3 राज्यों को जोड़ने वाले म.प्र. का ड्रीम प्रोजेक्ट चंबल एक्सप्रेस-वे की लंबाई होगी 404 किलोमीटर

चंबल एक्सप्रेस-वे के संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री गड़करी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक


बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान, केंद्रीय मंत्री श्री तोमर एवं सांसद श्री सिंधिया भी शामिल


पूरे चंबल क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट से नई औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात होगा- श्री तोमर


मुरैना, श्योपुर, भिंड सहित इलाके की दशा-दिशा प्रोजेक्ट से पूर्णतः बदल जाएगी-  तोमर


प्रोजेक्ट पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान, भारतमाला परियोजना में शामिल करेंगे- गड़करी


नई दिल्ली । मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश को जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी चंबल एक्सप्रेस-वे की बहुप्रतीक्षित परियोजना के संबंध में शनिवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज मंत्री व क्षेत्रीय सांसद नरेंद्र सिंह तोमर एवं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रमुख रूप से शामिल हुए।


     केंद्रीय मंत्री श्री गड़करी ने बैठक में इस प्रोजेक्ट पर सैद्धांतिक रूप से तत्काल सहमति जताने के साथ ही इसे भारतमाला परियोजना में शामिल करने की प्रक्रिया के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया। बैठक में राजस्थान के उच्चाधिकारी भी मौजूद थे, जिन्हें श्री गड़करी ने महीनेभर में उनके स्तर पर अलाइनमेंट सहित अन्य स्वीकृतियां देने को कहा। श्री गड़करी ने कहा कि राजस्थान पर इस प्रोजेक्ट का कोई वित्तीय भार नहीं आना है, इसलिए स्वीकृतियां देने में कोई दिक्कत या विलंब नहीं होना चाहिए।


     श्री गड़करी ने मुख्यमंत्री श्री चौहान से भी समय-सीमा में सभी आवश्यक अनुमतियां देने का आग्रह किया। श्री गड़करी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से बैकवर्ड एरिया में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आएगा, जो कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सोच के अनुरूप है। उन्होंने इस एक्सप्रेस-वे के साथ-साथ एकीकृत औद्योगिक शहर एवं गांव विकसित करने की योजना बनाने का सुझाव भी दिया।


           मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह म.प्र. का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके लिए काफी तैयारियां हो चुकी है। सर्वे भी हो गया है। राज्य शासन जमीन अधिग्रहण बहुत जल्द करके हैंडओवर कर देगा। मुआवजे पेटे जमीन के बदले जमीन देने की भी तैयारी कर ली गई है। अलाइनमेंट तय होते ही सरकारी जमीन हफ्तेभर में प्रोजेक्ट के लिए दे देंगे। फारेस्ट क्लीयरेंस में भी देर नहीं लगेगी। पूरे चंबल संभाग की हालत इससे बदल जाएगी। एक बड़ा इंडस्ट्रीयल कारिडोर यहां बनेगा। प्रोजेक्ट की वे प्रतिदिन मानिटरिंग करेंगे, इस संबंध में एक कमेटी भी बना दी गई है। मटेरियल हेतु रायल्टी फ्री कर दी गई है। प्रोजेक्ट क्षेत्र में उद्योग लगाने वालों को प्रोत्साहित करने हेतु म.प्र. सरकार आवश्यक छूट व सहायता प्रदान करेगी।


     केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि सबसे पहले वर्ष 2017 में इस प्रोजेक्ट का विचार उठा और वर्ष 2018 में श्री गड़करी ने इसे प्रारंभ करने की घोषणा की। बीच में, तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार के वक्त कुछ विलंब हुआ, लेकिन अब सभी की रूचि से फिर से इस महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन की बारी आई है।


     श्री तोमर ने कहा कि इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट से एक नई औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात होगा। श्री गड़करी से श्री तोमर ने इसकी स्वीकृति तत्काल देने का आग्रह किया, जिस पर उन्होंने बैठक में ही सहमति प्रदान कर दी। श्री तोमर ने इस पर आभार जताते हुए कहा कि चंबल के इस पिछड़े क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे की परियोजना से आर्थिक विकास की लहर आएगी।


     श्री तोमर ने कहा कि भिंड, मुरैना, श्योपुर जिले के साथ आसपास के पूरे इलाके की दशा-दिशा इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बदल जाएगी। एक्सप्रेस-वे में ही दोनों ओर लॉजिस्टिक पार्क, औद्योगिक केंद्र, कृषि उत्पाद केंद्र, खाद्य प्रसंस्करण केंद्र, स्मार्ट सिटीज, शिक्षा केंद्र, रिसॉर्टस एवं मनोरंजन केंद्र आदि प्रस्तावित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास तेजी से संभव हो सकेगा।


      श्री सिंधिया ने प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह वास्तव में ग्रीन फील्ड नहीं है, बल्कि ब्राउन फील्ड प्रोजेक्ट है क्योंकि अभी टू लेन रोड है। श्री सिंधिया ने अलग-अलग टेंडर बुलाने की बात का समर्थन किया, ताकि काम तेजी से हो सकें।  


     बैठक में इस संपूर्ण प्रोजेक्ट की प्रस्तुति दी गई। इसमें बताया गया कि इसकी अनुमानित लागत 7,532 करोड़ रूपए रहेगी। चंबल एक्सप्रेस-वे की प्रारंभिक अनुमानित लंबाई 404 किलोमीटर रहेगी। प्रोजेक्ट में 309 कि.मी. हिस्सा म.प्र., 78 कि.मी. राजस्थान व 17 कि.मी. उ.प्र. में रहेगा। एनएचएआई अधिकारी ने बताया कि यह फोरलेन परियोजना रहेगी, जिसे बाद में आठ लेन किया जा सकेगा। एक्सप्रेस-वे पिछड़े क्षेत्र-बीहड़ से होकर बनेगा। इटावा से कोटा व्हाया भिंड, मुरैना, श्योपुर जिले के गांवों से होकर मार्ग गुजरेगा, जिससे दूरी लगभग 40 किलोमीटर कम होकर यात्रा के समय की बचत होगी। एक्सप्रेस-वे के बनने से चंबल के पिछड़े इलाके विकसित होंगे। इस मार्ग का काफी हिस्सा (309 कि.मी.) चंबल नदी के किनारे से होकर बनेगा। यह मार्ग स्वर्णिम चतुर्भुज दिल्ली-कोलकाता खंड को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा। इससे भिंड, मुरैना, श्योपुर क्षेत्र को भी सीधा लाभ होगा।


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