‘‘उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक कि अपने लक्ष्य तक न पहुंच जाओ’’

राष्ट्रीय युवा दिवस 2021 और स्वामी विवेकानंद की 158 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक ऑनलाइन व्याख्यान


नई दिल्ली 

नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत (शिक्षा मंत्रालय के तहत) ने राष्ट्रीय युवा दिवस 2021 और स्वामी विवेकानंद की 158 वीं जयंती के अवसर पर एक ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया, जिसे पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। व्याख्यान का विषय ‘स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनके संदेश की समकालीन आधुनिक जगत में प्रासंगिकता’ था।

मुख्य अतिथि स्वामी कीर्तिप्रदानंद, रजिस्ट्रार, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान, ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद के जीवन और संदेश के बारे में बात की और उनके जीवन के गौरवशाली और प्रेरक संदेश पर अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा, "स्वामी विवेकानंद, आधुनिक भारत के सच्चे मार्गदर्शक थे. आज हमारा देश आज़ाद है. हमारी ताकत हर दिन बढ़ रही है लेकिन आज भी इस देश में अलग-अलग धर्मों के लोग अपनी भिन्नता को भुलाकर कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं, यह स्वामी जी की वजह संभव हुआ है.'' 

स्वामी कृति प्रदानंद ने स्वामी विवेकानंद की जीवन यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके जीवन की शुरुआत से लेकर शिकागो में प्रथम विश्व धर्म संसद में ऐतिहासिक भाषण तक के सफर की कहानी साझा की. स्वामी विवेकानंदजी उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप से पहुंचे। एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला किंतु उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गए। फिर तो अमेरिका में उनका बहुत स्वागत हुआ। वहां इनके भक्तों का एक बड़ा समुदाय हो गया।

''यदि तुम्हें हिन्दुस्तान को समझना है तो विवेकानंद को समझो'' स्वामी विवेकानंद के बारे में रविन्द्र नाथ टैगोर के कहे इन शब्दों से  गोविन्द शर्मा (अध्यक्ष, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत) ने अपने व्याख्यान की शुरुआत की. उन्होंने कहा, आज के युवाओं को स्वामी जी के जीवन से बहुत कुछ सीखने और समझने की ज़रुरत है. उन्होंने आगे कहा- आज जो संकट पूरे विश्व के सामने है, वो चाहे सामाजिक, आर्थिक, राजनितिक या व्यवहारिक किसी भी रूप में हो, उसमें स्वामी जी का स्मरण और उनके कहे हुए शब्दों को याद करने और बार-बार दोहराने की आवश्यकता है.'

 युवराज मालिक, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक ने स्वामी कृतिप्रदानंद जी का आभार व्यक्त किया और युवाओं के लिए कही स्वामी विवेकानंद की बात को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि, स्वामी जी कहते थे तुम्हें गीता पढ़ने से भगवान् मिलें न मिलें लेकिन मन लगाकर फुटबॉल खेलोगे तो ज़रूर मिल जायेंगे।' इस बात से यह सीख मिलती है कि आप जो भी काम करते हैं उसे दिल लगाकर करें तभी सफ़लता मिलेगी। इन्हीं वाक्यों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. 

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