ईपीसीएच ने रेलवे व नौवहन मंत्रालयों के सामने उठाया कंटेनरों की कमी का मुद्दा

चालू वित्त वर्ष में अब तक हस्तशिल्प निर्यात में आई 34.75 फीसदी गिरावट 


ग्रेटर नोएडा। ईपीसीएच के अध्यक्ष रवि के पासी ने कहा कि हस्तशिल्प निर्यात की गति को बनाए रखने, देश के लिए बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जित करने और लाखों लोगों को जीविका प्रदान करने के लिए यह जरूरी है कि कंटेनर की उपलब्धता और आवाजाही को सुनिश्चित हो। 


रवि के पासी ने निर्यात के लिए कंटेनरों की कमी की ओर रेलवे वाणिज्य और जहाजरानी मंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कोविड-19 संकट के परिणामस्वरूप हस्तशिल्प निर्यात घट गया है। अप्रैल-चालू वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 34.75 फीसदी की गिरावट आई है। अनलॉक-1 से 5 के तहत सरकार की छूट के बाद, व्यावसायिक गतिविधि फिर से शुरू हो गई है और निर्यात होने लगे हैं। इसलिए इस महत्वपूर्ण चरण में शिपमेंट में कोई भी व्यवधान सभी हितधारकों और निर्यातकों के लिए एक गंभीर झटका साबित हो सकती हैं। 


उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प मालवाहक शिपमेंट से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र में से एक है। उन्होंने रिपो चार्जेस का मुद्दा भी उठाया, जिसके तहत निर्यातक को 10,000 से लेकर 20000 रुपये तक की धनराशि खर्च कर कंटेनर दूसरे आईसीडी से मंगाना पड़ता है। इसके अलावा उन्होंने शिपिंग शुल्क में 20 से 40 फीसदी की वृद्धि का मुद्दा भी रेलवे वाणिज्य और नौवहन मंत्रालयों और मंत्रियों के समक्ष रखा। ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने सरकार से माल के शिपमेंट से संबंधित मूल्य निर्धारण, नियमों और शर्तों और अन्य प्रावधानों को नियंत्रित और निगरानी करने के लिए संसद के अधिनियमन के माध्यम से नियामक प्राधिकरण की स्थापना पर विचार करने का आग्रह किया।