आत्मनिर्भर भारत में ऊर्जा क्षेत्र का बहुत अधिक महत्व:आरके सिंह

आत्मनिर्भर भारत के लिए निर्माण और रोजगार सृजित करने की जरूरत 

 

घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए मेक इन इंडिया नीति को अपनाने की अपील 

 

नई दिल्ली। केंद्रीय विद्युत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा और कौशल विकास एवं उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री आरके सिंह ने ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निर्माण और पारेषण विकासकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने भारत में वस्तुओं और सेवाओं के विनिर्माण को बढ़ावा देने और रोजगार सृजित करने के लिए 'आत्मानिभर भारतÓ अभियान के महत्व पर जोर दिया।

 

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि डीजीसीआई (वाणिज्यिक खुफिया विभाग के महानिदेशालय) द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में दिये गए आयात के मदवार मात्रा ब्यौरे से यह देखा गया है कि ट्रांसमिशन लाइन टॉवर, कंडक्टर, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, कैपेसिटर, ट्रांसफार्मर, केबल, इन्सुलेटर और फिटिंग आदि जैसे कई उपकरण जिनके संबंध में घरेलू विनिर्माण क्षमता मौजूद है, उनका अभी भी आयात किया जा रहा है। इस बात पर जोर दिया गया कि मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन देने और आयात निर्भरता को कम करने के लिए यह आवश्यक है कि पारेषण, तापीय, हाइड्रो, वितरण, नवीकरणीय के विकास करने वाले आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय अभियान में शामिल रहे और पूर्ण सहयोग के साथ भारत सरकार की मेक इन इंडिया नीति को अपनाएं।

 

आरके सिंह ने कहा कि ऊर्जा एक संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि हमारे सभी संचार, विनिर्माण, डेटा प्रबंधन और सभी आवश्यक सेवाएं ऊर्जा की आपूर्ति पर निर्भर करते हैं और कोई भी मैलवेयर इस व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, आत्मनिर्भर भारत में ऊर्जा क्षेत्र का बहुत अधिक महत्व है। उन्होंने सभी विकासकों से आग्रह किया कि ऐसे किसी भी उपकरण/ सामग्री/ सामान का आयात नहीं किया जाए, जिसके लिए पर्याप्त घरेलू क्षमता उपलब्ध हो।

 

घरेलू क्षमता उपलब्ध न होने वाली वस्तुओं और सेवाओं के संबंध में अगर आयात अनिवार्य है, तो इसे केवल 2-3 वर्षों की निश्चित समयावधि के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। ताकि इस दौरान इन वस्तुओं के स्वदेशी विनिर्माण के लिए कर प्रोत्साहन/ स्टार्ट-अप्स/ विक्रेता विकास/ अनुसंधान और विकास को सहायता प्रदान करने के माध्यम से एक नीति को सक्षम बनाते हुए अगले 2-3वर्षों में इन सभी मदों का घरेलू स्तर पर विनिर्माण किया जा सके। इस अवधि के दौरान, आयातित सामानों की भारतीय मानकों के अनुरूप भारतीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाएगी और इसमें त्रुटि की उपस्थिति की भी जांच की जाएगी।

 

आयात के लिए आवश्यक उपकरणों/ वस्तुओं के संबंध में, पूर्व संदर्भित देशों से ऐसे उपकरणों/ वस्तुओं का आयात सिर्फ विद्युत मंत्रालय/ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा हमारे देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा है। संचार, डेटा सेवाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, लौजिस्टिक्स, रक्षा और विनिर्माण आदि सहित सब कुछ ऊर्जा क्षेत्र पर निर्भर करता है। इसलिए हमारे देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम करने की आवश्यकता है।

 

केंद्रीय मंत्री ने बैठक के दौरान सौर मॉड्यूल, सौर सेल और सौर इनवर्टर पर अगस्त 2020 से प्रारंभ होने वाले बेसिक सीमा शुल्क (बीसीडी) को लागू करने के मंत्रालय के प्रस्ताव की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीसीडी के संबंध में एक स्पष्ट घोषणा की जाएगी, ताकि सरकारी की नीति के विषय में कोई अनिश्चितता न हो। इसके अतिरिक्त, नवीकरणीय ऊर्जा के संबंध में मॉडल और निर्माताओं की अनुमोदित सूची को पूर्व घोषणा के अनुसार एक अक्टूबर, 2020 से प्रभावी बनाया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी सौर ऊर्जा परियोजनाएं के लिए सौर सेल्स और सौर मॉड्यूल एवं अन्य उपकरणों की खरीद, जिसके लिए मानक बोली दिशानिर्देशों के अनुसार बोली लगाई जाती हैं, उन्हें अनुमोदित सूची में आने वाले निर्माताओं से क्रय किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पेएफसी), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (आरईसी) और इंडियन रिन्यूएवल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (आईआरईडीए) के माध्यम से वित्त पोषण को इस तरह से तय किया जाएगा कि घरेलू स्तर पर निर्मित उपकरणों का उपयोग करने वाले विकासकों से कम ब्याज दर वसूल की जाए।

 

उन्होंने हाल ही में विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों में एक एफडीआई सेल और एक परियोजना विकास प्रकोष्ठ के गठन का भी उल्लेख किया। एफडीआई सेल भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश प्रस्तावों की जांच करेगा। परियोजना विकास प्रकोष्ठ निवेश योग्य परियोजनाओं को तैयारी रखेगा, ताकि निवेश की प्रक्रिया शीघ्र हो सके। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कुछ वस्तुओं के आयात के लिए रियायती सीमा प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था को भी बंद किया जाएगा, जिसके विषय में अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे।

 

केंद्रीय मंत्री के साथ बातचीत के दौरान, विकासकों ने भारत में ऊर्जा क्षेत्र की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिसमें नीति की निश्चितता, पूंजीगत वस्तुओं के आयात की सुविधा के लिए उपयुक्त शासन और निर्माताओं को ऊर्जा उपकरणों के विनिर्माण के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर वित्त और ऊर्जा की उपलब्धता की आवश्यकता शामिल है। उन्होंने अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को प्रोत्साहन और अनुबंधों की शुचिता बनाए रखते हुएनए और पुराने निवेशों में स्पष्टता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कुछ विकासकों ने इस बात पर भी जोर दिया कि मौजूदा परियोजनाओं के रखरखाव और पूर्ण देखभाल के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता विकसित और लागू होने तक आवश्यक महत्वपूर्ण उपकरणों के आयात की अनुमति दी जानी चाहिए।

 

सीआईआई, फिक्की, पीएचडी चैंबर, सौर और पवन जैसे उद्योग संघों के साथ-साथ निर्माण और पारेषण क्षेत्र के विकासकों ने आयात की निर्भरता को कम करने के लिए मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को परिपुष्ट करने हेतु पूर्ण उत्साह और एक मत से घरेलू विनिर्माण में योगदान देने की केंद्रीय मंत्री की संकल्पित प्रतिज्ञा का पूरी तरह से पालन करने की प्रतिबद्धता जताई।

 

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