रखा है बाकी पिछड़ी जातियों का नहीं जबकि बी.एस.पी. ने दलितो के साथ-साथ यादव सहित सभी पिछड़ी जातियों के भी विकास व उत्थान का बराबर ध्यान रखा है।
 स्वामी प्रसाद मौर्य के एक दावे से सम्बंधित एक सवाल के जवाब में सुश्री मायावती जी ने कहा कि वह क्या मुझे मुख्यमंत्री बनायेगा। वास्तव में बी.एस.पी. में आने के बाद ही उनकी किस्मत खुली है। पहले बहुत पार्टियों में रहें हैं लेकिन चुनाव नहीं जीता। बी.एस.पी में आने पर ही उनकी किस्मत खुली व एमएलए बने। उनके जो भी दावे हैं वे सब बेकार हैं व सब हवा-हवाई बातें हैं। बीजेपी वाले सर्वसमाज के बहाने इसको ढोते रहे। अब इनकी जुबान कैसी है यह सभी देख रहे हैं। जबकि हम जब बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की बात करते हैं तो उनकी मानवतावादी सोच को समझना चाहिए। वे किसी जाति व धर्म के खिलाफ नहीं थे बल्कि यहाँ व्याप्त गैर-बराबरी वाली जो जातिवादी व्यवस्था बनी है उसको बदल कर देश में समतामूलक समाज की स्थापना करना चाहते थे और इस व्यवस्था को बनाने के लिए उनको आगे आना होगा जो इस व्यवस्था के शिकार लोग हैं। उन्हें अपरकास्ट समाज को भी साथ में लेकर सर्वसमाज में भाईचारा बनाना होगा, जिसके प्रति बी.एस.पी. समर्पित व लगातार काम कर रही है।
साथ ही,
 मायावती  ने फिर से स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारी पार्टी अकेले अपने बलबूते पर पूरी ताकत व दमदारी के साथ चुनाव लड़ रही है। हमारी पार्टी का गठबंधन किसी पार्टी या दल से नहीं है बल्कि हमारा गठबंधन सर्वसमाज में भाईचारा पैदा करके यह गठबंधन चल रहा है और हमें पूरा भरोसा है कि सर्वसमाज के गठबंधन के आधार पर हमें यहाँ  सफलता जरूर मिलेगी तथा बी.एस.पी. की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। धन्यवाद, जयभीम व जयभारत
दलबदलू  स्वामी प्रसाद मौर्य किसी को क्या मुख्यमंत्री बनायेंगे। वास्तव में बी.एस.पी. में आने के बाद ही उनकी किस्मत खुली व एमएलए बने। पहले बहुत पार्टियों में रहे लेकिन चुनाव नहीं जीत पाए। उनके जो भी दावे हैं वे सब बेकार हैं व सब हवा-हवाई बातें हैं। बीजेपी वाले सर्वसमाज के बहाने इसको ढोते रहे। अब उनकी जुबान कैसी है यह सभी देख रहे हैं
 


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