कौन है वीर नर्मद जिनकी याद में मनाया जाता है वर्ल्ड गुजराती डे

गुजरात के महान साहित्यकार वीर नर्मद की जयंती के दिन हर साल 24 अगस्त को विश्व गुजराती दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने विश्व भर के गुजरातियों को शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा "जहां भी गुजराती रहते हैं, वो जगह गुजरात बन जाती है। आइए, गुजरात को उसकी पहचान और संवेदनशीलता से सार्थक करें। हैप्पी वर्ल्ड गुजराती डे”। पीएम मोदी के गुजरात के महान साहित्यकार वीर नर्मद को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा ‘वीर नर्मद एक दूरदर्शी रचनाकार, दार्शनिक, सामाजिक न्याय के अग्रणी थे। कवि नर्मद ने अपनी निडरता और रचनात्मकता को 'डांडियो' के माध्यम से पेश किया’। सीएम रूपाणी ने भी अपने ट्विटर हैंडल से साहित्यकार वीर नर्मद को याद करते हुए सभी गुजरातियों से कहा “जय जय गरवी गुजरात, मैं वीर कवि नर्मद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहता हूं, जिन्होंने दुनिया भर में गुजरातियों के बीच 'गुजराती उत्थान' को जागृत किया है, गुजरात की पहचान, साहित्यकार, नाटककार, संपादक, शोधकर्ता और समाज सुधारक वीर नर्मद गुजरात की संस्कृति के अभिन्न अंग हैं”।


गुजराती साहित्य को अंतरराष्ट्रीय बनाने वाले वीर नर्मद


कवि नर्मद गुजराती भाषा के युग प्रवर्तक माने जाने वाले रचनाकार थे। उनका जन्म सूरत के ब्राह्मण परिवार में 24 अगस्त, 1833 ई. को हुआ था। नर्मद के पिता लालशंकर मुम्बई में निवास करते थे। नर्मद की माध्यमिक शिक्षा वहीं के एल्फिंस्टन इन्स्टिट्यूट में संपन्न हुई। उनका पूरा नाम नर्मदाशंकर लाल शंकर दवे था, लेकिन रचनाएँ उन्होंने 'नर्मद' नाम से की हैं।


उस समय की प्रथा के अनुसार 11 वर्ष की उम्र में ही नर्मद का विवाह हो गया था। सूरत की प्रारंभिक शिक्षा के बाद जब वे मुम्बई में पढ़ाई कर रहे थे तभी अपने ससुर के कहने पर अपना परिवार संभालने के लिए उन्हें वापस आकर सूरत में 15 रुपए मासिक वेतन के लिए अध्यापक का काम करना पड़ा। 


नर्मद जब 22 साल के थे तब उन्होंने अपनी पहली कविता लिखी थी। उसके बाद उन्होंने साहित्य को समझना शुरू कर दिया। मुंबई में कुछ समय तक बतौर शिक्षक काम करने के बाद उन्होंने वह काम छोड़कर 23 नवंबर 1858 को लिखने की ठान ली। 24 सालों में वो पूरी तरह से साहित्य की सेवा में लगे रहे। जिस तरह हिंदी साहित्य में आधुनिक काल की शुरुआत को भारतेंदु युग कहा जाता है वैसे ही गुजराती साहित्य के पहले कालखंड को “नर्मद युग” के नाम से जाना जाता है। नर्मद ने गुजराती साहित्य को विश्व भर में समृद्धि दिलाई। उन्होंने विश्व को गुजराती साहित्य का भंडार दिया है। गद्य, नर्मगद्य, नर्मकोश, नर्मकथाकोश, सारशांकुतल, द्रौपदी दर्शन, कृष्णकुमारी, बालकृष्ण विजय उनके कुछ विशेष लेखन कार्य हैं। उनकी अधिकांश कविताएँ 1855 और 1867 के बीच लिखी गईं। 


साहित्यकार नर्मद ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा समाज सुधारक के रूप में काम किया। उन्होंने 'बुद्धिवर्धक' सभा की स्थापना की थी। नर्मद जो कहते उस पर स्वयं भी अमल करते थे। एक बार सामाजिक बुराइयों का विरोध करते हुए किसी ने उनसे मज़ाक में कहा था कि तुम तो कहते हो वो करते भी हो। बाद में नर्मद ने स्वयं एक विधवा से विवाह किया। गुजराती साहित्य को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने वाले रत्न नर्मद का निधन मुंबई में 26 फरवरी 1886 को हुआ। 


पद्मश्री से सम्मानित जाने माने साहित्यकार और पत्रकार श्री विष्णु पांड्या, वीर नर्मद के बारे में बताते हैं कि ‘गुजरात का सबसे प्रसिद्ध गीत जय, जय गरवी गुजरात वीर नर्मद जी ने ही लिखा था। बहुत कम ऐसे लोग होंगे जिन्होंने अपने साहित्य और कविताओं में गुजरात का ऐसा अनोखा वर्णन किया होगा जैसा वीर नर्मद जी ने किया था। वीर नर्मद कई विषयों में सर्वप्रथम थे। उन्होंने ही सबसे पहले गुजराती शब्दकोष तैयार किया था। उनकी ऑटोबायोग्राफी 'मारी हकीकत' गुजराती की पहली आत्मकथा होने का गौरव प्राप्त है। वीर नर्मद ने अपने पत्रकार मित्र कर्षन जास मूलजी के साथ मिलकर गुजरात में सामाजिक सुधार के लिए अपार काम किया। उन्होंने ‘डांडियो’ अख़बार के ज़रिए उन्होंने गुजरात में फैले सांप्रदायिक दूषण के ख़िलाफ़ जंग छेड़ी”। वीर नर्मद से जुड़े एक किस्से में बारे में विष्णु पांड्या ने बताते हैं कि जिस दिन उन्होंने गरीबी होने के बावजूद अपनी अध्यापक की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था और घर आकर सरस्वती मां को साक्षी मानकर जीवनभर के लिए कलम को अपना साथी बना लिया था”। विष्णु पांड्या गुजराती , हिदीं, संस्कृत, सिंधी, ऊर्छू, कच्छी भाषाओं की अकादमी में चेयरमैन पद पर कार्यरत हैं और 107 किताबें लिख चुके हैं। 


गुजरात का वीर नर्मद विश्वविद्यालय


गुजरात के सूरत में स्थित वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय का नाम कवि नर्मद के नाम पर ही रखा गया है। इसकी स्थापना 1967 में हुई थी। यहां रसायन विज्ञान, सोशियोलॉजी, अंग्रेजी, गणित, फिज़िक्स के अलावा पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, रूलर स्टडीज़, एक्वेटिक बायोलॉजी भी पढ़ाई जाती है।