विकास के कार्यों में जनता के पैसों का सदुपयोग होना चाहिए- केंद्रीय मंत्री श्री तोमर

ग्रामीण विकास कार्यक्रम में जोखिम आधारित आंतरिक लेखा परीक्षा को मजबूत करने पर राष्ट्रीय संगोष्ठी ग्रामीण विकास के लिए आवंटित धनराशि में बीते पांच साल में लगभग दो गुना वृद्धि


नई दिल्ली । ग्रामीण विकास कार्यक्रम में जोखिम आधारित आंतरिक लेखा परीक्षा को मजबूत करने पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि देश में हो रहे विकास के सभी कार्यों में जनता के पैसों का सदुपयोग होना चाहिए। श्री तोमर ने कहा कि भारत सरकार द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए आवंटित धनराशि में पिछले पांच साल में करीब दो गुना से भी अधिक वृद्धि की गई है। जो राशि वर्ष 2016-17 में करीब 77,000 करोड़ रूपए थी, वह वर्ष 2020-21 में 1,21,000 करोड़ रू. हो गई। इसके अलावा मनरेगा के लिए, कोविड-19 वैश्विक महामारी से उत्पन्न चुनौती का सामना करने के लिए इस साल 40 हजार करोड रू. की अतिरिक्त धनराशि देने की घोषणा भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई है।


श्री तोमर ने कहा कि यह ग्रामीण विकास के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करने की, केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है। उपलब्ध धनराशि का समुचित प्रबंधन तथा पूर्ण सदुपयोग करना हमारा सम्मिलित दायित्व है। सभी योजनाओं का लाभ जनता को मिलें तथा उनके जीवन स्तर में प्रगति हों, इसके लिए योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान गहन निगरानी तथा सतत् रिव्यू की आवश्यकता है। संगोष्ठी में, ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध धनराशि के वित्त प्रबंधन में आतंरिक अंवेक्षण के महत्वपूर्ण योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर वित्तीय प्रबंधन सूचकांक-ग्रामीण विकास को लांच किया गया।


संगोष्ठी को केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी में ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दस राज्यों के उच्चाधिकारियों ने प्रेजेन्टेशन दिया। संगोष्ठी में शामिल हुए राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, ओडिसा, तेलंगाना, कर्नाटक और असम।


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