पांच दिन की बैंकिंग और पेंशन अपडेशन की मांग के बिना बैंक कर्मचारियों का वेतन समझौता अधूरा

 नई दिल्ली : बैंक कर्मचारियों के वेतन समझौता के लिए चली लम्बी लड़ाई के बाद इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक यूनियंस के बीच 22 जुलाई को बहुत से मुद्दों पर सहमति बन गई और दोनों पक्षों ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं जिसके अनुसार 90 दिन में बाकि सभी विषयों पर चर्चा करके फ़ाइनल समझौता हो जाना चाहिए।


इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक यूनियंस की कुछ मांगों पर अभी भी सहमति नहीं बनी है लेकिन इन मांगों के बिना 10 लाख बैंक कर्मचारियों और 5 लाख रिटायर्ड बैंक पेंशनर्स के लिए वेतन समझौता अधूरा होगा :  पांच दिन की बैंकिंग : बैंक यूनियंस लम्बे समय से पांच दिन की बैंकिंग की मांग कर रहे हैं। 10 वें समझौते में यूनियंस की मांग को सरकार ने आधा माना और 1 सितम्बर 2015 से बैंक एक महीने में दूसरे और चौथे शनिवार को बंद होने शुरू हो गये। हमारी मांग है कि सरकार को सभी शनिवार को बैंक में अवकाश रखना चाहिए। क्योंकि रिजर्व बैंक, शेयर मार्किट और अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग और मार्किट भी शनिवार को बंद रहते हैं। इसके अतिरिक्त आज बैंकिंग के कई विकल्प जैसे ए.टी.एम, मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग और कई तरह के पेमेंट गेट वे उपलब्ध हैं। सरकार के कार्यलय भी सप्ताह में पांच दिन काम करते हैं। यूनियंस कोई काम के घंटे कम करने के लिय मांग नहीं कर रही । हमारा कहना है की यदि सप्ताह में पांच दिन की बैंकिंग होगी तो बंद होने वाले दिनों के समय को पांच दिनों में बढ़ा दिया जायेगा। पांच दिन की बैंकिंग से जहाँ एक और बैंकों के खर्चों में कमी आयगी वहीँ कर्मचारियों को भी सप्ताह में दो दिन के अवकाश से उनके काम करने की गुणवत्ता बढ़ेगी। इसलिय NOBW की सरकार से मांग है कि पांच दिन की बैंकिंग को लागू किया जाये।  पेंशन अपडेशन : 1995 में बैंकों में पेंशन स्कीम केंद्र सरकार की पेंशन स्कीम की लाइन पर ही आई थी। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन हर पे कमीशन के साथ अपडेट हो जाती है तथा एक आयु के बाद उसका प्रतिशत भी बढ़ जाता है लेकिन बैंक कर्मचारियों के साथ ऐसा नहीं है, कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर जो पेंशन लागू होती है जीवन भर वही पेंशन रहती है। रिजर्व बैंक के कर्मचारियों की पेंशन का भी रिविजन हो चुका है। फिर बैंक कर्मचारियों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों ? बैंकों में आज के समय 5 लाख सेवानिवृत्त पेंशनर्स है और 5 लाख ही अभी बैंक की सेवा में हैं। जबकि बैंक कर्मचारियों की पेंशन के लिये सभी बैंकों में पेंशन फण्ड बने हुए हैं और सभी पेंशन फंडों की स्थिति भी बहुत अच्छी है। सरकार को इसके लिय कोई पैसे भी नहीं उपलब्ध करवाने.


 NOBW की मांग है कि सरकार बैंक कर्मचारियों की पेंशन अपडेशन की मांग को भी स्वीकार करे।  7.75% स्पेशल अलाउंस का बेसिक में मर्जेर : 10वेन वेतन समझोते के समय इंडियन बैंकस एसोसिएशन ने बेसिक पर 7.75 % राशि को स्पेशल अलाउंस के रूप में दिया था जिसपर महंगाई भत्ता तो मिलता है लेकिन उसपर न तो पी.एफ. कटता है न ही नैशनल पेंशन स्कीम के कर्मचारियों का योगदान जाता है और न ही रिटायर्मेंट पर मिलने वाले लाभ जैसे पेंशन की गणना के लिए इसे बेसिक में ऐड किया जाता है। इससे कर्मचारियों को भारी आर्थिक नुक्सान हो रहा है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 6वें पे कमीशन में जो ग्रेड पे मिलता था और बाद में 7वें पे कमीशन में उसे बेसिक पे में शामिल कर लिया गया। NOBW भी मांग है की इस 7.75 % स्पेशल अलाउंस को बेसिक पे में शामिल किया जाये। NOBW सरकार से मांग करती है कि बैंक कर्मचारियों को निराश न करे और इन मांगों पर भी अपनी सहमति जताकर इन्हें 11वें वेतन समझौता में शामिल करे । यदि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और सरकार बैंक कर्मचारियों की यह मांगें नहीं मानती तो 10 लाख बैंक कर्मचारियों और 5 लाख बैंक पेंशनर्स के साथ अन्याय होगा और अन्याय होने पर कर्मचारी और रिटायर्ड पेंशनर्स चुप नहीं बैठेंगे और वेतन समझौता होने के बाद भी इस लड़ाई को जारी रखेंगे।