किसानों के लिए नगदी की कमी दूर करेगा साढ़े 16 लाख करोड़ रू. का बजट- श्री तोमर

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द्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में हुई राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन-शासी परिषद की बैठक

दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन के रूप में काम

नई दिल्ली: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम)- शासी परिषद की 16वीं बैठक मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में हुई। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि कोरोना महामारी के संकट काल के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और मार्गदर्शन से कृषि क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि संभव हो पाई है। पिछले लगभग साढ़े छह साल में सरकार ने कृषि उत्पादन व किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक ठोस नीतिगत निर्णय लिए हैं। इसी कड़ी में, हाल ही में पेश आम बजट में कृषि ऋण के लिए किया गया साढ़े 16 लाख करोड़ रू. का प्रावधान किसानों के लिए नगदी की कमी को दूर करेगा। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लिए फरवरी-2020 से अभियान चलाकर 217.75 लाख आवेदन स्वीकृत किए गए और 1,68,368.33 करोड़ रू. के ऋण मंजूर किए गए है, जिससे किसानों को काफी फायदा हो रहा है, वहीं सरकार दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन के रूप में काम कर रही है।

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि कृषि में उत्पादन-उत्पादकता बढ़े व हम अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने के साथ ही दुनिया में भी सहभाग कर सकें, इस दृष्टि से भारत सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। सरकार की किसान हितैषी नीतियों, किसानों के परिश्रम एवं वैज्ञानिकों के अनुसंधान को मिलाकर कृषि क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। दलहन के मामले में काफी अच्छा काम किया गया है, और भी आगे बढ़ने की आवश्यकता है। तिलहन मिशन पर भी काम किया जा रहा है, सरसों की बुवाई बढ़ी है, इसकी निरंतरता बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने राज्यों से अनुरोध किया कि तिलहन-दलहन का उपार्जन भी ठीक प्रकार से हो, इसके लिए राज्य सरकार पूरी चौकसी रखे। किसानों को एमएसपी का पूरा लाभ मिलना चाहिए। श्री तोमर ने बताया कि दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए 150 सीड-हब, तिलहन हेतु 35 सीड हब और पोषक अनाजों के लिए 24 सीड हब स्थापित किए गए हैं। बीज की जरूरत को पूरा करने में ये सीड हब महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

श्री तोमर ने कहा कि किसानी के क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। लगभग 11.75 करोड़ किसानों को देशव्यापी कार्यक्रम के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड नि:शुल्क जारी करने, परंपरागत कृषि विकास योजना के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देने, उर्वरकों की दक्षता बढ़ाने के लिए नीम कोटेड यूरिया, आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय शहद मिशन, कृषि उपज की सुगम आवाजाही के लिए डेढ़ सौ से ज्यादा किसान रेल आदि इसके कुछ प्रमुख उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री जी ने पीएम फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को एक बड़ा सुरक्षा कवच दिया है। इस योजना की शुरूआत से दिसंबर-2020 तक किसानों ने लगभग 19 हजार करोड़ रू. प्रीमियम भरी, जिसके बदले उन्हें लगभग 90 हजार करोड़ रू. का भुगतान दावों के रूप में किया जा चुका है। 

उन्होंने बताया कि 6865 करोड़ रू. के बजट प्रावधान के साथ 10,000 नए एफपीओ बनाने की योजना भी, खासकर छोटे किसानों के लिए क्रांतिकारी साबित होगी। आत्मनिर्भर भारत अभियान में 1 लाख करोड़ के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के जरिये भी गांव-गांव व खेतों तक निजी निवेश द्वारा किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री जी द्वारा किसानों को आय समर्थन के उद्देश्य से पीएम-किसान स्कीम शुरू की गई, जिसमें लगभग पौने 11 करोड़ किसानों को करीब 1.15 लाख करोड़ रू. दिए गए हैं। लगातार कोशिश की जा रही है कि चारों तरफ से योजनाओं के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर काम करें। 

केंद्रीय मंत्री ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन पिछले पांच वर्षों में 18% बढ़कर वर्ष 2014-15 के 252.02 मिलियन टन से वर्ष 2019-20 के दौरान 297.50 मिलियन टन हो गया है, जो उत्पादकता स्तर में 15% की वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य मिलकर चुनौतियों का मुकाबला करते हुए लक्ष्य पूरा करते हुए सफलता की ओर आगे बढ़ें। बैठक में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु व त्रिपुरा की ओर से प्रेजेन्टेशन दिया गया। बैठक में राज्यों के प्रधान सचिव (कृषि), सचिव (कृषि), एनएफएसएम के निदेशक सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए। प्रारंभ में कृषि सचिव  संजय अग्रवाल व संयुक्त सचिव (फसल और तिलहन) शुभा ठाकुर ने जानकारियां दी। संचालन व आभार प्रदर्शन कृषि आयुक्त  एस.के. मल्होत्रा ने किया।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन ने देश में खाद्यान्न, दलहन, तिलहन व नकदी फसलों के उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मिशन कार्यक्रम को चावल, गेहूं व दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए वर्ष 2007-08 में शुरू किया गया था। पिछले 6 साल में और अधिक फसलों व राज्यों को शामिल करने के लिए इसका विस्‍तार व नवीनीकरण किया गया है। वर्ष 2014-15 के बाद से मोटे अनाज व वाणिज्यिक फसलों अर्थात कपास, जूट व गन्ने को नवीनीकृत एनएफएसएम में शामिल किया गया है। 2019-20 से तिलहन व पाम ऑयल इसका हिस्सा बन गए।