विदेशी ग्राहकों के लिए भारत आकर्षक क्रय केंद्र बनकर उभरा : राकेश कुमार

आईएचजीएफ दिल्ली मेले में 'सोर्सिंग इंडिया-द अवेकेंड टाइगरÓ विषय पर वेबिनार 
नई दिल्ली। कोविड-19 वैश्विक महामारी का एक खतरनाक पहलू ये भी है कि वो दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक आर्थिक एकीकरण से दूर ले जा रहा है। इस बाबत हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के महानिदेशक राकेश कुमार ने कहा कि अब नीति निर्धारक और बिजनेस लीडर्स इस सवाल पर भी मंथन कर रहे हैं कि ग्लोबल सप्लाई चेन कितनी लंबी होनी चाहिए और उसे कितना बड़ा बनाना उचित होगा। एक ऐसे वातावरण में, जहां साझेदारियां अनिश्चित हैं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अपने न्यूनतम स्तर पर जाने को विवश है, आज दुनियाभर के देश इस बात पर विचार कर रहे हैं कि उन्हें अब एक दूसरे पर अपनी आर्थिक निर्भरता को न्यूनतम स्तर पर लाना चाहिए। 


राकेश कुमार ने कहा कि कोविड-19 महामारी से पहले से ही विश्व एक संक्रमण काल में है, जिसमें हर देश अपनी राजनीतिक और आर्थिक नीतियों पर पुनर्विचार कर उन्हें नया रूप दे रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत कर सकें। इसका परिणाम ये हुआ है कि विभिन्न देशों में फैला सप्लाई नेटवर्क यानी ग्लोबल वैल्यू चेन की विकास गति थमने सी लगी है। इस महामारी ने विश्व की इस चिंता को एक बार फिर से गहरा दिया है कि देशों की सप्लाई चेन का विस्तार बहुत ज्यादा हो चुका है। वैश्विक इतिहास में ये ऐसा समय है, जब दुनिया की अर्थव्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गयी है, जहां दूसरे देश या संस्थाओं पर निर्भरता का डर लगातार बढ़ रहा है।
  
मेले के प्रेसीडेंट नीरज खन्ना ने कहा कि ऐसी वैश्विक परिस्थितियों में भारत खुद को कैसे वैश्विक स्तर पर घरेलू, लाइफ स्टाइल, फैशन, फर्नीचर और टेक्सटाइल के सप्लायर और दुनिया के सबसे अहम देश के तौर पर स्थापित करे, इसे लेकर आईएचजीएफ दिल्ली मेले (वर्चुअल) के 49वें संस्करण में एक वेबिनार का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि सोर्सिंग इंडिया-द अवेकेंड टाइगर विषय पर हुए वेबिनार में इस परिस्थिति पर गहन मंथन किया गया। 
 
इस मौके पर हस्तशिल्प विकास आयुक्त शांतमनु, एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुधीर गर्ग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में एडिशनल डीजीएफटी अजय कुमार श्रीवास्तव, भारतीय दूतावास, वाशिंगटन डीसी में मंत्री (वाणिज्य) डॉक्टर मनोज के. महापात्र, कनाडा के सीजीआई वैंकूवर में काउंसल मंजीश ग्रोवर, इंडिया अर्जन्टीना फ्रेंडशिप सोसायटी के प्रेसीडेंट अल्बर्टो गुस्तावो पोरसेल, संयुक्त राज्य अमरीका की जीएफएच एंटर प्राइजेस इंक के प्रेसीडेंट डेविड मून्स, अमरीका के प्रोडक्ट एंड मर्चेंडाइजिंग क्रिएटिव को-ऑप की सीनियर वाइस प्रेसीडेंट तामरा ब्राएंट, ब्राजील से एटिक नीलेश बर्रेटो, सोर्सिंग एंड एशिया आर्गनाइजेशन के वाइस प्रेसीडेंट टिम ओक्स, जर्मनी की जीएमबीएच एंड कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, फिंक, जॉर्ज मेस्सिंग, ईपीसीएच के चेयरमैन रवि के. पासी, बीएए के चेयरमैन विशाल ढींगरा, ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आरके वर्मा आदि मौजूद रहे।  


बाइंग एजेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन विशाल ढींगरा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि वह ईपीसीएच के आभारी हैं, जिसने ग्राहकों की जरूरतों को भारत सरकार के प्रतिनिधियों तक पहुंचाकर ऐसा अवसर उपलब्ध कराया है, जिससे उनका फायदा तो होगा ही, हस्तशिल्प सेक्टर के उद्यमी और कारीगरों को एक ऐसा मंच मिल सकेगा, जिससे वे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी दामों पर अपना उत्पाद बेच सकेंगे। बीएए की जनरल सेक्रेटरी आंचल कंसल ने पैनल डिस्कशन का संचालन किया। 
 
दुनियाभर से करीब 530 प्रतिभागियों ने इस वेबिनार में हिस्सा लिया और भारतीय हस्तशिल्प की गुणवत्ता और विशिष्टता पर अपने विचार रखे। इन प्रतिभागियों को भारतीय निर्यातकों के साथ किए गए काम का अनुभव साझा करने का मौका दिया गया। संयुक्त राज्य अमरीका और कनाडा में स्थित दूतावासों के प्रतिनिधियों ने भी इस वेबिनार में शिरकत की और अपने विचार साझा किए। 


ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने कहा कि दुनिया का करीब-करीब हर देश वर्तमान और भविष्य दोनों में भारत को एक महत्वपूर्ण क्रयकेंद्र यानी सोर्सिंग हब के तौर पर देख रहा है। ऐसी स्थिति में देश से होने वाली खरीद लगातार बढ़ रही है। वेबिनार का आयोजन संयुक्त रूप से बाइंग एजेंट एसोसिएशन और हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद ने किया था।