कश्मीर की तरह जम्मू में भी केसर पार्क बनाया जाएगा, किसानों व वि.वि. को मिलेगी पूरी मदद


 शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वि.वि., जम्मू में कृषि मंत्री द्वारा सुविधाओं की सौगात 

खेती के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा जम्मू-कश्मीर- श्री तोमर

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी वि.वि., जम्मू में सुविधाओं की सौगात के रूप में मेगा बीज इकाई के अंतर्गत जीन बैंक व कोल्ड स्टोरेज का शिलान्यास किया व रबी अभियान के शुभारंभ अवसर पर बीज वाहन को हरी झंडी दिखाई। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान/विश्व बैंक प्रायोजित संस्थागत विकास योजना (आईडीपी) की परियोजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में श्री तोमर ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर खेती के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा, यहां कृषि को लेकर शुभ-संकेत है। श्री तोमर ने कहा कि कश्मीर की तरह जम्मू में भी केसर पार्क बनाया जाएगा व राज्य के किसानों व वि.वि. को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद दी जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान स्कीम) के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के किसानों को केंद्र द्वारा 1,721 करोड़ रूपए की आय सहायता प्रदान की गई है।

मुख्य अतिथि श्री तोमर ने कहा कि आजादी के बाद के इतने वर्षों में यदि समय रहते खेती-किसानी के क्षेत्र पर तत्कालीन सरकारों द्वारा ध्यान दिया जाता तो आज स्थिति कुछ और ही होती, लेकिन अब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में कृषि क्षेत्र की ताकत बढ़ाई जा रही है। हमारा देश कृषि प्रधान होने से आज सरकार की प्राथमिकता कृषि क्षेत्र है। कृषि क्षेत्र मजबूत होगा तो देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी, यहीं हमारी प्राथमिकता होना चाहिए और है। श्री तोमर ने कहा कि यह सोचने की बात है कि वर्ष 2014 से पहले दुनिया के राजनीतिक मंच पर भारत की क्या स्थिति थी और बाद के इन 7 वर्षों में भारत की बड़ी उपलब्धि यह है कि आज दुनिया के किसी भी राजनीतिक मंच पर भारत की राय के बिना एजेंडा तय नहीं किया जाता। भारत के पास मानव संसाधन की बड़ी ताकत है। 

श्री तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और स्वामीनाथन आयोग की 201 में से 200 सिफारिशों को माना गया है। इसी अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ भी किसानों को दिया जा रहा है। वर्ष 2014 तक केंद्रीय कृषि मंत्रालय का बजट 23 हजार करोड़ रूपए का होता था, जो आज 1.23 लाख करोड़ रूपए है। छोटे किसानों को आय सहायता के लिए पीएम- किसान स्कीम का सुचारू संचालन किया जा रहा है, जिसमें 1.58 लाख करोड़ रूपए बिना बिचौलियों के सीधे किसानों के खातों में पहुंचे हैं। 6,850 करोड़ रूपए के खर्च से 10 हजार नए कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) बनाए जा रहे हैं, जिसमें राज्यों को कोई राशि नहीं मिलाना है। इससे किसानों को सामूहिक रूप से काम होने से काफी बचत होगी, लागत घटेगी, टेक्नालाजी का फायदा मिलेगा और उपज के अच्छे दाम मिलेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी कृषि सुधार कानून भी किसानों के व्यापक हितों में लाए है। इनके माध्यम से किसान अपनी कृषि उपज को वहां कहीं भी बेच सकते है, जहां उन्हें उसका बढ़िया दाम मिलेगा। किसान चाहे तो अपने घर से भी उपज बेच सकता है, उन्हें मंडियों के बाहर टैक्स भी नहीं लगेगा। इन कृषि सुधार कानूनों को लेकर लंबे समय तक चर्चा की गई है। इनके माध्यम से कृषि क्षेत्र में लंबे कालखंड से चली आ रही गैप्स समाप्त करने का प्रयत्न किया गया है। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने किसानों को सशक्त करने के लिए सालभर में 16 लाख करोड़ रूपए का ऋण देने का लक्ष्य रखा है और अभी 14 लाख करोड़ रूपए का ऋण प्रवाह किसानों के बीच है। कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने हेतु केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक रूप से डेढ़ लाख करोड़ रूपए से ज्यादा राशि रखी है, जिसका व्यापक फायदा किसानों को दीर्घकाल तक मिलेगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी व सुश्री शोभा करंदलाजे, उप राज्यपाल के सलाहकार श्री फारूक खान, जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सचिव श्री नवीन कुमार चौधरी, डीडीसी चेयरमेन श्री भारत भूषण व अन्य गणमान्यजन मौजूद थे। कुलपति प्रो. जे.पी. शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए शिक्षण, अनुसंधान, विस्तार में वि.वि. के दृष्टिकोण का उल्लेख किया, जिसमें नई शिक्षा नीति, ऑनलाइन शिक्षा मंच, नए संकाय, ओडीओपी योजना, जीन बैंक व सामुदायिक रेडियो की स्थापना प्राथमिकता हैं। 

इससे पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने एकीकृत कृषि प्रणाली, जैव प्रौद्योगिकी स्कूल की नव विकसित प्रयोगशाला का दौरा किया और वि.वि. से जुड़े किसानों, कृषि-स्टार्टअप व केवीकेएस द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के स्टालों का अवलोकन किया। अनुसंधान निदेशक-सह-रजिस्ट्रार डॉ. जग पॉल शर्मा ने आभार माना। 

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